राष्ट्र निर्माण और साहस की नई मिसाल: वायुसेना प्रमुख ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में एनसीसी कैडेट्स के योगदान को सराहा
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के प्रमुख, एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने आज नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट्स को देश सेवा का एक नया मंत्र दिया। दिल्ली छावनी में आयोजित एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर 2026 को संबोधित करते हुए वायुसेना प्रमुख ने पिछले वर्ष पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने न केवल सीमा पार आतंकवाद को करारा जवाब दिया, बल्कि देश के भीतर भी यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि जीवन केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों या धन कमाने तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाना ही जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और एनसीसी कैडेट्स का जज्बा
7 मई 2025 की वह सुबह भारतीय सैन्य इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुकी है, जब सशस्त्र बलों ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले का बदला लिया था। उस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी, जिसके प्रतिशोध स्वरूप ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया। वायुसेना प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि जहां सीमा पर सैनिक लड़ रहे थे, वहीं देश के भीतर एनसीसी कैडेट्स ने ‘नागरिक सुरक्षा’ (Civil Defence) की कमान संभाली हुई थी।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कैडेट्स की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ऑपरेशन के दौरान आपातकालीन अभ्यास, रक्तदान शिविर और नागरिक सुरक्षा गतिविधियों में एनसीसी कैडेट्स का योगदान समाज के लिए एक प्रेरणा बन गया है। उन्होंने कहा कि जब सेनाएं युद्ध या ऑपरेशंस में व्यस्त होती हैं, तब कैडेट्स द्वारा निभाया गया यह सक्रिय सहयोग राष्ट्र की आंतरिक शक्ति को दर्शाता है। यह कैडेट्स की अनुशासन और सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का ही परिणाम था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय नागरिक मोर्चे पर स्थिति सुदृढ़ बनी रही।
निजी सफलता बनाम राष्ट्र निर्माण: वायुसेना प्रमुख का संबोधन
कैडेट्स को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल ने एक महत्वपूर्ण जीवन दर्शन साझा किया। उन्होंने कहा, “जीवन केवल बैंक बैलेंस बढ़ाने या करियर की सीढ़ियां चढ़ने का नाम नहीं है। एक सफल जीवन वही है जो देश के काम आए।” उन्होंने कैडेट्स से आह्वान किया कि वे भविष्य में चाहे किसी भी पेशे को चुनें—चाहे वे सशस्त्र बलों में शामिल हों, डॉक्टर बनें, इंजीनियर बनें या उद्यमी—उन्हें हमेशा यह सोचना चाहिए कि उनका कार्य देश के विकास में कैसे योगदान दे सकता है।
वायुसेना प्रमुख के अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारतीय युवाओं के बीच एक नई जागरूकता पैदा की है। इसने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि राष्ट्र निर्माण केवल सीमा पर तैनात जवानों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर उस नागरिक का कर्तव्य है जो इस मिट्टी से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि वर्दी में होना या न होना केवल एक भूमिका का अंतर है, लेकिन देशभक्ति का जज्बा एक समान होना चाहिए।
असफलताओं से न डरने का मंत्र और व्यक्तिगत अनुभव
संबोधन के दौरान वायुसेना प्रमुख ने अपने जीवन के उतार-चढ़ाव साझा कर कैडेट्स का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि सफलता कभी भी सीधे रास्ते पर नहीं मिलती। उन्होंने स्वयं कई बार असफलताओं और चुनौतियों का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। उन्होंने कैडेट्स को सलाह दी कि वे अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहें और असफलताओं से निराश होने के बजाय उन्हें सीखने का अवसर मानें।
उन्होंने कहा, “मेरे जीवन में भी कई ऐसे मोड़ आए जब चीजें मेरे पक्ष में नहीं थीं, लेकिन मेहनत और संकल्प ने मुझे आगे बढ़ाया। अंततः वायुसेना प्रमुख बनना शायद मेरी नियति में लिखा था, लेकिन उस नियति तक पहुँचने का रास्ता कठिन परिश्रम से होकर ही गुजरा था।” उनका यह संदेश उन युवा कैडेट्स के लिए अत्यंत प्रभावशाली रहा जो सशस्त्र बलों में अपना करियर बनाने का सपना देख रहे हैं।
एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर 2026 का भव्य आयोजन
दिल्ली कैंट में चल रहे इस प्रतिष्ठित गणतंत्र दिवस शिविर में इस वर्ष देश के कोने-कोने से आए 2406 कैडेट्स हिस्सा ले रहे हैं। विविधता और एकता के इस संगम में महिला शक्ति का भी जबरदस्त प्रदर्शन देखने को मिल रहा है, जिसमें 898 बालिका कैडेट्स शामिल हैं। यह शिविर केवल एक प्रशिक्षण केंद्र नहीं है, बल्कि ‘लघु भारत’ का एक स्वरूप है जहां विभिन्न राज्यों की संस्कृतियां और परंपराएं एक सूत्र में बंधती हैं।
इस लगभग एक महीने लंबे चलने वाले शिविर का औपचारिक उद्घाटन सोमवार को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने किया था। शिविर के दौरान कैडेट्स विभिन्न प्रतियोगिताओं, ड्रिल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, जिसका समापन 28 जनवरी को प्रधानमंत्री की रैली के साथ होगा। वायुसेना प्रमुख का यह दौरा कैडेट्स के लिए मनोबल बढ़ाने वाला रहा, क्योंकि उन्होंने स्वयं एनसीसी की महत्ता को भारतीय रक्षा तंत्र के दूसरे रक्षा कवच के रूप में स्वीकार किया।
निष्कर्ष: युवाओं के लिए एक नई दिशा
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का यह संबोधन केवल एक औपचारिक भाषण नहीं था, बल्कि भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं के लिए एक रोडमैप था। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता को एनसीसी के सेवा भाव से जोड़कर उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत की असली ताकत उसकी युवा शक्ति में निहित है। उन्होंने कैडेट्स को यह याद दिलाया कि राष्ट्र निर्माण एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और इसमें हर छोटा योगदान मायने रखता है। उनके शब्दों ने कैडेट्स को इस बात के लिए प्रेरित किया कि वे गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में केवल परेड का हिस्सा न बनें, बल्कि जीवन भर राष्ट्र के सजग प्रहरी बनकर रहें।