• February 11, 2026

‘एपस्टीन फाइल्स’ से दलाई लामा का कोई संबंध नहीं, कार्यालय ने भ्रामक दावों को सिरे से खारिज किया

धर्मशाला। आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के कार्यालय ने उन तमाम मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट्स पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें पूरी तरह निराधार बताया है, जिनमें तथाकथित ‘एपस्टीन फाइल्स’ के हवाले से दलाई लामा का नाम अमेरिकी फाइनेंसर और सजायाफ्ता यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा था। शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित मैक्लॉडगंज के थेकचेन चोएलिंग से जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कार्यालय ने इन दावों को न केवल भ्रामक बताया, बल्कि इन्हें बौद्ध गुरु की बेदाग छवि को धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। 8 फरवरी 2026 को जारी इस विस्तृत स्पष्टीकरण में साफ किया गया है कि दलाई लामा और विवादित अमेरिकी शख्सियत जेफरी एपस्टीन के बीच कभी कोई संपर्क नहीं रहा है।

दलाई लामा के कार्यालय की ओर से जारी बयान में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि हाल के दिनों में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और कुछ समाचार माध्यमों में ‘एपस्टीन फाइल्स’ का हवाला देते हुए भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कार्यालय ने पुष्टि की है कि आध्यात्मिक गुरु ने अपने पूरे जीवनकाल में कभी भी जेफरी एपस्टीन से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात नहीं की है। बयान में आगे यह भी स्पष्ट किया गया है कि दलाई लामा की ओर से किसी भी अन्य व्यक्ति, प्रतिनिधि या संस्था को कभी भी एपस्टीन से मिलने, संवाद करने या किसी भी प्रकार का संबंध स्थापित करने की अनुमति नहीं दी गई थी। कार्यालय ने इन दावों को ‘तथ्यहीन’ और ‘झूठा’ बताते हुए जनता और अनुयायियों से ऐसी किसी भी अपुष्ट खबर पर विश्वास न करने की अपील की है।

विज्ञप्ति में इस बात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया गया है कि बिना किसी पुख्ता सबूत या सत्यापन के एक वैश्विक आध्यात्मिक हस्ती को ऐसे संवेदनशील और विवादास्पद मामले से जोड़ा गया। कार्यालय ने जोर देकर कहा कि दलाई लामा का पूरा जीवन नैतिक मूल्यों, करुणा, वैश्विक शांति और अहिंसा के सिद्धांतों के प्रति समर्पित रहा है। ऐसे में उन्हें एक ऐसे व्यक्ति से जोड़ना, जो गंभीर अपराधों में संलिप्त रहा हो, न केवल हास्यास्पद है बल्कि सच्चाई से कोसों दूर और अपमानजनक भी है। कार्यालय का मानना है कि इस तरह की खबरें जानबूझकर भ्रम फैलाने और एक सम्मानित व्यक्तित्व के प्रति जनमानस में अविश्वास पैदा करने के उद्देश्य से प्रसारित की जा रही हैं।

गौरतलब है कि ‘एपस्टीन फाइल्स’ को लेकर पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा हो रही है। जेफरी एपस्टीन की मृत्यु के बाद उससे जुड़े दस्तावेजों और फाइलों के सार्वजनिक होने की प्रक्रिया के दौरान सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार गर्म है। इस दौरान कई वैश्विक नेताओं, राजनेताओं और चर्चित हस्तियों के नाम बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के उछाले जा रहे हैं। विशेषज्ञों और सूचना तकनीक के जानकारों का मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई दावे केवल सनसनी फैलाने के लिए गढ़े गए हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। दलाई लामा के संदर्भ में भी यही स्थिति देखी गई, जहां कुछ शरारती तत्वों ने उनके नाम का दुरुपयोग कर दुष्प्रचार करने की कोशिश की।

धर्मशाला मुख्यालय से जारी इस प्रेस स्टेटमेंट का उद्देश्य उन सभी अटकलों पर पूर्णविराम लगाना है जो पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर तैर रही थीं। कार्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि यह खंडन अंतिम और सर्वोपरी है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर किसी भी प्रकार के संबंध या मुलाकात की संभावना को शून्य बताया गया है। दलाई लामा के करोड़ों अनुयायी दुनिया भर में फैले हुए हैं और इस तरह की खबरों से उनके बीच गहरी चिंता व्याप्त थी, जिसे दूर करने के लिए कार्यालय ने तत्काल प्रभाव से यह कदम उठाया है।

तथ्यों की पड़ताल करने वाले विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान दौर में ‘डीप फेक’ और ‘गलत सूचना’ (मिस्इन्फॉर्मेशन) के बढ़ते दौर में किसी भी प्रतिष्ठित व्यक्ति को निशाना बनाना आसान हो गया है। एपस्टीन फाइल्स के नाम पर फैलाई जा रही फर्जी सूचियों में दलाई लामा का नाम शामिल करना इसी तरह के डिजिटल दुष्प्रचार का हिस्सा प्रतीत होता है। दलाई लामा कार्यालय के इस सख्त रुख के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भी ऐसी भ्रामक सामग्रियों को हटाने की दिशा में कदम उठाएंगे। अंततः, यह स्पष्टीकरण न केवल दलाई लामा की सत्यनिष्ठा को दोहराता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि बिना प्रमाण के किसी भी सूचना को स्वीकार करना समाज के लिए घातक हो सकता है।

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