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4 राज्यों में विधान परिषद चुनाव के नतीजों से बदले सियासी समीकरण, यूपी में सपा को फायदा; कांग्रेस की हार पर उठे सवाल

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक दलों के प्रदर्शन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इन चुनावों में कांग्रेस को सीमित सफलता मिली, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगियों ने कई सीटों पर जीत दर्ज की। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (SP) ने अपनी सीटों की संख्या बढ़ाई, वहीं बिहार में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी विधान परिषद में खाता खोला।

चुनाव परिणामों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत BJP के कई वरिष्ठ नेताओं ने बैलेट पेपर से हुए मतदान का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। दूसरी ओर, कांग्रेस ने चुनावी हार के कारणों की समीक्षा करने की बात कही है।

यूपी में BJP की 6 और सपा की 5 सीटें

उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों के चुनाव में BJP ने छह और समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें जीतीं। इससे पहले 2020 के चुनाव में BJP को छह और सपा को तीन सीटें मिली थीं। इस बार BJP ने अपनी सीटें बरकरार रखीं, जबकि सपा ने दो सीटों का इजाफा किया।

सपा ने वाराणसी शिक्षक, आगरा शिक्षक और इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की। नतीजों के बाद पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं से जीत का जश्न शांति से मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को जोश में होश नहीं खोना चाहिए और किसी तरह का हुड़दंग नहीं करना चाहिए।

अखिलेश यादव ने मतगणना पर उठाए सवाल

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान गड़बड़ी नहीं होती तो सपा सभी सीटें जीत सकती थी। उन्होंने मतगणना के दौरान हुए विवादों से जुड़े वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किए।

आगरा में सपा उम्मीदवार आकाश अग्रवाल ने जीत दर्ज की। मतगणना के दौरान उन्होंने धरना दिया था और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। जीत के बाद भी उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान बाधाएं पैदा करने की कोशिश हुई।

हालांकि, मतगणना में गड़बड़ी को लेकर लगाए गए आरोपों को संबंधित तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर देखा जाना जरूरी है।

वाराणसी की दोनों सीटों पर सपा का प्रदर्शन

वाराणसी की शिक्षक और स्नातक, दोनों विधान परिषद सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की। इन नतीजों के बाद अखिलेश यादव ने BJP पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि मतगणना को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

सपा नेता उदयवीर सिंह ने भी BJP पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी को वाराणसी में अपनी हार के कारणों पर विचार करना चाहिए। सपा नेताओं ने इन परिणामों को आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताया।

गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर BJP के ध्रुव त्रिपाठी जीते

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में BJP के ध्रुव त्रिपाठी ने करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की। निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव दूसरे स्थान पर रहे।

मतगणना के दौरान दूसरी वरीयता के मतों की गिनती को लेकर विवाद की खबरें सामने आईं। अखिलेश यादव ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए। वहीं, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा की पांच सीटों पर जीत को लेकर तंज कसा और दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को सफलता नहीं मिलेगी।

दोनों दलों के नेताओं के बयान चुनाव परिणामों के बाद जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को दर्शाते हैं।

बिहार में जन सुराज ने कांग्रेस से छीनी सीट

बिहार की आठ विधान परिषद सीटों के चुनाव में कांग्रेस को कोई सीट नहीं मिली। जन सुराज पार्टी ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत दर्ज कर अपना खाता खोला। इस सीट पर कांग्रेस के मौजूदा MLC मदन मोहन झा को हार का सामना करना पड़ा।

बिहार के चुनाव में BJP ने तीन सीटें जीतीं, जबकि JDU, RJD और जन सुराज के खाते में एक-एक सीट आई। दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।

दरभंगा शिक्षक सीट पर जन सुराज की जीत कांग्रेस के लिए अहम रही, क्योंकि पार्टी यहां अपना प्रतिनिधित्व बरकरार नहीं रख सकी। चुनाव के दौरान कांग्रेस, RJD और वाम दलों के बीच उम्मीदवारों को लेकर तालमेल की कमी भी चर्चा में रही।

पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार की जीत

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में JDU के नीरज कुमार ने जीत दर्ज की। चुनाव में जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह भी मैदान में थे। अनुज सिंह को जिताने के लिए निर्दलीय विधायक अनंत सिंह ने प्रचार किया था।

नतीजों के बाद नीरज कुमार ने अनंत सिंह पर तंज कसा। दोनों पक्षों के बीच चुनाव प्रचार के दौरान भी बयानबाजी हुई थी। हार के बाद अनंत सिंह ने कहा कि वह जनता के फैसले को स्वीकार करते हैं, हालांकि नीरज कुमार का राजनीतिक विरोध जारी रहेगा।

बिहार में पटना शिक्षक सीट पर RJD की जीत के बाद तेजस्वी यादव ने खुशी जताई। उन्होंने दावा किया कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होते तो पार्टी का प्रदर्शन और बेहतर हो सकता था। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने उनके बयान पर पलटवार किया।

महाराष्ट्र में कांग्रेस को एक सीट

महाराष्ट्र की पांच विधान परिषद सीटों के चुनाव में कांग्रेस ने नागपुर की एक सीट पर जीत दर्ज की। BJP ने पुणे शिक्षक सीट पर और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अमरावती शिक्षक सीट पर जीत हासिल की।

पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट पर भी शरद पवार गुट को सफलता मिली।

महाराष्ट्र के नतीजों में अलग-अलग दलों की क्षेत्रीय पकड़ और उम्मीदवारों की स्थिति का असर दिखाई दिया।

कर्नाटक में सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस चारों सीटें हारी

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी विधान परिषद की चारों सीटें हार गई। BJP ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि उसकी सहयोगी JDS को एक सीट मिली।

बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में JDS के एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा MLC पुट्टना को 908 मतों से हराया। पुट्टना पांच बार विधान परिषद सदस्य रह चुके थे। उनकी हार कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण रही।

कर्नाटक के नतीजों के बाद BJP नेताओं ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर सवाल उठाए। वहीं, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि पार्टी हार के कारणों की समीक्षा करेगी और कमियों को दूर करने के लिए कदम उठाएगी।

कांग्रेस ने कहा- हार की समीक्षा करेंगे, बैलेट पेपर की मांग जारी रहेगी

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्वीकार किया कि पार्टी को कम से कम दो सीटें जीतने की उम्मीद थी, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक कर चुनावी नतीजों और जनता के संदेश पर चर्चा की जाएगी।

बैलेट पेपर से चुनाव होने के बावजूद हार को लेकर सवाल पूछे जाने पर शिवकुमार ने कहा कि चुनाव में हार-जीत होती रहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस बैलेट पेपर से चुनाव कराने की अपनी मांग जारी रखेगी।

MLC चुनाव के नतीजों से क्या संकेत मिले?

चार राज्यों के परिणामों में अलग-अलग क्षेत्रीय समीकरण सामने आए। उत्तर प्रदेश में सपा ने अपनी सीटें बढ़ाईं, जबकि BJP ने छह सीटें बरकरार रखीं। बिहार में जन सुराज ने विधान परिषद में प्रवेश किया और RJD ने पटना शिक्षक सीट पर जीत दर्ज की। महाराष्ट्र में कांग्रेस को एक सीट मिली, जबकि कर्नाटक में पार्टी सभी चार सीटें हार गई।

इन नतीजों के बाद कांग्रेस के उम्मीदवार चयन, स्थानीय संगठन और सहयोगी दलों के साथ तालमेल पर चर्चा तेज हुई है। हालांकि, विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों को सीधे लोकसभा या विधानसभा चुनावों के जनमत के बराबर नहीं माना जा सकता। इन सीटों पर मतदाताओं की श्रेणी और स्थानीय मुद्दे अलग होते हैं।

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