फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर प्रधानाचार्य बनने का आरोप
राष्ट्रपति से सम्मानित पूर्व प्रधानाचार्य जगपाल सिंह सैनी ने उत्तराखंड शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर एक व्यक्ति पर प्रधानाचार्य बनने के लिए फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया। उन्होंने शिक्षा विभाग पर भी मामले में लीपापोती करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
शुक्रवार को पूर्व प्रधानाचार्य जगपाल सैनी ने पत्रकारों को बताया कि माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तरांचल रामनगर नैनीताल ने 17 मई 2022 को उक्त विद्यालय को हाई स्कूल की मान्यता प्रदान की थी। उस समय के विद्यालय प्रबन्धक घनश्याम दास ने सभी नियमों को ताक पर रखकर येन केन प्रकारेण शासन से वर्ष 2005 में विद्यालय को अनुदान सूची पर करवा दिया और अनुदान सूची पर आते ही घनश्याम दास जो उस समय प्रबन्धक थे, ने अपना नाम बदल कर घनश्याम गुप्ता के नाम से वर्ष 2004 में विद्यालय के प्रधानाचार्य बन गये। सैनी ने आरोप लगाया कि घनश्याम ने सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्व विद्यालय वाराणसी उ.प्र. से शास्त्री परीक्षा के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर अपने को प्रधानाचार्य दर्शा दिया और शासन से 2005 से वेतन लेना प्रारम्भ कर दिया। उन्होंने बताया कि उनकी शिकायत पर मुख्य शिक्षा अधिकारी हरिद्वार ने अक्टूबर 2012 और अक्टूबर 2022 को प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिये सम्पूर्णानन्द संस्कृत वि.वि. वाराणसी उ.प्र. को पत्र भेजे थे। इस पर सम्पूर्णानन्द संस्कृत वि.वि. वाराणसी उ.प्र. ने घनश्याम दास उर्फ घनश्याम गुप्ता केे उक्त दोनों प्रमाण पत्रों को फर्जी बताया। सैनी ने प्रशासन से घनश्याम के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।




