अरुणाचल प्रदेश में सुबह-सुबह 3.1 तीव्रता का भूकंप, सिक्किम में भी महसूस हुए झटके; अभी तक कोई नुकसान नहीं
अरुणाचल प्रदेश के वेस्ट कामेंग जिले में मंगलवार (10 फरवरी 2026) को तड़के 12:58 बजे भारतीय मानक समय (IST) पर 3.1 तीव्रता का हल्का भूकंप आया। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र 27.45° उत्तरी अक्षांश और 92.11° पूर्वी देशांतर पर था, और यह धरती की सतह से मात्र 10 किलोमीटर की गहराई पर आया।
फिलहाल इस भूकंप से किसी तरह के नुकसान या हताहत की कोई खबर नहीं है। चूंकि भूकंप रात के समय आया, जब ज्यादातर लोग सो रहे थे, इसलिए झटके महसूस होने के बावजूद कोई बड़ा असर नहीं हुआ।
पिछले साल भी इसी तारीख पर आया था भूकंप
गौरतलब है कि ठीक एक साल पहले, 28 जुलाई 2025 को अरुणाचल प्रदेश के तिरप जिले में 3.5 तीव्रता का भूकंप आया था। NCS के मुताबिक, उसका केंद्र 27.06° N अक्षांश और 95.42° E देशांतर पर था, गहराई 7 किलोमीटर।सिक्किम में भी लगे झटके
इसी बीच, सुबह करीब 5:38 बजे सिक्किम के नामची जिले में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। NCS के अनुसार, इसका केंद्र नामची में धरती के अंदर 5 किलोमीटर की गहराई पर था। हालांकि, इसकी तीव्रता के बारे में विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन क्षेत्र में हाल के दिनों में कई छोटे-मोटे झटके आए हैं।
गौरतलब है कि ठीक एक साल पहले, 28 जुलाई 2025 को अरुणाचल प्रदेश के तिरप जिले में 3.5 तीव्रता का भूकंप आया था। NCS के मुताबिक, उसका केंद्र 27.06° N अक्षांश और 95.42° E देशांतर पर था, गहराई 7 किलोमीटर।सिक्किम में भी लगे झटके
इसी बीच, सुबह करीब 5:38 बजे सिक्किम के नामची जिले में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। NCS के अनुसार, इसका केंद्र नामची में धरती के अंदर 5 किलोमीटर की गहराई पर था। हालांकि, इसकी तीव्रता के बारे में विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन क्षेत्र में हाल के दिनों में कई छोटे-मोटे झटके आए हैं।
भूकंप क्यों आता है?
धरती चार मुख्य परतों से बनी है—इनर कोर, आउटर कोर, मेंटल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मेंटल को मिलाकर लिथोस्फियर कहते हैं, जो टेक्टोनिक प्लेट्स में बंटी हुई है। ये प्लेट्स सालाना 4-5 मिलीमीटर की रफ्तार से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेट्स एक-दूसरे से टकराती हैं, दूर होती हैं या एक के नीचे दबती हैं, तो तनाव बढ़ता है और अचानक रिलीज होने पर भूकंप आता है। ये प्लेट्स सतह से 30-50 किलोमीटर तक गहराई में होती हैं।भूकंप आने पर क्या करें?
धरती चार मुख्य परतों से बनी है—इनर कोर, आउटर कोर, मेंटल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मेंटल को मिलाकर लिथोस्फियर कहते हैं, जो टेक्टोनिक प्लेट्स में बंटी हुई है। ये प्लेट्स सालाना 4-5 मिलीमीटर की रफ्तार से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेट्स एक-दूसरे से टकराती हैं, दूर होती हैं या एक के नीचे दबती हैं, तो तनाव बढ़ता है और अचानक रिलीज होने पर भूकंप आता है। ये प्लेट्स सतह से 30-50 किलोमीटर तक गहराई में होती हैं।भूकंप आने पर क्या करें?
(बचाव के उपाय)
- तुरंत घर से बाहर खुले मैदान में निकलें।
- अगर बाहर निकलना संभव न हो, तो मजबूत टेबल या बेड के नीचे छिप जाएं और सिर-गर्दन को हाथों से ढकें।
- घर के कोनों में खड़े होकर भी खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।
- लिफ्ट का इस्तेमाल कभी न करें।
- खुले स्थान पर पहुंचकर पेड़ों, बिजली के खंभों और इमारतों से दूर रहें।
भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में लोग सतर्क रहें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन या आपदा प्रबंधन टीम से संपर्क करें।