पूर्वी यूपी का पहला वेटरिनरी कॉलेज जून 2026 तक तैयार, छात्रों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
गोरखपुर: पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय (वेटरिनरी कॉलेज) जून 2026 के अंत तक बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है। कॉलेज के खुलने के बाद यहां पशु चिकित्सा में डिग्री और डिप्लोमा की पढ़ाई के साथ-साथ पशुओं का इलाज भी किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही इस महाविद्यालय को भविष्य में विश्वविद्यालय के रूप में अपग्रेड करने की मंशा जता चुके हैं। गोरखपुर-वाराणसी राजमार्ग के ताल नदोर में बन रहे इस महाविद्यालय का शिलान्यास एवं भूमि पूजन 3 मार्च 2024 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था।
निर्माण कार्य की जानकारी
इस महाविद्यालय का निर्माण कार्य 10 सितंबर 2024 को शुरू हुआ था। यह वेटरिनरी कॉलेज पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, मथुरा से संबद्ध होगा। इसके पूरा होने से पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बिहार और पड़ोसी देश नेपाल के पशुपालकों को लाभ होगा।
कॉलेज को 80 एकड़ क्षेत्र में तीन चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले चरण के निर्माण पर 277 करोड़ रुपये की लागत आएगी। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता मनीष कुमार के अनुसार, पहले चरण का 65 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और भवनों की संरचना तैयार हो गई है। जून 2026 तक निर्माण कार्य पूरी तरह पूरा हो जाएगा।
छात्रों के लिए आधुनिक सुविधाएं
पहले चरण में कॉलेज परिसर में निम्नलिखित सुविधाएं बनाई जाएंगी:
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एकेडमिक ब्लॉक (भूतल + पांच मंजिल)
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हॉस्पिटल ब्लॉक
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आवासीय ब्लॉक
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छात्रावास: 106 पुरुष, 106 महिला, 60-60 पीजी पुरुष और पीजी महिला
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ऑडिटोरियम, गेस्ट हाउस और कम्युनिटी सेंटर
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पशुओं के रहने की जगह, फीड स्टोर, एसटीपी और किसान भवन
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पशु चिकित्सा विज्ञान से जुड़े विभिन्न शोध एवं अध्ययन केंद्र
महाविद्यालय को ‘नेट जीरो एनर्जी’ की अवधारणा पर विकसित किया जाएगा, इसके लिए सोलर पावर प्लांट लगाया जाएगा। प्रारंभिक चरण में स्नातक स्तर पर 100 छात्रों का प्रवेश होगा।
भूमि पूजन के दौरान सीएम के बयान
भूमि पूजन के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि यह महाविद्यालय भविष्य में विश्वविद्यालय में परिवर्तित किया जाएगा। यहां पशुओं के इलाज के साथ नस्ल सुधार, फिशरीज से जुड़े कार्यक्रम और युवा पशु चिकित्सकों के लिए करियर के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
महाविद्यालय की डिज़ाइन श्रावस्ती के राजा शालिहोत्र की परिकल्पना पर आधारित है। राजा शालिहोत्र ने तीसरी सदी में शालिहोत्र संहिता रचकर पशुधन क्षेत्र को समृद्ध किया और उन्हें भारतीय परंपरा में पशु चिकित्सा विज्ञान का जनक माना जाता है।