• January 1, 2026

नए साल के जश्न के बीच साइबर ठगों की दस्तक: ‘हैप्पी न्यू ईयर’ मैसेज से खाली हो सकता है आपका बैंक खाता

नई दिल्ली: साल 2026 का आगाज हो चुका है और चारों तरफ खुशियों का माहौल है। लोग एक-दूसरे को नए साल की बधाइयां दे रहे हैं और सोशल मीडिया से लेकर व्हाट्सएप तक शुभकामनाओं संदेशों की बाढ़ आई हुई है। लेकिन सावधानी हटी और दुर्घटना घटी वाली कहावत इस समय बिल्कुल सटीक बैठती है। साइबर विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है कि उत्सव के इस माहौल में साइबर अपराधी सक्रिय हो गए हैं। आपके मोबाइल पर आने वाला एक साधारण सा दिखने वाला “हैप्पी न्यू ईयर” मैसेज आपकी जमा पूंजी पर डाका डाल सकता है। अनजान नंबरों से आने वाले ये आकर्षक संदेश वास्तव में एक डिजिटल जाल हैं, जिसे आपकी बैंकिंग जानकारी चुराने के लिए बुना गया है।

बधाई संदेशों की आड़ में फिशिंग स्कैम का खतरा

आजकल साइबर अपराधी लोगों की भावनाओं और त्योहारों के उत्साह का फायदा उठाने के लिए ‘फिशिंग’ (Phishing) तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। इस घोटाले की शुरुआत एक अनजान नंबर से आने वाले व्हाट्सएप या टेक्स्ट मैसेज से होती है। मैसेज में “नया साल मुबारक हो” या “आपके लिए एक सरप्राइज गिफ्ट है” जैसे लुभावने शब्द लिखे होते हैं। इन संदेशों के अंत में अक्सर एक छोटा लिंक (URL) दिया होता है। जैसे ही कोई यूजर उत्सुकतावश उस लिंक पर क्लिक करता है, वह एक फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाता है जो बिल्कुल असली बैंक या शॉपिंग साइट की तरह दिखती है। यहां से हैकर्स आपके फोन का एक्सेस प्राप्त कर सकते हैं या आपसे आपकी गोपनीय जानकारी भरवा सकते हैं।

कैसे काम करता है यह खतरनाक डिजिटल जाल

साइबर ठगी का यह तरीका बेहद शातिर है। कई बार इन लिंक्स पर क्लिक करते ही आपके मोबाइल में एक ‘मैलेसियस सॉफ्टवेयर’ या ‘स्पाइवेयर’ बैकग्राउंड में डाउनलोड हो जाता है। यह सॉफ्टवेयर आपके कीबोर्ड की हर गतिविधि (Keylogging) पर नजर रखता है। इसका मतलब है कि जब आप अपना नेट बैंकिंग पासवर्ड या यूपीआई पिन दर्ज करते हैं, तो वह जानकारी सीधे अपराधी के पास पहुंच जाती है। इसके अलावा, कुछ मैसेज ऐसे होते हैं जो आपको एक आकर्षक ऑनलाइन गेम या ‘न्यू ईयर लकी ड्रा’ का हिस्सा बनने का लालच देते हैं। इसमें जीत की राशि पाने के लिए आपसे एक मामूली रजिस्ट्रेशन फीस मांगी जाती है और जैसे ही आप भुगतान के लिए कार्ड डिटेल्स डालते हैं, आपका खाता खाली कर दिया जाता है।

अनजान नंबरों से आए लिंक पर क्लिक करने के घातक परिणाम

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान नंबर से आए लिंक को खोलना अपने घर का दरवाजा किसी चोर के लिए खोलने जैसा है। ये लिंक न केवल आपकी बैंकिंग डिटेल्स चुराते हैं, बल्कि आपके फोन की गैलरी, कॉन्टैक्ट्स और निजी चैट तक पहुंच बना लेते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि हैकर्स आपकी निजी तस्वीरों का इस्तेमाल आपको ब्लैकमेल करने के लिए भी कर सकते हैं। इसलिए, यदि आपको किसी ऐसे नंबर से बधाई संदेश मिले जिसे आपने सेव नहीं किया है और उसमें कोई संदेहास्पद लिंक हो, तो उसे तुरंत डिलीट करना ही बुद्धिमानी है। याद रखें कि कोई भी प्रतिष्ठित बैंक या संस्थान कभी भी आपको इस तरह के लिंक के जरिए इनाम या ऑफर नहीं भेजता है।

व्यक्तिगत जानकारी और ओटीपी की सुरक्षा सर्वोपरि

डिजिटल युग में आपकी निजी जानकारी ही आपकी सबसे बड़ी संपत्ति है। साइबर ठग अक्सर खुद को बैंक अधिकारी या किसी नामी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर आपसे बात करते हैं। वे कह सकते हैं कि आपके खाते में नए साल का बोनस आया है, जिसे एक्टिवेट करने के लिए आपको एक ओटीपी (OTP) बताना होगा। यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि ओटीपी का मतलब ही ‘वन टाइम पासवर्ड’ है और यह केवल आपके द्वारा किए जा रहे ट्रांजैक्शन की पुष्टि के लिए होता है। इसे किसी के साथ साझा करने का मतलब है अपने खाते की चाबी किसी और को सौंप देना। चाहे कितनी भी बड़ी इमरजेंसी या लालच दिया जाए, अपना आधार नंबर, पैन कार्ड डिटेल्स या ओटीपी कभी भी किसी अनजान व्यक्ति को न दें।

संदिग्ध संदेशों को पहचानें और तत्काल रिपोर्ट करें

सतर्कता ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। यदि आपको अपने फोन पर कोई ऐसा मैसेज मिलता है जो बहुत अधिक आकर्षक लग रहा हो या जिसमें व्याकरण की गलतियां हों, तो समझ लीजिए कि वह फर्जी हो सकता है। ऐसे नंबरों को न केवल ब्लॉक करें, बल्कि संबंधित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म (जैसे व्हाट्सएप) पर ‘रिपोर्ट’ भी करें। रिपोर्ट करने से उस नंबर की संदिग्ध गतिविधियों का डेटा सर्वर पर दर्ज हो जाता है, जिससे भविष्य में अन्य लोगों को ठगे जाने से बचाया जा सकता है। साइबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर भी ऐसी घटनाओं की जानकारी दी जा सकती है। संदिग्ध नंबरों को कभी भी अपने फोन में सेव न करें, क्योंकि कुछ ऐप्स सेव किए गए नंबरों को आपकी प्रोफाइल पिक्चर और स्टेटस देखने की अनुमति दे देते हैं।

बैंकिंग और सोशल मीडिया अकाउंट्स की सुरक्षा सेटिंग्स

अपने डिजिटल जीवन को सुरक्षित रखने के लिए केवल सावधानी ही काफी नहीं है, बल्कि तकनीकी सुरक्षा का कवच भी जरूरी है। अपने सभी बैंकिंग ऐप्स, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ (2FA) या ‘दो-चरणीय प्रमाणीकरण’ को अनिवार्य रूप से सक्रिय करें। इससे यह फायदा होता है कि यदि किसी को आपका पासवर्ड पता चल भी जाए, तो भी वह बिना आपके फोन पर आए दूसरे कोड के लॉगिन नहीं कर पाएगा। इसके अलावा, समय-समय पर अपने पासवर्ड बदलते रहें और एक ही पासवर्ड का उपयोग सभी प्लेटफॉर्म्स पर करने से बचें। मजबूत पासवर्ड वह होता है जिसमें अक्षर, संख्याएं और विशेष प्रतीक (जैसे @, #, $) शामिल हों।

स्मार्टफोन और ऐप्स को अपडेट रखने का महत्व

तकनीकी सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए अपने स्मार्टफोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और बैंकिंग ऐप्स को हमेशा लेटेस्ट वर्जन पर अपडेट रखें। सॉफ्टवेयर कंपनियां समय-समय पर ‘सिक्योरिटी पैच’ जारी करती हैं, जो नए प्रकार के वायरस और हैकिंग के तरीकों से आपके फोन को बचाते हैं। अक्सर हैकिंग के शिकार वही लोग होते हैं जिनके फोन में पुरानी सिक्योरिटी सेटिंग्स होती हैं और जिन्हें हैकर्स आसानी से भेद लेते हैं। अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर ‘ऑटो-अपडेट’ का विकल्प चालू रखें ताकि जैसे ही कोई नया सुरक्षा अपडेट आए, आपका फोन सुरक्षित हो जाए।

उत्सव के दौरान डिजिटल जागरूकता की आवश्यकता

नए साल का यह समय खुशियां बांटने का है, न कि लापरवाही बरतने का। डिजिटल साक्षरता आज के समय की मांग है। अपने परिवार के बुजुर्गों और बच्चों को भी इन खतरों के बारे में शिक्षित करें, क्योंकि वे अक्सर इन साइबर अपराधियों के आसान शिकार बन जाते हैं। किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा करने से पहले दो बार सोचें। यदि आपको लगता है कि आप किसी घोटाले का शिकार हो गए हैं, तो बिना देर किए अपने बैंक को सूचित करें और अपना कार्ड ब्लॉक करवाएं। साथ ही, नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं। आपकी जागरूकता ही आपको और आपके परिवार की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख सकती है।

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