बृजभूषण शरण सिंह को कोर्ट से आखिरी मौका, महिला पहलवानों की अपील पर 20 नवंबर को अगली सुनवाई
नई दिल्ली: महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर जवाब दाखिल करने के लिए आखिरी मौका दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इसके बाद जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी।
सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह के वकील ने ऑनलाइन पेश होकर जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने उन्हें अंतिम अवसर देते हुए मामले की अगली तारीख तय कर दी।
महिला पहलवानों ने बरी किए जाने के फैसले को दी चुनौती
महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह और भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन सचिव विनोद तोमर को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील दायर की है। इससे पहले 3 अगस्त को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों आरोपियों को इस मामले में बरी कर दिया था।
अपील में महिला पहलवानों ने निचली अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है। याचिका के मुताबिक, अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों की गलत और चुनिंदा व्याख्या की है।
कोर्ट ने पूर्व सांसद और विनोद तोमर को जारी किया था नोटिस
इस मामले में 28 सितंबर को राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को नोटिस जारी किया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पीड़ितों की पहचान सुरक्षित रखने के लिए उनके नाम वाले मूल हलफनामों और आदेशों को सीलबंद लिफाफे में रखने का निर्देश भी दिया था।
इसके साथ ही अपीलकर्ताओं को याचिका की ऐसी प्रति दाखिल करने को कहा गया था, जिसमें पीड़ितों के नाम हटाए गए हों। बुधवार को हुई सुनवाई में राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक मनीष रावत पेश हुए।
याचिका में फैसले को लेकर क्या आरोप लगाए गए?
महिला पहलवानों की अपील में आरोप लगाया गया है कि निचली अदालत का फैसला अटकलों और अनुमानों पर आधारित है तथा इसमें कानून के स्थापित सिद्धांतों को उचित तरीके से लागू नहीं किया गया।
याचिका में यह भी कहा गया है कि फैसले में यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की शिकायत करने वाली महिलाओं के व्यवहार को लेकर पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं पर भरोसा किया गया। अपीलकर्ताओं का तर्क है कि साक्ष्यों का मूल्यांकन पीड़ितों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष तरीके से किया जाना चाहिए था।
ये आरोप अपील में पक्षकारों की ओर से उठाए गए तर्क हैं। मामले में इन पर अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है।
किन धाराओं में दर्ज हुई थी FIR?
यह मामला उस FIR से जुड़ा है, जिसे महिला पहलवानों ने उस समय दर्ज कराया था, जब बृजभूषण शरण सिंह भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष थे।
दिल्ली पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354, 354D, 354A, 506(1) और 109 के तहत आरोप लगाए थे। मामले की सुनवाई बंद अदालत में हुई थी।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया था। अब महिला पहलवानों की अपील पर आगे की सुनवाई में अदालत यह विचार करेगी कि निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाले तर्कों पर क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।
