• February 19, 2026

आईसीसी टी20 विश्व कप 2026: ग्रुप स्टेज में 4-0 के साथ आगे बढ़ी टीम इंडिया, लेकिन ऑफ स्पिन के सामने उजागर हुई कमजोरियां

नई दिल्ली: आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 में सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने ग्रुप स्टेज में शानदार प्रदर्शन करते हुए चारों मैच जीत लिए हैं। पाकिस्तान पर मिली बड़ी जीत सहित यह 4-0 का रिकॉर्ड टीम की मजबूत लय को दर्शाता है। लेकिन इस शानदार रिकॉर्ड के पीछे कुछ ऐसी कमजोरियां भी छिपी हैं, जो मैच-दर-मैच उजागर होती जा रही हैं – खासकर ऑफ स्पिन गेंदबाजी के सामने भारतीय बल्लेबाजों का संघर्ष।
पावरप्ले और मिडिल ओवर्स में बार-बार फंसती टीम इंडिया

  • USA के खिलाफ: पावरप्ले में सिर्फ 46 रन पर 4 विकेट गिरे, शुरुआत बेहद खराब रही।
  • नामीबिया के खिलाफ: स्थिति थोड़ी संभली, लेकिन मिडिल ओवर्स में रन रेट थम गया। सूर्यकुमार-तिलक वर्मा की साझेदारी ने टिककर खेला, पर पारी रफ्तार नहीं पकड़ सकी।
  • पाकिस्तान के खिलाफ: ईशान किशन के तेज 77 रनों के बावजूद 7 से 14 ओवर के बीच रन गति धीमी रही।
  • नीदरलैंड्स के खिलाफ: बीच के ओवर्स में 62 रन पर 3 विकेट गिरे, फिर वही पुरानी कहानी।

ऑफ स्पिन के सामने सबसे बड़ी चुनौती
ग्रुप स्टेज के सभी चार मैचों में भारतीय बल्लेबाज स्पिनर्स के सामने जूझते नजर आए। चाहे वो अमेरिका के मोहम्मद मोहसिन और हरमीत सिंह हों, नामीबिया के गेरहार्ड इरासमस हों, या नीदरलैंड्स के बास डे लीडे – सभी ने भारतीय बल्लेबाजी पर दबाव बनाया। पाकिस्तान के खिलाफ भी सैम अयूब ने भारतीय गेंदबाजों को खूब परेशान किया।
नीदरलैंड्स के स्पिनर बास डे लीडे ने खुलासा किया कि पाकिस्तान मैच से सबक लेकर उन्होंने स्पिन पर फोकस किया और गेंद की रफ्तार कम रखी, जिससे भारतीय बल्लेबाजों पर काफी दबाव बना। टीम की सबसे बड़ी चिंता ऑफ स्पिन के खिलाफ स्ट्राइक रेट है। सूर्यकुमार और तिलक वर्मा के लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन का भी अब तक कोई खास फायदा नहीं हुआ। असिस्टेंट कोच रयान टेन डोशेट ने भी माना कि इस विश्व कप में मिडिल फेज में बल्लेबाजी काफी कठिन साबित हुई है और फिंगर स्पिनर्स बेहद असरदार रहे हैं।

सुपर-8 में इंतजार कर रही बड़ी चुनौतियां
अब टीम इंडिया सुपर-8 में साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे से भिड़ेगी। पहला बड़ा मुकाबला 22 फरवरी को अहमदाबाद में साउथ अफ्रीका के खिलाफ है। विरोधी टीमें अब स्पष्ट रूप से प्लान कर रही हैं – पावरप्ले के बाद रन रेट को कंट्रोल करना और ऑफ स्पिनर्स से दबाव बनाना।
ग्रुप स्टेज में दिखी छोटी-छोटी कमियां सुपर-8 में बड़ी चुनौती बन सकती हैं। अब सवाल यह है कि क्या टीम मैनेजमेंट और खिलाड़ी समय रहते ऑफ स्पिन के खिलाफ रणनीति में सुधार कर पाएंगे? अगर नहीं, तो सेमीफाइनल और फाइनल की राह में ये कमजोरियां टीम इंडिया के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती हैं।
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