ataltv.com

Hindi News, Breaking Hindi News, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, ताजा हिंदी ख़बरें

बैलेट पेपर से चुनाव, फिर भी कांग्रेस का खाता नहीं खुला! PM मोदी ने कसा तंज, NDA को 16 सीटें

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों पर हुए MLC चुनाव के नतीजों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। इन चुनावों में कांग्रेस एक भी सीट जीतने में सफल नहीं रही, जबकि बीजेपी और उसके सहयोगियों ने कुल 28 में से 16 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी निशाना साधा। उन्होंने खास तौर पर बैलेट पेपर से हुए मतदान का जिक्र करते हुए पार्टी से सवाल किया कि आखिर उसे कितनी सीटें मिलीं।

इन चुनावों को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के संगठन और समर्थन का आकलन करने के एक अवसर के तौर पर देखा जा रहा था। हालांकि, विधान परिषद चुनाव के नतीजों को सीधे विधानसभा चुनावों का संकेत मानना उचित नहीं होगा।

पीएम मोदी ने कांग्रेस पर क्या तंज कसा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों पर चुनाव हुए और मतदान बैलेट पेपर के जरिए कराया गया। इसके बाद उन्होंने सवाल किया, “अंदाजा लगाइए कि कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं?”

पीएम मोदी की यह टिप्पणी कांग्रेस और विपक्षी दलों की ओर से ईवीएम को लेकर उठाए जाने वाले सवालों के संदर्भ में आई। इन चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ, लेकिन कांग्रेस को किसी भी राज्य में जीत नहीं मिली। चुनाव परिणामों के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

चार राज्यों में कैसा रहा MLC चुनाव का परिणाम?

चारों राज्यों की 28 सीटों पर हुए चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक समीकरण देखने को मिले। बीजेपी और उसके सहयोगियों को कुल 16 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस का खाता नहीं खुला। राज्यवार प्रमुख नतीजे इस प्रकार रहे।

उत्तर प्रदेश: बीजेपी और सपा के बीच मुकाबला

उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला देखने को मिला। 29 अक्टूबर को उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, नौ सीटों के नतीजे घोषित हो चुके थे। इनमें बीजेपी ने छह और समाजवादी पार्टी ने तीन सीटें जीती थीं। बाकी दो सीटों पर मतगणना और नतीजों की स्थिति को लेकर अपडेट सामने आ रहे थे।

इस चुनाव में कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं उतारे थे। ऐसे में यूपी में कांग्रेस की सीटों का आंकड़ा उसके चुनावी प्रदर्शन का आकलन करने के लिए अलग से नहीं देखा जा सकता।

बिहार: बीजेपी को तीन सीटें, निर्दलीयों ने भी दर्ज की जीत

बिहार की आठ विधान परिषद सीटों के चुनाव में बीजेपी ने तीन सीटें जीतीं, जबकि दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल और जन सुराज पार्टी को एक-एक सीट मिली।

जन सुराज पार्टी के लिए यह परिणाम खास रहा, क्योंकि उसके उम्मीदवार सुरेश प्रसाद राय ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मौजूदा MLC मदन मोहन झा को हराया। कांग्रेस बिहार में भी एक सीट जीतने में सफल नहीं रही।

महाराष्ट्र: महायुति और विपक्षी दलों के बीच बंटा परिणाम

महाराष्ट्र की पांच विधान परिषद सीटों के चुनाव में किसी एक गठबंधन को सभी सीटों पर जीत नहीं मिली। उपलब्ध अंतिम रिपोर्टों के मुताबिक, बीजेपी ने दो सीटें जीतीं, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को भी दो सीटें मिलीं। एक सीट शिवसेना के खाते में गई।

महाराष्ट्र के नतीजों में अलग-अलग दलों को मिली सफलता ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर को मिश्रित रखा। कांग्रेस यहां भी अपना खाता नहीं खोल सकी।

कर्नाटक: NDA ने चारों सीटों पर दर्ज की जीत

कर्नाटक में बीजेपी और जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन ने सभी चार विधान परिषद सीटों पर जीत हासिल की। बीजेपी ने तीन सीटें अपने नाम कीं, जबकि जेडीएस ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत दर्ज की।

इस सीट पर जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा MLC पुट्टन्ना को 908 वोटों से हराया। रंगनाथ को 10,810 वोट मिले, जबकि पुट्टन्ना को 9,902 वोट हासिल हुए।

इसके अलावा बीजेपी के शशिल जी. नामोशी ने उत्तर-पूर्व शिक्षक सीट, केएम सुरेश ने दक्षिण-पूर्व स्नातक सीट और एसवी संकनूर ने पश्चिम स्नातक सीट पर जीत दर्ज की। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी चारों सीटें हार गई। यह परिणाम राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

बैलेट पेपर चुनाव के नतीजों से क्यों बढ़ी राजनीतिक बहस?

इन चुनावों के बाद बैलेट पेपर और ईवीएम को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाया, जबकि चुनाव परिणामों ने चार राज्यों में अलग-अलग दलों की स्थिति सामने रखी।

हालांकि, MLC चुनावों में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इन सीटों का मतदाता वर्ग सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होता है। इसलिए इन नतीजों को आगामी विधानसभा चुनावों के संभावित परिणाम के रूप में देखना सही नहीं होगा।

फिलहाल, चार राज्यों की 28 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस का खाता नहीं खुलना और कर्नाटक में NDA का चारों सीटें जीतना सबसे ज्यादा चर्चा में है। वहीं, उत्तर प्रदेश में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबले ने राज्य की राजनीति को भी सुर्खियों में बनाए रखा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *