• March 13, 2026

CM Yogi’s Big Directive: आधार कार्ड पर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, जानें क्यों उत्तर प्रदेश में अब Birth Proof के लिए नहीं चलेगा आपका आधार?

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की सरकार ने आधार कार्ड (Aadhaar Card) के उपयोग को लेकर एक ऐतिहासिक और बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अब राज्य की किसी भी सरकारी प्रक्रिया या आवेदन में आधार कार्ड को जन्म प्रमाण पत्र (Birth Proof) के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह निर्णय उस समय लिया गया है जब एसआईआर (SIR) प्रक्रिया चल रही है और आधार के डेटा में गलत जानकारी सामने आने के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस फैसले को UIDAI के उस बयान से बल मिला, जिसमें कहा गया था कि आधार में दर्ज जन्मतिथि ‘स्वयं-घोषित’ (Self-Declared) होती है और यह प्रमाणिक सत्यापन पर आधारित नहीं है। इस घोषणा के बाद नागरिकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि, अब उन्हें अपनी जन्मतिथि सिद्ध करने के लिए किन दस्तावेजों पर निर्भर रहना होगा?

आधार को जन्म प्रमाण मानने पर क्यों उठा सवाल?

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार द्वारा आधार कार्ड (Aadhaar Card) को जन्म प्रमाण के रूप में अमान्य करने के पीछे मुख्य कारण इसकी प्रक्रियात्मक कमजोरी है। आधार को पहचान (Identity) और निवास (Address) के प्रमाण के रूप में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन हाल के दिनों में आधार में दर्ज जन्मतिथि (Date of Birth – DOB) और व्यक्ति के मूल दस्तावेजों में बड़ा अंतर पाया गया है। सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि आधार बनवाते समय जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड या अस्पताल रिकॉर्ड जैसे विश्वसनीय और सत्यापित दस्तावेज अनिवार्य नहीं होते। इसलिए, आधार पर दर्ज जन्मतिथि को केवल ‘स्वयं घोषित’ (Self-Declared) माना जाता है। सरकार का तर्क है कि इस प्रकार की अपुष्ट जानकारी भविष्य में कानूनी विवादों, फर्जी दस्तावेजों की बढ़ती शिकायतों और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में गलत सूचनाओं का कारण बन सकती है।

आधार कार्ड नहीं होगा जन्म प्रमाण पत्र का सबूत

योगी सरकार (CM Yogi Adityanath) ने यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब राज्य के किसी भी सरकारी विभाग, संस्था या आवेदन प्रक्रिया में आधार कार्ड (Aadhaar Card) को जन्म प्रमाण पत्र के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। नियोजन विभाग (Planning Department) द्वारा जारी किए गए पत्र में बताया गया है कि UIDAI (Unique Identification Authority of India) ने खुद कहा है कि आधार में लिखी जन्मतिथि सत्यापित नहीं होती है। ऐसे में, किसी व्यक्ति की आयु निर्धारण के लिए इसे कानूनी और प्रामाणिक दस्तावेज मानना सही नहीं है। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब देश में पहचान से जुड़े धोखाधड़ी के कई गंभीर मामले सामने आए हैं—जिसमें आजम खान (Azam Khan) और उनके बेटे को दो अलग-अलग पैन कार्ड (PAN Card) के मामले में सज़ा भी सुनाई गई है। सरकार का मानना है कि इस कदम से कानूनी प्रक्रियाओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोका जा सकेगा।

UIDAI की सफाई और अन्य राज्यों में भी बढ़ी सतर्कता

UIDAI (यूआईडीएआई) ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि आधार कार्ड (Aadhaar Card) पर लिखी जन्मतिथि को हमेशा विश्वसनीय नहीं माना जा सकता, क्योंकि इसे जारी करने में अनिवार्य जन्म दस्तावेजों की मांग नहीं की जाती। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के नियोजन विभाग ने इसी आधिकारिक बयान को आधार बनाकर यह सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने तर्क दिया है कि जन्मतिथि की गलत जानकारी से सरकारी भर्तियों (Recruitment), पेंशन (Pension), उम्र आधारित योजनाओं और कानूनी मामलों में व्यापक गड़बड़ी पैदा हो सकती है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र (Maharashtra) सरकार ने भी इसी तरह का आदेश जारी करते हुए आधार को देरी से जारी होने वाले बर्थ सर्टिफिकेट (Birth Certificate) के लिए मान्य दस्तावेज मानने से इंकार कर दिया है। विभागीय विशेषज्ञों (Departmental Experts) का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य नागरिक डाटा को अधिक सटीक, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है।

अब कौन से दस्तावेज होंगे जन्मतिथि का प्रमाण?

नए नियमों के अनुसार, जन्म प्रमाण के रूप में अब केवल सत्यापित और आधिकारिक अभिलेख ही मान्य होंगे। नियोजन विभाग (Planning Department) ने स्पष्ट किया है कि इनमें सबसे प्रमुख है—बच्चे के जन्म के समय स्वास्थ्य विभाग या नगर निकाय द्वारा जारी किया गया मूल जन्म प्रमाण पत्र (Original Birth Certificate)। इसके अतिरिक्त, स्कूल रिकॉर्ड पर आधारित हाईस्कूल (High School) की मार्कशीट या सर्टिफिकेट को भी वैध जन्म प्रमाण माना जाएगा, क्योंकि इसमें विद्यालय द्वारा सत्यापित तिथि दर्ज होती है। नगर निगम/नगर पंचायत द्वारा जारी जन्म पंजीकरण दस्तावेज को भी प्रमाणिक माना जाएगा। आगे विभागों को निर्देश दिया गया है कि सरकारी भर्ती, प्रवेश (Admission), पेंशन या अन्य किसी भी उम्र आधारित योजना में आवेदन स्वीकार करते समय इन्हीं दस्तावेजों को मुख्य आधार बनाया जाए।

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