• January 8, 2026

अंकिता भंडारी मामला: मुख्यमंत्री धामी की बड़ी घोषणा, कहा- ‘हर जांच को तैयार, दोषियों को किसी कीमत पर नहीं बख्शेंगे’

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति और सामाजिक गलियारों में इन दिनों अंकिता भंडारी हत्याकांड का मुद्दा एक बार फिर पूरी शिद्दत के साथ गरमा गया है। प्रदेश में बढ़ते जनाक्रोश और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सनसनीखेज दावों के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय स्थित मीडिया हाउस में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मुख्यमंत्री ने अंकिता भंडारी मामले में सरकार का पक्ष अत्यंत मजबूती से रखते हुए स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अंकिता के परिजनों के साथ खड़ी है और न्याय की इस लड़ाई में कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। सीएम धामी ने भावुक स्वर में अंकिता की हत्या को एक हृदय विदारक घटना करार देते हुए कहा कि वह स्वयं अंकिता के पिता से बात करेंगे और परिजन जो भी जांच चाहेंगे, सरकार उस पर तत्काल निर्णय लेगी।

जांच के लिए एसआईटी का गठन और मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक ऑडियो और कुछ वीडियो की सच्चाई का पता लगाने के लिए सरकार ने एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में प्रदेश सरकार ने शुरू से ही कड़ी पैरवी की है, जिसका परिणाम यह रहा कि तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा हुई। हालांकि, अब जो नए तथ्य या ऑडियो सामने आ रहे हैं, सरकार उनकी गंभीरता से जांच कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। सीएम ने सख्त लहजे में कहा, “उत्तराखंड की बेटी को न्याय दिलाना हमारी प्राथमिकता है। इस मामले में कोई भी दोषी होगा, वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएगा।”

अंकिता के परिजनों से संवाद और सीबीआई जांच की उठती मांग

विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार की जा रही सीबीआई (CBI) जांच की मांग पर मुख्यमंत्री ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वायरल ऑडियो और वीडियो के बाद सबसे ज्यादा मानसिक पीड़ा अंकिता के माता-पिता को पहुंची है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वह जल्द ही अंकिता के माता-पिता से व्यक्तिगत रूप से वार्ता करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंकिता के परिजन जिस भी जांच एजेंसी से जांच कराने की इच्छा जताएंगे या जो भी कदम उठाने को कहेंगे, सरकार उस पर पूरी संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेगी। धामी ने जनता को आश्वस्त किया कि सरकार का लक्ष्य केवल सजा दिलाना नहीं, बल्कि उस ‘वीआईपी’ चेहरे का सच भी सामने लाना है यदि वह अस्तित्व में है।

तीन साल बाद फिर क्यों सुलग उठी न्याय की आग?

उल्लेखनीय है कि करीब तीन साल पहले हुए इस चर्चित हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हाल के दिनों में अभिनेत्री उर्मिला सनावर के सिलसिलेवार वीडियो ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। उर्मिला ने अपने वीडियो में अंकिता भंडारी हत्याकांड की परतों को खोलने का दावा किया है और कुछ ‘वीआईपी’ नामों का जिक्र करते हुए सत्ताधारी पार्टी के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन वीडियो और कथित टेलीफोन रिकॉर्डिंग्स ने जनता के बीच फिर से असंतोष पैदा कर दिया है, जिसके चलते लोग एक बार फिर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है।

भाजपा नेतृत्व की असहजता और कानूनी कार्रवाई का दौर

सोशल मीडिया पर हर दिन आ रहे लाइव वीडियो और तस्वीरों ने भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी असहज स्थिति पैदा कर दी है। पार्टी की छवि खराब होते देख संगठन ने अब कानूनी मोर्चा खोल दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने जहां इस पूरे प्रकरण के पीछे कांग्रेस की साजिश होने का आरोप लगाया है, वहीं प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए इसे चरित्र हनन का प्रयास बताया है। पार्टी का मानना है कि इन वीडियो के माध्यम से जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है ताकि सरकार की साख को नुकसान पहुंचाया जा सके।

पूर्व विधायक और अभिनेत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज

इस विवाद ने उस समय कानूनी मोड़ ले लिया जब भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत कुमार गौतम ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर के खिलाफ देहरादून के डालनवाला थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। तहरीर में आरोप लगाया गया है कि दोनों आरोपियों ने जानबूझकर सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो और ऑडियो जारी किए हैं ताकि उनकी छवि खराब की जा सके और प्रदेश में दंगे जैसी स्थिति पैदा हो सके। भाजपा नेतृत्व ने इस पूरी साजिश के पीछे कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) और आम आदमी पार्टी को सूत्रधार बताया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और साक्ष्यों की सत्यता की परख की जा रही है।

निष्कर्ष: न्याय की आस और राजनीतिक खींचतान

अंकिता भंडारी मामला अब केवल एक आपराधिक केस न रहकर उत्तराखंड की अस्मिता और राजनीतिक शुचिता का प्रतीक बन गया है। मुख्यमंत्री धामी के ताजा बयानों से स्पष्ट है कि सरकार बैकफुट पर रहने के बजाय जांच का सामना करने को तैयार है। हालांकि, जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री की अंकिता के पिता से होने वाली प्रस्तावित मुलाकात के बाद क्या सरकार इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश करती है। आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच रिपोर्ट और राजनीतिक दलों की सक्रियता यह तय करेगी कि अंकिता को पूर्ण न्याय कब और कैसे मिलता है।

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