• February 11, 2026

परीक्षा पे चर्चा 2026: तनाव मुक्त परीक्षा के लिए पीएम मोदी का ‘गुरुमंत्र’, रिकॉर्ड 4.5 करोड़ पंजीकरण के साथ दूसरा सत्र आज

नई दिल्ली। देश के करोड़ों छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ का दूसरा महत्वपूर्ण सत्र सोमवार, 9 फरवरी को आयोजित होने जा रहा है। बोर्ड परीक्षाओं की आहट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर छात्रों के साथ संवाद कर उन्हें परीक्षा के तनाव से मुक्ति पाने और आत्मविश्वास के साथ चुनौतियों का सामना करने के गुर सिखाएंगे। शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित यह वार्षिक कार्यक्रम सुबह 10 बजे से प्रधानमंत्री के आधिकारिक यूट्यूब चैनल, दूरदर्शन और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लाइव प्रसारित किया जाएगा। इस वर्ष के कार्यक्रम ने अपनी लोकप्रियता के पिछले सभी कीर्तिमानों को ध्वस्त कर दिया है, जो यह दर्शाता है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा प्रणाली में यह पहल कितनी गहराई तक पैठ बना चुकी है।

इस वर्ष ‘परीक्षा पे चर्चा’ को लेकर देश भर में जो उत्साह देखा गया है, वह ऐतिहासिक है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस पहल के लिए अब तक 4.5 करोड़ से अधिक छात्रों ने अपना पंजीकरण कराया है। यह संख्या न केवल पिछले वर्ष के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को पीछे छोड़ती है, बल्कि भारत के शिक्षा इतिहास में किसी भी संवादात्मक कार्यक्रम के लिए अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी है। विस्तृत आंकड़ों पर नजर डालें तो लगभग 4.19 करोड़ छात्रों के साथ-साथ 24.84 लाख शिक्षकों और 6.15 लाख अभिभावकों ने भी इस अभियान में अपना नामांकन किया है। इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों और अभिभावकों की उपस्थिति यह सुनिश्चित करती है कि परीक्षा के तनाव को कम करने की जिम्मेदारी केवल छात्रों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है।

आज आयोजित होने वाले दूसरे सत्र की रूपरेखा काफी विस्तृत रखी गई है। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ को किसी प्रतियोगिता या उपदेशात्मक भाषण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह मूल रूप से एक मुक्त मंच है, जहां सीखने की प्रक्रिया, सामाजिक दबाव और मानसिक मजबूती जैसे गंभीर विषयों पर प्रधानमंत्री एक अभिभावक और मित्र की भूमिका में खुलकर चर्चा करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य परीक्षा को जीवन-मरण का सवाल बनाने के बजाय इसे एक उत्सव के रूप में देखने की प्रवृत्ति विकसित करना है।

सत्र के दौरान प्रधानमंत्री मोदी देश के विभिन्न कोनों से आए छात्रों के साथ सीधे संवाद करेंगे। इस बार तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, गुजरात और असम के छात्रों को विशेष रूप से शामिल किया गया है, जो अपनी भाषाई और क्षेत्रीय विविधता के साथ परीक्षा से जुड़े अपने अनूठे अनुभव और आशंकाएं प्रधानमंत्री के समक्ष रखेंगे। इन राज्यों के छात्रों की आवाजों के माध्यम से परीक्षा की तैयारी में सकारात्मक सोच बनाए रखने, समय प्रबंधन और एकाग्रता बढ़ाने जैसे विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्राप्त होगा। प्रधानमंत्री का ध्यान विशेष रूप से इस बात पर रहेगा कि छात्र बिना किसी बाहरी दबाव के अपनी स्वाभाविक प्रतिभा को कैसे निखारें।

कार्यक्रम के महत्व पर बात करते हुए शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ ने देश में मानसिक स्वास्थ्य पर होने वाली चर्चाओं को मुख्यधारा में लाने का काम किया है। अक्सर बोर्ड परीक्षाओं के दौरान छात्र अकेलेपन और अवसाद का शिकार हो जाते हैं, ऐसे में देश के प्रधानमंत्री का सीधे उनसे बात करना एक मनोवैज्ञानिक सुरक्षा कवच का काम करता है। यह कार्यक्रम न केवल छात्रों को तकनीक और गैजेट्स के सही उपयोग की सलाह देता है, बल्कि अभिभावकों को भी यह समझाता है कि वे अपने बच्चों की तुलना दूसरों से करना बंद करें।

प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने संवादों में ‘एग्जाम वारियर्स’ (Exam Warriors) का जिक्र करते हैं। इस दूसरे सत्र में भी वे छात्रों को याद दिलाएंगे कि अंक पत्र केवल एक कागज का टुकड़ा है और वास्तविक सफलता निरंतर सीखने और व्यक्तित्व विकास में निहित है। कार्यक्रम का सजीव प्रसारण यह सुनिश्चित करेगा कि सुदूर गांवों से लेकर महानगरों तक का हर छात्र इस सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ सके। शिक्षा मंत्रालय ने इसके लिए विशेष तकनीकी व्यवस्था की है ताकि बड़ी संख्या में व्यूअरशिप होने के बावजूद प्रसारण निर्बाध बना रहे।

जैसे-जैसे परीक्षाओं की घड़ियां करीब आ रही हैं, 9 फरवरी का यह सत्र छात्रों के लिए एक मनोबल बढ़ाने वाली संजीवनी के रूप में देखा जा रहा है। 4.5 करोड़ से अधिक पंजीकरणों के साथ यह आयोजन अब केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है, जो भविष्य की पीढ़ी को अधिक सशक्त, निडर और संतुलित बनाने की दिशा में अग्रसर है।

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