पीक मांग के बराबर नहीं उपलब्ध है बिजली, बढ़ रही ग्रामीण क्षेत्रों की परेशानी
कई जिलों में कम बारिश और उमस भरा मौसम रहने के कारण बिजली की डिमांड बढ़ रही है, जबकि वर्तमान में पीक डिमांड की अपेक्षा बिजली की उपलब्धता कम है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कटौती करनी पड़ रही है। इससे किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि इस समय पीक डिमांड 28000 मेगावाट के ऊपर है और बिजली की उपलब्धता 26317 मेगावाट है। ऐसे में लगभग दो हजार मेगावाट बिजली कटौती करनी पड़ रही है। यदि मौसम की बेरुखी ऐसे ही बनी रही तो आने वाले दिनों में किसानों की परेशानी और बढ़ जाएगी। वहीं विभाग की बेरुखी से मेजा की 660 मेगावाट, ललितपुर की 660 मेगावाट, अनपरा की 500 मेगावाट, हरदुआगंज की 105 मेगावाट की मशीन दो दिन से बंद है। अर्थात 1925 मेगावाट बिजली उत्पादन दो दिन से बंद पड़ा है।
पावर कारपोरेशन के सूत्रों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति की जगह वर्तमान में 15 घंटे 31 मिनट ही बिजली आपूर्ति हो रही है। वहीं नगर पंचायतों में भी एक घंटे कम बिजली आपूर्ति हो रही है। संभावना जताई गयी है कि दो दिन से बंद कुछ बिजली उत्पादन केंद्र अगले एक-दो दिन में ठीक हो जाएंगे लेकिन वर्तमान में जब किसानों को और ग्रामीण जनता को बिजली की ज्यादा आवश्यकता है तो पूरे प्रदेश में बडे़ पैमाने पर बिजली की कटौती हो रही है। ऐसे में पावर कारपोरेशन प्रबंधन को तत्काल बिजली की उपलब्धता को बढ़ाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस भीषण गर्मी में जब उमस भी बढ़ रही है तो ग्रामीण व किसानों को बिजली की ज्यादा से ज्यादा आवश्यकता है। ऐसे में प्रदेश में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए पावर कार्पोरेशन प्रबंधन को युद्ध स्तर पर काम करना होगा, क्योंकि वर्तमान में कोयले की उपलब्धता अच्छी गुणवत्ता की नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से भी बिजली उत्पादन पर फर्क पड़ रहा है। ऐसे में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन को सभी इंतजामों पर काम करना होगा, अन्यथा की स्थिति में बिजली संकट और भी गहरायेगा।




