लोकसभा में 12 घंटे चली चर्चा के बाद विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज, स्पीकर ने आरोपों को तथ्यों के साथ नकारा
Om Birla गुरुवार को फिर से Lok Sabha की कार्यवाही में शामिल हुए। एक दिन पहले बुधवार को उनके खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया था। प्रस्ताव का नोटिस मिलने के बाद से स्पीकर सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हो रहे थे। प्रस्ताव खारिज होने के बाद उन्होंने गुरुवार को सदन में लौटकर सदस्यों को संबोधित किया।
‘संसदीय इतिहास में तीसरी बार हुई ऐसी चर्चा’
लोकसभा को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में यह तीसरी बार है जब लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि सदन में हर सदस्य को नियमों और प्रक्रियाओं के तहत अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिले।
विपक्ष की चिंताओं पर दिया जवाब
स्पीकर ने बताया कि लोकसभा ने उन्हें हटाने के प्रस्ताव पर करीब 12 घंटे तक चर्चा की। इस दौरान विपक्ष ने सदन में निष्पक्षता और अपनी आवाज दबाए जाने की चिंता जताई। इस पर बिरला ने कहा कि लोकसभा 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करती है और उन्होंने हमेशा कोशिश की है कि हर सदस्य को नियमों के दायरे में बोलने का मौका मिले। उन्होंने यह भी कहा कि जो सदस्य सदन की कार्यवाही में भाग लेने से झिझकते हैं, उन्हें भी बोलने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
‘कुर्सी किसी व्यक्ति की नहीं, सदन की प्रतिष्ठा का प्रतीक’
ओम बिरला ने कहा कि उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि सदन निष्पक्षता और नियमों के अनुसार चले। जिस दिन विपक्ष ने उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने का नोटिस दिया, उस दिन उन्होंने स्वयं को सदन की कार्यवाही से अलग रखा। उन्होंने कहा कि कुर्सी किसी एक व्यक्ति की नहीं होती, बल्कि यह सदन की प्रतिष्ठा का प्रतीक है। सदन द्वारा जताए गए विश्वास के लिए उन्होंने सभी सदस्यों का आभार भी व्यक्त किया।
राहुल गांधी को बोलने से रोकने के आरोप पर सफाई
नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi को बोलने से रोकने के आरोपों पर स्पीकर ने स्पष्ट किया कि सदन में हर सदस्य को नियमों के तहत ही बोलने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है और ये नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। यहां तक कि प्रधानमंत्री और मंत्रियों को भी बयान देने के लिए सदन के नियमों के तहत नोटिस देना पड़ता है।
‘नेता प्रतिपक्ष को भी विशेषाधिकार नहीं’
ओम बिरला ने आगे कहा कि कुछ सदस्यों का मानना था कि नेता प्रतिपक्ष सदन से ऊपर हैं और किसी भी विषय पर बोल सकते हैं, लेकिन ऐसा कोई विशेषाधिकार किसी को प्राप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि सदन में सभी को नियमों के अनुसार ही बोलने का अधिकार है और ये नियम सदन ने ही बनाए हैं, जो उन्हें विरासत में मिले हैं।