मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान: ‘कयामत का इंतजार छोड़ कायदे से रहना सीखें, कानून तोड़ोगे तो जहन्नुम जाओगे’
बाराबंकी/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बाराबंकी जिले के दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कड़ा संदेश दिया है। दुल्हदेपुर स्थित बाबा हरिशंकर दास की कुटी पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग देश में अशांति फैलाने या किसी विशेष दिन के आने का सपना देख रहे हैं, उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि हिंदुस्तान अब बदल चुका है। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा कि कयामत के लिए जीना छोड़ें और हिंदुस्तान में ‘कायदे’ से रहना सीखें, क्योंकि कानून का पालन करने में ही सबका हित है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को दोपहर करीब सवा दो बजे दरियाबाद के दुल्हदेपुर पहुंचे, जहां उनके हेलीकॉप्टर के उतरते ही महंत बलरामदास और स्थानीय नेताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले बाबा हरिशंकर दास की कुटी में नवनिर्मित कथा मंडप का उद्घाटन किया और उसके पश्चात रामार्चा यज्ञ में सम्मिलित होकर विधि-विधान से आहुतियां अर्पित कीं। आध्यात्मिक अनुष्ठानों को पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया, जिसमें उनके तेवर काफी सख्त नजर आए।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था और सनातन मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार रुकने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार उतना ही बोलती है जितना वह करने की क्षमता रखती है और जो वादा किया जाता है, उसे धरातल पर उतारा जाता है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का जिक्र करते हुए उन्होंने विरोधियों पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद का ढांचा अब कभी वापस नहीं आने वाला है और जो लोग कयामत के दिन का सपना संजोए बैठे हैं, उन्हें जान लेना चाहिए कि वह दिन कभी नहीं आएगा। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को निरंतर मजबूत करती रहेगी।
योगी आदित्यनाथ ने इतिहास का स्मरण कराते हुए पूछा कि आखिर 500 वर्षों तक अयोध्या में राम मंदिर का सपना अधूरा क्यों रहा? उन्होंने कहा कि इस लंबे कालखंड में कितनी ही सरकारें आईं और गईं, कितने ही राजा और महाराजा हुए, लेकिन किसी ने भी अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनवाने का साहस नहीं दिखाया। राम सबके हैं, लेकिन कुछ लोगों ने हमेशा अवसरवादी रवैया अपनाया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग संकट आने पर तो प्रभु राम को याद करते हैं, लेकिन जैसे ही परिस्थितियां बदलती हैं, वे उन्हें विस्मृत कर देते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग राम को भूल चुके थे, अब भगवान राम भी उन्हें भुला चुके हैं।
कानून तोड़ने वालों को चेतावनी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदुस्तान की धरती पर हर नागरिक को मर्यादा और कानून के दायरे में रहना होगा। उन्होंने कहा कि “कानून मानोगे तो फायदे में रहोगे, नहीं तो आगे का रास्ता सीधा जहन्नुम की ओर जाता है।” उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि जो लोग समाज की शांति भंग करेंगे और कानून को चुनौती देंगे, उन्हें परिणाम भुगतने होंगे। योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रवाद और धर्म के अंतर्संबंधों की व्याख्या करते हुए कहा कि हर संत का जीवन देश के लिए समर्पित होना चाहिए और धर्म भी अंततः देश के उत्थान के लिए ही है।
मुख्यमंत्री ने भारत और सनातन धर्म को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए कहा कि धर्म और देश का संबंध आत्मा और शरीर जैसा है। उन्होंने आह्वान किया कि हर भारतवासी का एकमात्र ध्येय ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ होना चाहिए। हमारा लक्ष्य देश को वैभवशाली और विकसित बनाना है। उन्होंने संतों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि आध्यात्मिक शक्ति ही देश की असली ताकत है और जब धर्म सुरक्षित रहेगा, तभी देश का अस्तित्व भी अखंड रहेगा।
इस जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री के भाषण ने न केवल आध्यात्मिक संदेश दिया, बल्कि राज्य की प्रशासनिक नीति और भविष्य के रोडमैप को भी स्पष्ट कर दिया। बाराबंकी की इस धरती से दिया गया मुख्यमंत्री का यह संदेश न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश की राजनीति और सामाजिक विमर्श में चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कुटी के महंत और वहां उपस्थित श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।