यूपी में सीएम योगी का मास्टर प्लान: रोहिंग्या-बांग्लादेशी घुसपैठियों पर लगाम, हाईटेक डेटाबेस से फर्जी आईडी का खेल खत्म
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध घुसपैठियों और फर्जी पहचान पत्रों के जाल पर कड़ा प्रहार करने के लिए व्यापक अभियान तेज कर दिया है। पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद घुसपैठियों के अन्य राज्यों में पलायन की आशंका को देखते हुए, योगी सरकार ने रोहिंग्या और बांग्लादेशी नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकने का रोडमैप तैयार किया है। इसका मकसद न केवल वर्तमान घुसपैठियों की पहचान करना, बल्कि भविष्य में उनकी दोबारा घुसपैठ को असंभव बनाना है हाईटेक डेटाबेस से बायोमेट्रिक ट्रैकिंग, निगेटिव लिस्ट में नाम दर्जसूत्रों के अनुसार, SIR सर्वे के जरिए पकड़े जाने वाले घुसपैठियों की पहचान के साथ ही पहली बार एक विशाल डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इसमें फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन, फेशियल रिकॉग्निशन, आवाज विश्लेषण और परिवारिक संबंधों का पूरा बायोमेट्रिक प्रोफाइल दर्ज होगा। यह डेटाबेस पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा, ताकि कोई संदिग्ध नया नाम, उम्र या दस्तावेज लेकर दोबारा न घुस सके। हर पकड़े गए व्यक्ति का नाम ‘निगेटिव लिस्ट’ में डाला जाएगा, जिसके बाद वह आधार, पैन, वोटर आईडी, बैंक अकाउंट या मोबाइल सिम जैसी कोई सुविधा हासिल नहीं कर सकेगा। हाईटेक सिस्टम से यह भी ट्रैक किया जाएगा कि घुसपैठिया कब से, कहां और किस पहचान से छिपकर रह रहा था। फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोहों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। पिछले दो दशकों में विकसित हुए ऐसे नेटवorks को तोड़ने के लिए यह चेन पूरी तरह भंग करने पर जोर है।
अभियान के तीन स्तंभ: पहचान, नेटवर्क तोड़ना और रोकथाम
सरकार का यह मास्टर प्लान तीन मुख्य हिस्सों में विभाजित है:
- पहचान: फेशियल रिकॉग्निशन और बायोमेट्रिक डेटा से ऐसी प्रोफाइल बनेगी, जिसे बदलना नामुमकिन होगा।
- नेटवर्क तोड़ना: पकड़े गए घुसपैठियों से पूछताछ कर फर्जी दस्तावेज बनाने वालों, सहयोगियों और हॉटस्पॉट इलाकों की जानकारी निकाली जाएगी। यह डेटा प्रदेशभर की जांच टीमों के साथ साझा होगा।
- रोकथाम: निगेटिव लिस्ट को आधार, पासपोर्ट, बैंक, टेलीकॉम और वोटर लिस्ट के साथ लिंक किया जाएगा, जिससे दोबारा घुसपैठ की कोई गुंजाइश न बचे।
उत्तर प्रदेश एटीएस ने पहले ही कई रोहिंग्या घुसपैठियों को गिरफ्तार कर नेटवर्क की गहराई उजागर की है। हर जिले में डिटेंशन सेंटर, रैन बसेरे को बदला जाएगा अस्थायी केंद्रयोगी सरकार ने सभी 17 नगर निगमों में एक-एक रैन बसेरे को अस्थायी डिटेंशन सेंटर में तब्दील करने के निर्देश जारी किए हैं। संबंधित नगर निगम चुनेगा कि कौन सा रैन बसेरा इसके लिए उपयुक्त है, जबकि सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस पर होगी। हर मंडल में पकड़े गए घुसपैठियों को उसी मंडल के सेंटर में रखा जाएगा, जिससे मॉनिटरिंग आसान हो और फरार होने का खतरा कम रहे। डिटेंशन सेंटरों में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक घुसपैठियों को रखा जाएगा, उसके बाद विदेशी नागरिक अधिनियम 1946 के तहत निर्वासन होगा। FRRO (फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस) के साथ समन्वय से यह प्रक्रिया तेज होगी।
सीएम कार्यालय की पैनी नजर, 75 जिलों पर केंद्रीय कंट्रोल रूम
मुख्यमंत्री कार्यालय हर जिले के SIR सर्वे की रिपोर्ट सीधे मॉनिटर कर रहा है। लखनऊ में बने केंद्रीकृत कंट्रोल रूम में जिला स्तर की प्रगति रिपोर्टों का विश्लेषण होता है। प्रतिदिन अधिकारियों को भेजे जाने वाले आंकड़ों में शामिल हैं: कितने संदिग्ध मिले,
हालांकि, विपक्षी दलों ने इसे “अल्पसंख्यक विरोधी” करार दिया है। कांग्रेस नेता अजय राय ने सवाल उठाया कि 2017 से सत्ता में रहने के बावजूद घुसपैठिए अब क्यों चिन्हित हो रहे हैं। सरकार का दावा है कि यह न तो राजनीतिक है और न भावुक—बल्कि कानूनी और सुरक्षा आधारित है। मार्च 2026 तक अभियान पूरा करने का लक्ष्य है। इस अभियान से उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत होने के साथ ही सीमावर्ती सुरक्षा को नया आयाम मिलेगा। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।