Gujarat Jail Security Breached: नारायण साईं की ‘गुप्त चाल’! मैग्नेट से चिपका मिला मोबाइल, FIR दर्ज
गुजरात (Gujarat) की लाजपोर जेल (Lajpore Jail) में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे हाई-प्रोफाइल दोषी नारायण साईं (Narayan Sai) की कोठरी से अचानक की गई चेकिंग के दौरान मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद हुआ है। यह बरामदगी उस वक्त हुई जब जेलर के नाम पर चल रही वसूली के एक रैकेट का भंडाफोड़ हुआ। हैरानी की बात यह है कि नारायण साईं ने फोन को छुपाने के लिए मैग्नेट (चुंबक) का इस्तेमाल किया था, जिससे वह दरवाजे के पीछे चिपका हुआ मिला। फोन के तीनों हिस्से—बैटरी, सिम और हैंडसेट—अलग-अलग जगहों पर बड़ी चालाकी से छुपाए गए थे। इस खुलासे ने जेल प्रशासन की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच तेज हो गई है और नारायण साईं के खिलाफ एक और FIR दर्ज की गई है। तो चलिए जानते हैं पूरा मामला क्या है, जानते हैं विस्तार से…
हाई-प्रोफाइल कैदी की सज़ा और जेल प्रशासन के दावे
नारायण साईं (Narayan Sai) को एक संगीन रेप मामले में दोषी ठहराया गया था और अदालत ने उसे उम्रकैद की कठोर सजा सुनाई थी। यह मामला उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में रहा था, जिसमें पीड़िता ने खुलकर गंभीर आरोप लगाए थे। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद से ही नारायण साईं (Narayan Sai) को गुजरात (Gujarat) की लाजपोर जेल (Lajpore Jail) की हाई-सिक्योरिटी सेल में रखा गया है। जेल प्रशासन हमेशा से यह दावा करता रहा है कि ऐसे हाई-रिस्क कैदियों पर 24×7 विशेष निगरानी रखी जाती है। हालांकि, लंबे समय से जेल में बंद इस दोषी के पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड की बरामदगी ने इन सभी सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। यह घटना सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि जेल के भीतर से बाहरी दुनिया के साथ गैरकानूनी संपर्क बनाने की एक गंभीर कोशिश की ओर इशारा करती है। इसी पृष्ठभूमि में, जेल के भीतर मोबाइल का मिलना बड़ी लापरवाही या मिलीभगत का संकेत देता है।
चालाकी भरा छिपाव और तकनीकी चूक
चेकिंग के दौरान जो खुलासा हुआ, उसने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया। नारायण साईं (Narayan Sai) की सेपरेट कोठरी नंबर-1 की तलाशी में मोबाइल फोन दरवाजे के पीछे मैग्नेट (Magnet) की सहायता से चिपकाया हुआ मिला। यह छिपने का एक ऐसा तरीका था जो पहली बार पकड़ा गया है और जो कैदी की चतुर मानसिकता को दर्शाता है। इससे भी बड़ी चालाकी यह थी कि फोन के पार्ट्स को अलग-अलग छुपाया गया था—सिम कार्ड एक थैले के भीतर था, जबकि मोबाइल की बैटरी उसने सिपाही कक्ष में अलग से छुपा रखी थी। इस तकनीक का उद्देश्य यह था कि अगर कभी अचानक तलाशी हो, तो सभी आपत्तिजनक वस्तुएं एक ही जगह पर न मिलें। यह स्पष्ट करता है कि वह फोन को आवश्यकतानुसार असेंबल करके इस्तेमाल करता था, जिससे पकड़े जाने का खतरा कम रहे। यह घटना जेल के सुरक्षा तंत्र को एक खुली चुनौती है और जेल के अंदर बाहरी संपर्क की संभावना को पुख्ता करती है।
वसूली रैकेट से खुली ‘स्मार्ट’ चोरी
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब लाजपोर जेल (Lajpore Jail) के जेलर के नाम पर चल रहे वसूली रैकेट का भंडाफोड़ हुआ। जेल इंचार्ज दीपक भाभोर (Deepak Bhabhor) को यह सूचना मिली थी कि कोई व्यक्ति जेल अधिकारियों के नाम पर कैदियों के रिश्तेदारों से अवैध रूप से पैसे की मांग कर रहा है। इसी सूचना के आधार पर संदिग्ध को हिरासत में लिया गया और जेल परिसर में अचानक व्यापक चेकिंग शुरू कर दी गई। इसी तलाशी अभियान में नारायण साईं (Narayan Sai) की कोठरी से मोबाइल और सिम बरामद हुए। पुलिस अधिकारी इस बरामदगी को एक बड़ा सुरक्षा उल्लंघन मान रहे हैं। जांच टीमें अब यह पता लगाने में जुट गई हैं कि यह मोबाइल जेल के भीतर कैसे पहुंचा, यह किसके संपर्क में था, और इसे पहुंचाने में किस जेल कर्मचारी की भूमिका रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, कई अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है और यह जाँच बड़े नेटवर्क की ओर भी संकेत कर रही है।
FIR दर्ज और सुरक्षा का पुनर्गठन
मोबाइल और सिम कार्ड बरामद होने के तुरंत बाद, नारायण साईं (Narayan Sai) के खिलाफ सचिन पुलिस स्टेशन (Sachin Police Station) में जेल अधिनियम के तहत एक नई FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज की गई है। यह FIR अब इस बात की विस्तृत जांच करेगी कि मोबाइल कितने समय से उसके पास था और इसका इस्तेमाल किस तरह की गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। इस ‘गुप्त तकनीक’ के खुलासे के बाद लाजपोर जेल (Lajpore Jail) की सुरक्षा व्यवस्था को तुरंत पुनर्गठित किया गया है। जेल प्रशासन ने सभी हाई-रिस्क कैदियों पर निगरानी और अधिक कड़ी कर दी है। कोठरियों की चेकिंग की आवृत्ति (Frequency) को बढ़ाया गया है और सुरक्षा गार्ड्स की ड्यूटी रोटेशन में भी बदलाव किए जा रहे हैं ताकि किसी भी तरह की संभावित मिलीभगत को रोका जा सके। पुलिस इस मामले की तह तक जाकर जेल के अंदर मौजूद पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी में है।