• March 6, 2026

संभल में बिजली चोरी के खिलाफ प्रशासन का सर्जिकल स्ट्राइक: भूमिगत ‘मिनी पावर स्टेशन’ का भंडाफोड़, सांसद आवास के पास भी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में बिजली चोरी और अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार की तड़के जब पूरा शहर सो रहा था, तब जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में भारी पुलिस बल और बिजली विभाग की टीमों ने संभल के मुस्लिम बहुल इलाकों में छापेमारी की। इस अभियान के दौरान बिजली चोरी के ऐसे संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है जिसे देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। जांच में एक अवैध ‘मिनी पावर स्टेशन’ का पता चला है, जो भूमिगत केबलों के माध्यम से दर्जनों घरों को चोरी की बिजली सप्लाई कर रहा था। विशेष बात यह है कि यह कार्रवाई संभल के सांसद जियाउर्रहमान बर्क के आवास के बेहद करीबी इलाकों में भी की गई है।

तड़के पांच बजे की छापेमारी: डीएम और एसपी ने खुद संभाली कमान

संभल में बिजली के भारी ‘लाइन लॉस’ (50 प्रतिशत से अधिक) को देखते हुए प्रशासन ने एक गोपनीय योजना तैयार की थी। सोमवार सुबह करीब पांच बजे जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई खुद सड़कों पर उतरे। इस अभियान की संवेदनशीलता को देखते हुए आठ थानों की पुलिस फोर्स के साथ-साथ पीएसी (PAC) और रैपिड रिस्पांस फोर्स (RRF) की कंपनियों को भी तैनात किया गया था। प्रशासन ने पूरे रायसत्ती थाना क्षेत्र, दीपा सराय, सराय तरीन, खग्गू सराय और तीमारदास इलाकों को छावनी में तब्दील कर दिया।

अधिकारियों ने बताया कि इस बड़े ऑपरेशन के लिए 12 अलग-अलग टीमें बनाई गई थीं, जिन्होंने एक साथ 500 से अधिक संदिग्ध स्थानों पर दस्तक दी। अभियान का नेतृत्व खुद जिले के शीर्ष अधिकारी कर रहे थे, ताकि किसी भी तरह के विरोध या राजनीतिक दबाव की गुंजाइश न रहे। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई के अनुसार, इलाके में लंबे समय से संगठित तरीके से बिजली चोरी की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके कारण ईमानदार उपभोक्ताओं को लो-वोल्टेज और बार-बार बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा था।

भूमिगत ‘मिनी पावर स्टेशन’ का खुलासा: चोरी का हाई-टेक नेटवर्क

इस छापेमारी के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा सराय तरीन इलाके में हुआ। यहाँ प्रशासन को एक अवैध ‘मिनी पावर स्टेशन’ मिला। बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता (SE) ने बताया कि यह कोई साधारण कटियाबाजी का मामला नहीं था, बल्कि एक पूरी तरह से संगठित ढांचा था। एक व्यक्ति ने अपने घर या परिसर में अवैध रूप से बिजली का मुख्य स्रोत बना रखा था और वहाँ से भूमिगत (अंडरग्राउंड) केबल बिछाकर लगभग 50 से 60 घरों को बिजली की आपूर्ति की जा रही थी।

यह पूरा सिस्टम जमीन के अंदर छिपाया गया था ताकि सामान्य चेकिंग के दौरान इसे पकड़ा न जा सके। जिलाधिकारी ने बताया कि इस मिनी पावर स्टेशन के जरिए आरोपी दर्जनों परिवारों से अवैध रूप से पैसे वसूल रहा था और सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहा था। इस मामले में मुख्य आरोपी के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है और उस पर भारी जुर्माना लगाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने इसे बिजली चोरी का अब तक का सबसे “हाई-टेक” और संगठित मामला बताया है।

सांसद के घर के पास और धार्मिक स्थलों पर चेकिंग: 60 स्थानों पर पकड़ी गई चोरी

प्रशासन की यह कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ न होकर पूरे सिस्टम की सफाई के लिए थी। चेकिंग के दौरान टीमें सांसद जियाउर्रहमान बर्क के आवास से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित एक मस्जिद तक भी पहुँचीं, जहाँ बिजली चोरी के पुख्ता सबूत मिले। बिजली विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 60 स्थानों पर सीधे तौर पर बिजली चोरी पकड़ी गई है। इनमें तीन मस्जिदें और एक मदरसा भी शामिल हैं।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कानून सबके लिए बराबर है और धार्मिक स्थलों या राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के आसपास के क्षेत्रों को किसी भी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, एक अवैध ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशन पर भी छापा मारा गया। यहाँ चोरी की बिजली से दर्जनों ई-रिक्शा चार्ज किए जा रहे थे। बिजली विभाग अब इन सभी 60 स्थानों के संचालकों और मालिकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उन पर शमन शुल्क (Penalty) निर्धारित कर रहा है।

लाइन लॉस और राजस्व की हानि: क्यों जरूरी थी यह कार्रवाई?

जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने मीडिया को बताया कि रायसत्ती और सराय तरीन जैसे इलाकों में बिजली का लाइन लॉस 50 से 60 प्रतिशत तक पहुँच गया था। इसका मतलब यह है कि बिजली विभाग जितनी बिजली इन इलाकों में भेज रहा था, उसका आधे से ज्यादा हिस्सा चोरी हो रहा था। इस घाटे के कारण विभाग के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति करना कठिन हो गया था।

डीएम ने कहा, “ईमानदार उपभोक्ता जो समय पर बिल भरते हैं, उन्हें इन चोरों की वजह से परेशानी होती है। हम इस व्यवस्था को और बर्दाश्त नहीं कर सकते।” प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यह अभियान केवल एक दिन के लिए नहीं है, बल्कि जब तक लाइन लॉस न्यूनतम स्तर पर नहीं आ जाता, तब तक रैंडम छापेमारी जारी रहेगी। इसके लिए बिजली विभाग को ड्रोन कैमरे और अन्य आधुनिक उपकरणों का उपयोग करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

अतिक्रमण पर भी प्रहार: मदरसे के नाम पर चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर बुलडोजर

बिजली चोरी के अलावा, संभल प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ भी कड़ा रुख अपना रखा है। रविवार को सलेमपुर इलाके में एक बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया था। जिलाधिकारी ने बताया कि करीब 20-25 साल पहले सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस जमीन पर मदरसे के नाम पर अवैध रूप से व्यावसायिक दुकानें बनाई गई थीं।

जांच में सामने आया कि मदरसे की आड़ में इन दुकानों से नियमित रूप से किराया वसूला जा रहा था। प्रशासन ने धारा 67 के तहत कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन अवैध निर्माणों को ढहा दिया। इस मामले में अतिक्रमणकारियों पर 58 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि धर्म या शिक्षा के नाम पर सरकारी संपत्ति का व्यावसायिक दोहन किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा।

कानून-व्यवस्था और भविष्य की योजना

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए पुलिस की भूमिका सुरक्षा कवच की तरह थी। संभल के संवेदनशील इलाकों में जब बिजली विभाग की टीमें जाती हैं, तो अक्सर उन्हें विरोध का सामना करना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था। एसपी ने जनता से अपील की है कि वे बिजली चोरी छोड़कर वैध कनेक्शन लें, अन्यथा उन्हें जेल की हवा खानी पड़ सकती है।

प्रशासन की इस दोहरी कार्रवाई (बिजली चोरी और अतिक्रमण) से संभल के अवैध कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है। जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने संदेश दिया है कि संभल में अब केवल कानून का राज चलेगा और किसी भी प्रकार की ‘समानांतर व्यवस्था’ (जैसे अवैध मिनी पावर स्टेशन) को पनपने नहीं दिया जाएगा।

निष्कर्ष: संभल में बदलाव की आहट

संभल में सोमवार को हुई यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा मानी जा रही है। जिस तरह से सांसद के पड़ोस से लेकर धार्मिक स्थलों और अंडरग्राउंड पावर नेटवर्क तक प्रशासन पहुँचा है, उससे यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में संभल की व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। बिजली चोरी रुकने से न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि आम जनता को बेहतर बिजली आपूर्ति भी सुनिश्चित हो सकेगी।

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