कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसने हमारे आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृति और आध्यात्मिक प्रगति में एक महान भूमिका निभायी है। हम कृषि को एक उत्सव के रूप में मनाते हैं। हमारे किसान बंधुओं ने अपनी संस्कृति में वनों, पहाड़ों, नदियों, पशुधन, जीव-जंतुओं को एक दैवीय स्थान दिया है। क्या प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा का ऐसा अनुपम उदाहरण आपने कहीं देखा है? केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और सीजीआईएआर द्वारा हाल […]Read More
शेयर बाजार में जिस तेजी से नए डीमैट अकाउंट खुल रहे हैं, वह स्पष्ट रूप से लोगों के विश्वास का ही परिणाम है। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के प्रति लोगों के विश्वास को आमजन के वित्तीय निवेश को लेकर देखा जा सकता है। देश के शेयर बाजार में लगातार इस मायने में बूम देखा जा रहा है। चालू कलैंडर वर्ष के हर महीने लाखों नए डीमैट खाते खुल रहे हैं। इसी कलैंडर वर्ष की […]Read More
आयुर्वेद के अनुसार यदि आत्मा, मन और इंद्रियां प्रसन्न रहें तो आदमी को स्वस्थ कहते हैं । ऐसा स्वस्थ आदमी ही सक्रिय हो कर उत्पादक कार्यों को पूरा करते हुए न केवल अपने लक्ष्यों की पूर्ति कर पाता है बल्कि समाज और देश की उन्नति में योगदान भी कर पाता है । निश्चय ही यह एक आदर्श स्थिति होती है परंतु यह स्थिति किसी भी तरह निरपेक्ष नहीं कही जा सकती। जीवन का आरम्भ और […]Read More
सर्वोदय 20वीं शताब्दी के भारत के सामाजिक चिंतन की केंद्रीय अवधारणा है। गांधी द्वारा विकसित यह सिद्धांत वर्गमूलक पश्चिम, समाजवाद एवं पूंजीवाद का भारतीय विकल्प था। यद्यपि रस्किन की रचना ‘अन टू दिस लास्ट’ का प्रभाव गांधी ने भी स्वीकार किया है, परंतु सर्वोदय की जो अवधारणा गांधी प्रस्तावित करते हैं, वह रस्किन और उसके बाद भी पश्चिम में कहीं पल्लवित होती हुई दिखाई नहीं देती। इसलिए कि सर्वोदय अपने मूल और प्रकृति, दोनों में […]Read More
बिहार के मुख्यमंत्री और आईएनडीआईए गठबंधन के संभावित नेता नीतीश कुमार पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव व आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व भारतीय जनता पार्टी से मुकाबला करने के लिए बिहार में कराई गई जातिगत जनगणना की रिपोर्ट दो अक्टूबर को जारी कर चुके हैं। यह इन नेताओं का चुनावी स्टंट मात्र है। यह रिपोर्ट तब जारी की गयी जब चारा घोटाले में दोषी घोषित जमानत पर बाहर घूम रहे लालू यादव […]Read More





