एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस ने अक्षरधाम मंदिर का किया दौरा: वैश्विक शांति की प्रार्थना, सांस्कृतिक नौका विहार का अनुभव, भारत-एस्टोनिया संबंधों को मजबूती
नई दिल्ली: एस्टोनिया गणराज्य के राष्ट्रपति अलार कारिस अपने विशेष प्रतिनिधिमंडल के साथ 17 फरवरी 2026 को स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर पहुंचे। राष्ट्रपति कारिस ने तालिन्न से आए प्रतिनिधिमंडल के साथ मंदिर का भ्रमण किया, जहां उन्होंने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को करीब से अनुभव किया।
राष्ट्रपति के साथ एस्टोनिया की भारत में राजदूत मार्जे लूप, राष्ट्रपति कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, विदेश मंत्रालय के सदस्य, डिजिटल और एआई क्षेत्र के प्रतिनिधि तथा एआई-लीप के नेतृत्वकर्ता भी मौजूद रहे। यह दौरा एस्टोनिया के राष्ट्रपति के भारत दौरे का हिस्सा था, जो मुख्य रूप से इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग लेने के लिए था।
भव्य स्वागत और दर्शन
अक्षरधाम परिसर पहुंचने पर राष्ट्रपति और प्रतिनिधिमंडल का दिव्यामृतदास स्वामी, ज्ञानमुनिदास स्वामी और अन्य सीनियर कर्मचारियों द्वारा पारंपरिक स्वागत किया गया। उन्होंने मंदिर में दर्शन किए, अभिषेक में भाग लिया और वैश्विक शांति, सद्भाव तथा सभी समुदायों के कल्याण के लिए प्रार्थना की।प्रतिनिधिमंडल ने सांस्कृतिक नौका विहार का भी आनंद लिया, जिसमें भारत की प्राचीन विरासत, दर्शनशास्त्र और मानव प्रगति में योगदान की जानकारी प्राप्त हुई। इस अनुभव ने दोनों देशों के बीच संवाद, नवाचार और अंतरसांस्कृतिक समझ की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
अक्षरधाम परिसर पहुंचने पर राष्ट्रपति और प्रतिनिधिमंडल का दिव्यामृतदास स्वामी, ज्ञानमुनिदास स्वामी और अन्य सीनियर कर्मचारियों द्वारा पारंपरिक स्वागत किया गया। उन्होंने मंदिर में दर्शन किए, अभिषेक में भाग लिया और वैश्विक शांति, सद्भाव तथा सभी समुदायों के कल्याण के लिए प्रार्थना की।प्रतिनिधिमंडल ने सांस्कृतिक नौका विहार का भी आनंद लिया, जिसमें भारत की प्राचीन विरासत, दर्शनशास्त्र और मानव प्रगति में योगदान की जानकारी प्राप्त हुई। इस अनुभव ने दोनों देशों के बीच संवाद, नवाचार और अंतरसांस्कृतिक समझ की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
टेक्नोलॉजी और नैतिक विकास पर जोर
दौरे में एस्टोनिया के डिजिटल, साइबर कूटनीति और एआई विशेषज्ञों की मौजूदगी ने जिम्मेदार टेक्नोलॉजी, नैतिक नवाचार और वैश्विक सहयोग के महत्व को उजागर किया। दोनों देशों के बीच डिजिटल विकास और नैतिक मूल्यों पर मजबूत बॉन्डिंग दिखी।
दौरे में एस्टोनिया के डिजिटल, साइबर कूटनीति और एआई विशेषज्ञों की मौजूदगी ने जिम्मेदार टेक्नोलॉजी, नैतिक नवाचार और वैश्विक सहयोग के महत्व को उजागर किया। दोनों देशों के बीच डिजिटल विकास और नैतिक मूल्यों पर मजबूत बॉन्डिंग दिखी।
महंत स्वामी महाराज का पत्र और राष्ट्रपति का संदेश
परम पूज्य महंत स्वामी महाराज ने राष्ट्रपति कारिस को एक निजी पत्र लिखकर उनके आगमन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने एस्टोनिया और उसके नागरिकों की शांति-समृद्धि तथा राष्ट्रपति के स्वास्थ्य और सफलता की कामना की, साथ ही आपसी समझ और सहयोग से दोनों देशों के मैत्रीपूर्ण संबंधों के और मजबूत होने की आशा जताई।राष्ट्रपति अलार कारिस ने मंदिर दर्शन के बाद लिखा, “मंदिर दर्शन के लिए धन्यवाद। मुझे आशा है कि मैं फिर आऊंगा। यह बहुत ही प्रभावशाली रहा। आइए भारत और एस्टोनिया के बीच शांति और अच्छे संबंधों की कामना करें।”यह दौरा भारत और एस्टोनिया के बीच सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।
परम पूज्य महंत स्वामी महाराज ने राष्ट्रपति कारिस को एक निजी पत्र लिखकर उनके आगमन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने एस्टोनिया और उसके नागरिकों की शांति-समृद्धि तथा राष्ट्रपति के स्वास्थ्य और सफलता की कामना की, साथ ही आपसी समझ और सहयोग से दोनों देशों के मैत्रीपूर्ण संबंधों के और मजबूत होने की आशा जताई।राष्ट्रपति अलार कारिस ने मंदिर दर्शन के बाद लिखा, “मंदिर दर्शन के लिए धन्यवाद। मुझे आशा है कि मैं फिर आऊंगा। यह बहुत ही प्रभावशाली रहा। आइए भारत और एस्टोनिया के बीच शांति और अच्छे संबंधों की कामना करें।”यह दौरा भारत और एस्टोनिया के बीच सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।