लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रविकांत के कांग्रेस जॉइन करने पर ABVP का तंज: ‘कैंपस में पार्टी एजेंट की तरह काम कर रहे थे, टोटके फेल हुए तो बाहर निकले’
लखनऊ/ 18 अगस्त 2025: लखनऊ यूनिवर्सिटी (LU) के हिंदी विभाग के प्रोफेसर रविकांत चंदन के कांग्रेस पार्टी में शामिल होने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने तीखा हमला बोला है। ख़बरों के अनुसार ABVP ने प्रोफेसर रविकांत पर आरोप लगाया कि वे यूनिवर्सिटी कैंपस में एक राजनीतिक पार्टी के एजेंट की तरह काम कर रहे थे और जब उनके “टोटके” फेल हो गए, तो अब खुले तौर पर कांग्रेस में शामिल हो गए। इस बयान ने लखनऊ यूनिवर्सिटी में राजनीतिक विवाद को और हवा दे दी है।
ABVP का बयान और आरोप
ABVP के लखनऊ यूनिवर्सिटी इकाई के सचिव रवि प्रताप सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा, “प्रोफेसर रविकांत कैंपस में लंबे समय से एक खास विचारधारा को बढ़ावा दे रहे थे। वे कांग्रेस के लिए छात्रों को प्रभावित करने का काम कर रहे थे। उनके टोटके और छद्म धर्मनिरपेक्षता की राजनीति फेल हो गई, इसलिए अब वे खुले तौर पर कांग्रेस में शामिल हो गए।” ABVP ने यह भी दावा किया कि प्रोफेसर रविकांत ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए यूनिवर्सिटी के माहौल को “राजनीति का अड्डा” बनाने की कोशिश की।
रविकांत का कांग्रेस में शामिल होना
प्रोफेसर रविकांत चंदन ने रविवार (17 अगस्त 2025) को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और यूपी कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद थे। रविकांत ने कहा, “मैं कांग्रेस की विचारधारा और सामाजिक न्याय के प्रति इसके समर्पण से प्रभावित हूं। मैं शिक्षा और समाज के लिए काम करना चाहता हूं।” रविकांत लंबे समय से सामाजिक और शैक्षिक मुद्दों पर लेखन और व्याख्यान के लिए जाने जाते हैं और हाल ही में उन्होंने यूपी में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ राहुल गांधी के ‘वोट अधिकार यात्रा’ का समर्थन किया था।विवाद और यूनिवर्सिटी का रुख
ABVP के आरोपों ने लखनऊ यूनिवर्सिटी में हलचल मचा दी है। कुछ छात्र संगठनों ने रविकांत के कांग्रेस में शामिल होने को उनकी निजी पसंद बताया, जबकि ABVP और कुछ अन्य संगठनों ने इसे यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक माहौल पर राजनीतिक प्रभाव का उदाहरण करार दिया। लखनऊ यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि यह प्रोफेसर का निजी फैसला है, लेकिन यूनिवर्सिटी में राजनीतिक गतिविधियों पर सख्ती से नजर रखी जाएगी।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
यूपी कांग्रेस के प्रवक्ता अनिल यादव ने ABVP के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “प्रोफेसर रविकांत एक सम्मानित शिक्षाविद् और लेखक हैं। उनकी सामाजिक और शैक्षिक मुद्दों पर सक्रियता को ABVP बर्दाश्त नहीं कर पा रही। यह उनकी हताशा का नतीजा है।” कांग्रेस ने रविकांत के शामिल होने को पार्टी के लिए मजबूती बताया और कहा कि उनकी बौद्धिक क्षमता यूपी में पार्टी को नई दिशा देगी।सोशल मीडिया पर तीखी बहस
एक्स पर इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है। कुछ यूजर्स ने ABVP के बयान का समर्थन करते हुए लिखा, “कैंपस को राजनीति से दूर रखना चाहिए। प्रोफेसर का काम पढ़ाना है, न कि पार्टी का प्रचार करना।” वहीं, कुछ ने रविकांत का बचाव करते हुए कहा कि यह उनकी निजी स्वतंत्रता है और ABVP उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रही है।
निष्कर्ष
प्रोफेसर रविकांत चंदन का कांग्रेस में शामिल होना और ABVP का तीखा हमला लखनऊ यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक और राजनीतिक सीमाओं पर बहस को फिर से छेड़ गया है। यह विवाद यूपी की सियासत में भी नई हलचल पैदा कर सकता है, खासकर तब जब कांग्रेस और विपक्षी दल यूपी में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में हैं। यह देखना बाकी है कि यह मामला कैंपस की राजनीति और प्रोफेसर रविकांत की छवि को किस तरह प्रभावित करता है।