Akhilesh Yadav Blasts BJP: “SIR के बहाने ये लोग आरक्षण, नौकरी और आपके अधिकार छीन लेंगे”, अखिलेश यादव का बीजेपी पर बड़ा हमला
Akhilesh Yadav Blasts BJP: समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने शुक्रवार (Friday) को कानपुर देहात (Kanpur Dehat) के भोगनीपुर (Bhognipur) में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र की बीजेपी (BJP) सरकार, राज्य सरकार और चुनाव आयोग (Election Commission) पर जमकर निशाना साधा। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ‘SIR’ (एसआईआर) के बहाने देश के दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को संविधान (Constitution) द्वारा दिए गए आरक्षण (Reservation), नौकरी और अन्य अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर (Dr. Bhimrao Ambedkar) ने जो अधिकार दिए थे, उन पर खतरा मंडरा रहा है। इसी के साथ, उन्होंने चुनाव ड्यूटी के दौरान मारे गए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के परिजनों को 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का घोषणा की और चुनाव आयोग (Election Commission) से 1 करोड़ रुपये और सरकारी नौकरी देने की मांग की। तो चलिए जानते हैं पूरा मामला विस्तार से.
संविधान प्रदत्त अधिकारों पर खतरा और बीजेपी पर आरोप
समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने अपने बयान की शुरुआत बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर (Dr. Bhimrao Ambedkar) द्वारा संविधान (Constitution) के माध्यम से देश के दलितों (Dalits), आदिवासियों (Adivasis) और पिछड़ों (Backwards) को दिए गए अधिकारों के मुद्दे से की। उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी (BJP) सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि ये सभी अधिकार खतरे में हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार ‘एसआईआर’ (SIR) जैसे किसी अज्ञात बहाने का इस्तेमाल करके इन कमजोर वर्गों के आरक्षण और नौकरी संबंधी अधिकारों को छीनने की तैयारी कर रही है। उनका यह बयान यह दर्शाता है कि समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) आगामी चुनावों से पहले सामाजिक न्याय (Social Justice) और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के मुद्दे को प्रमुखता से उठाना चाहती है।
मृतक BLO के लिए 1 करोड़ और नौकरी की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने चुनाव ड्यूटी (Election Duty) के दौरान कथित तौर पर अत्यधिक मानसिक दबाव (Mental Pressure) और काम के बोझ के कारण मारे गए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के परिजनों के लिए बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) अपनी तरफ से मृतक BLO के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक मदद (Financial Assistance) देगी। इसके साथ ही, उन्होंने चुनाव आयोग (Election Commission) से यह अपील की कि वह मानवीय आधार पर हर उस BLO के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा (Compensation) और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी (Government Job) दे, जिनकी जान ड्यूटी के दौरान गई। यह मांग सरकारी कर्मचारियों के कल्याण और चुनावी प्रक्रिया में उनकी भूमिका के महत्व को उजागर करती है।
जांच, बयान या प्रतिक्रियाएं: चुनाव आयोग पर ‘अमानवीय’ दबाव का आरोप
अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ चुनाव आयोग (Election Commission) की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को ‘SIR’ (एसआईआर) से जुड़े अनरियलिस्टिक (Unrealistic) और मनमाने टारगेट (Arbitrary Targets) पूरे करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे चुनाव से जुड़े जरूरी डॉक्यूमेंटेशन (Documentation) के लिए जिम्मेदार फील्ड स्टाफ पर बेवजह का साइकोलॉजिकल स्ट्रेस (मनोवैज्ञानिक तनाव) बढ़ रहा है। अखिलेश यादव ने इस दबाव को ‘अमानवीय’ बताया, जहां BLO से यह उम्मीद की जा रही है कि वे अपनी निजी जिंदगी की परवाह किए बिना मशीन की तरह चौबीसों घंटे काम करें। उन्होंने आरोप लगाया कि यह दबाव बीजेपी (BJP) के “चुनावी मेगा स्कैम” को बढ़ावा देने के लिए डाला जा रहा है।
वर्तमान स्थिति या आगे की कार्रवाई: यूपी सरकार पर नौकरी संकट का निशाना
अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की बीजेपी सरकार पर भी तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में सरकारी कर्मचारियों को सही सपोर्ट (Right Support) के बजाय परेशानी और अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री (Former Chief Minister) ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार नई नौकरियां (New Jobs) बनाने में नाकाम रही है। इससे भी बड़ी बात यह है कि मौजूदा नौकरियों (Existing Jobs) को इतना मुश्किल बना दिया गया है कि लोग नौकरी छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं। अखिलेश यादव ने अपने इस हमले के जरिए यह संकेत दिया है कि समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) आगामी राजनीतिक अभियान में नौकरी, सरकारी कर्मचारियों पर दबाव, और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को एक प्रमुख हथियार बनाएगी।