बेंगलुरु में गूंजा बिहार का गौरव, सम्राट चौधरी बोले- कर्मभूमि के साथ जन्मभूमि के विकास में भी दें योगदान
बेंगलुरु: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आज बिहार की संस्कृति, विरासत और विकास की झलक देखने को मिली। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने आर्ट ऑफ लिविंग के प्रांगण में दीप प्रज्ज्वलित कर चार दिवसीय बिहार महोत्सव-2026 का शुभारंभ किया।
इस मौके पर बिहार की कला, संस्कृति, खान-पान और परंपराओं को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख किया और देश के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे बिहारियों से अपनी जन्मभूमि के विकास में योगदान देने की अपील की।
वहीं, श्री श्री रविशंकर ने बिहार महोत्सव को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से देश की विविध संस्कृतियां एक-दूसरे के करीब आती हैं और आपसी जुड़ाव मजबूत होता है।
‘कर्मभूमि के साथ जन्मभूमि के विकास में भी दें योगदान’
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार ने सदियों से भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को ज्ञान, करुणा, दर्शन और अहिंसा का संदेश दिया है। बिहार की धरती ने भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, गुरु गोविंद सिंह और महात्मा गांधी जैसे महान व्यक्तित्वों की विरासत को अपने साथ जोड़ा है।
उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि बिहार के लोग जिस स्थान पर रहकर अपनी कर्मभूमि बना रहे हैं, वहां पूरी मेहनत से आगे बढ़ें, लेकिन अपनी जन्मभूमि बिहार के विकास और समृद्धि में भी योगदान दें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के समृद्ध होने से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने प्रवासी बिहारियों से राज्य के विकास में अपनी भूमिका निभाने की अपील की।
31 दिसंबर 2028 तक बिहार में बनेगा मां सीता का भव्य मंदिर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का जिक्र करते हुए एक बड़ी घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर 2028 तक बिहार में मां सीता का भव्य मंदिर स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने बिहार को ऐतिहासिक और गौरवशाली धरती बताते हुए कहा कि पाटलिपुत्र लंबे समय तक भारत की ऐतिहासिक राजधानी रहा है। बिहार की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करने के लिए आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण प्रयास किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने आर्ट ऑफ लिविंग और श्री श्री रविशंकर के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 1981 में स्थापित आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने पिछले कई दशकों में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को बेहतर और तनावमुक्त जीवन की दिशा दिखाई है।
उन्होंने सुदर्शन क्रिया के माध्यम से लोगों को स्वस्थ और तनावमुक्त जीवन की ओर प्रेरित करने में श्री श्री रविशंकर की भूमिका की भी प्रशंसा की।
6 हजार करोड़ से 3.17 लाख करोड़ तक पहुंचा बिहार का बजट
मुख्यमंत्री ने बिहार की आर्थिक स्थिति में आए बदलाव का जिक्र करते हुए राज्य की विकास यात्रा को सामने रखा। उन्होंने बताया कि करीब 27 साल पहले जब उन्होंने बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी, तब राज्य का बजट करीब 6 हजार करोड़ रुपये था।
उन्होंने कहा कि झारखंड के अलग होने के बाद बिहार के पास संसाधन सीमित हो गए थे और राज्य के राजस्व का बड़ा हिस्सा झारखंड क्षेत्र से आता था। इसके बावजूद बिहार ने विकास की दिशा में लंबी यात्रा तय की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में बिहार ने विकास के कई नए आयाम स्थापित किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने 3.17 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था।
उन्होंने इसे बिहार की बदलती आर्थिक स्थिति और विकास की गति का प्रमाण बताया।
सिंचाई के क्षेत्र में भी बिहार ने हासिल की बड़ी प्रगति
सम्राट चौधरी ने बिहार में सिंचाई के क्षेत्र में हुए बदलाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले राज्य में करीब 21 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित थी, जो अब बढ़कर लगभग 44 लाख हेक्टेयर हो गई है।
सरकार ने लक्ष्य तय किया है कि 2030 से पहले बिहार में 70 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई की सुविधाओं का विस्तार होने से कृषि क्षेत्र मजबूत होगा और किसानों की आय तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा।
AI के जरिए सुशासन को मजबूत करने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है। जिस तरह कंप्यूटर, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने दुनिया के काम करने के तरीके को बदला, उसी तरह आने वाले समय में AI शासन और जनसेवा को और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि बिहार में भी AI आधारित व्यवस्थाओं के माध्यम से सुशासन को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य तकनीक का इस्तेमाल करके आम लोगों तक सरकारी सेवाओं को तेजी से और बेहतर तरीके से पहुंचाना है।
30 दिन में समस्या का समाधान नहीं तो कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने आम लोगों की शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए सरकार की ओर से बनाई गई व्यवस्था का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार की गई है, जिसमें आवेदन मिलने के बाद निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्रवाई की जाती है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, यदि 30 दिनों के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई का आदेश स्वतः जारी हो जाता है।
उन्होंने कहा कि जनता को संतुष्ट रखना, उसकी सुविधाएं बढ़ाना और उसे न्याय दिलाना लोकतांत्रिक शासन का मूल उद्देश्य है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वह स्वयं भी महीने के दूसरे मंगलवार को लोगों की शिकायतों और उनके समाधान की समीक्षा करते हैं।
‘बिहार ने हमेशा दुनिया को दिशा देने का काम किया’
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार का इतिहास केवल राजनीतिक या प्रशासनिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस धरती ने पूरी दुनिया को दिशा देने का काम किया है।
उन्होंने चंपारण सत्याग्रह का उल्लेख करते हुए कहा कि मोतिहारी की धरती ने मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि अब बिहार को विकास और समृद्धि के नए दौर में आगे ले जाना है। इसके लिए बिहार में रहने वाले लोगों के साथ-साथ देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे बिहारियों का सहयोग भी जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने श्री श्री रविशंकर से बिहार की समृद्धि और विकास के लिए आशीर्वाद की कामना की और कहा कि बिहार भारत के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़े तथा दुनिया में अपनी पहचान और मजबूत करे।
पाग और अंगवस्त्र भेंट कर श्री श्री रविशंकर का स्वागत
बिहार महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आर्ट ऑफ लिविंग परिसर में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का भी अवलोकन किया। इनमें बिहार के पारंपरिक व्यंजन, मधुबनी पेंटिंग और अन्य सांस्कृतिक उत्पादों से जुड़े स्टॉल शामिल थे।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने गौशाला और आश्रम में स्थित गुरुकुल का भ्रमण किया। उन्होंने गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना कर बिहारवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पाग और अंगवस्त्र भेंट कर श्री श्री रविशंकर का स्वागत किया। इसके जवाब में श्री श्री रविशंकर ने भी अंगवस्त्र भेंट कर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया।
‘आज बिहार के लिए बहुत खुशी का दिन’
पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि आज बिहार के लिए बेहद खुशी का दिन है कि आर्ट ऑफ लिविंग के प्रांगण में बिहार महोत्सव-2026 का आयोजन हो रहा है।
उन्होंने श्री श्री रविशंकर के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने बिहारवासियों को अपने परिसर में बिहार की संस्कृति और विरासत को प्रदर्शित करने का अवसर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री श्री रविशंकर बिहार की समृद्धि का रास्ता खोलना चाहते हैं और लोगों को शांति की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।
श्री श्री रविशंकर ने बताया राष्ट्रीय एकता का माध्यम
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने बिहार महोत्सव में प्रदर्शित मधुबनी कला और बिहार की सांस्कृतिक विविधता की प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि बिहार महोत्सव में देश की विविधता को खूबसूरती से प्रदर्शित किया गया है। यहां बिहार के अलग-अलग पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए हैं।
श्री श्री रविशंकर ने कहा कि इस तरह के आयोजन राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने और देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों को आपस में जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि जब लोग एक-दूसरे की संस्कृति, कला, खान-पान और परंपराओं को समझते हैं तो आपसी जुड़ाव बढ़ता है और देश की एकता और मजबूत होती है।
बिहार की संस्कृति और विकास का दिखा संगम
बेंगलुरु में आयोजित बिहार महोत्सव-2026 में एक ओर जहां बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला को प्रदर्शित किया गया, वहीं दूसरी ओर राज्य के विकास और भविष्य की संभावनाओं को भी सामने रखा गया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जहां बिहार के आर्थिक विकास, सिंचाई, AI आधारित सुशासन और प्रवासी बिहारियों की भूमिका पर जोर दिया, वहीं श्री श्री रविशंकर ने इस आयोजन को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव से जोड़ा।
चार दिवसीय यह महोत्सव बिहार की संस्कृति को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने के साथ-साथ प्रवासी बिहारियों को अपनी जन्मभूमि से जोड़ने का भी एक महत्वपूर्ण मंच बनकर सामने आया है।