हिमाचल में करवा चौथ पर पुरुषों को भी मिलेगी छुट्टी? सुक्खू सरकार के फैसले से जुड़ी बड़ी खबर
हिमाचल प्रदेश में करवा चौथ के अवसर पर छुट्टी को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने त्योहार के दिन मिलने वाले अवकाश का दायरा बढ़ाते हुए पुरुष कर्मचारियों को भी इसमें शामिल करने की घोषणा की है। पहले जहां इस अवसर पर मुख्य रूप से महिला कर्मचारियों को छुट्टी मिलती थी, वहीं नई घोषणा के अनुसार पुरुषों को भी अवकाश का लाभ देने की बात कही गई है।
सरकार के इस फैसले का उद्देश्य कामकाजी पति-पत्नी को त्योहार साथ मनाने का अवसर देना बताया जा रहा है। हालांकि, अवकाश की तारीख और सरकारी अधिसूचना के विवरण की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही लागू व्यवस्था की पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
करवा चौथ पर पति-पत्नी साथ मना सकेंगे त्योहार
करवा चौथ पर विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखती हैं। इस दौरान पूजा-अर्चना और अन्य तैयारियों में परिवार के सदस्य भी शामिल होते हैं। कामकाजी महिलाओं के लिए त्योहार के दिन छुट्टी मिलने से व्रत और पूजा की तैयारियां करना आसान हो सकता है।
नई घोषणा के मुताबिक, पुरुष कर्मचारियों को भी अवकाश देने से पति-पत्नी को एक साथ त्योहार मनाने का अवसर मिल सकेगा। सरकार के इस कदम को पारिवारिक परंपराओं और त्योहारों के प्रति संवेदनशील पहल के रूप में देखा जा रहा है।
सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में छुट्टी का दावा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, करवा चौथ के अवसर पर सरकारी कार्यालयों के साथ सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों तथा कॉलेजों में भी छुट्टी की बात कही गई है। हालांकि, सभी संस्थानों पर लागू होने वाले अवकाश के नियमों की पुष्टि संबंधित सरकारी आदेश से करना जरूरी है।
सीएम सुक्खू ने क्या कहा?
रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने त्योहार पर अवकाश की घोषणा करते हुए कहा कि इस अवसर पर एक दिन की छुट्टी होनी चाहिए। बताया गया है कि घोषणा के बाद संबंधित अधिसूचना भी जारी की गई।
करवा चौथ पर क्यों रखा जाता है व्रत?
करवा चौथ हिंदू परंपरा का एक प्रमुख त्योहार है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। कई महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं।
ऐसे में त्योहार के दिन अवकाश मिलने से कामकाजी परिवारों को पूजा और पारिवारिक परंपराओं में शामिल होने के लिए अधिक समय मिल सकता है।
