क्या देश के सभी मंदिरों के लिए होनी चाहिए एक समान व्यवस्था? जानिए पक्ष, विपक्ष और संविधान क्या कहता है
देश के प्रमुख मंदिरों में समय-समय पर सामने आने वाले विवादों ने एक बार फिर मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है। सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से लेकर काशी विश्वनाथ, जगन्नाथ मंदिर और हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि में कथित वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों तक, कई मामलों ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या भारत में मंदिरों के संचालन और प्रबंधन के लिए एक समान नीति होनी चाहिए। यह मुद्दा केवल मंदिरों के प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, राज्यों के अधिकार, श्रद्धालुओं की आस्था और वित्तीय पारदर्शिता जैसे संवेदनशील पहलुओं से भी जुड़ा हुआ है।
क्यों उठी एक समान नीति की मांग?
राम मंदिर में दान राशि में कथित गड़बड़ियों की जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं की आशंका सामने आने के बाद मंदिर प्रबंधन को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। इससे पहले सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों ने भी इस विषय को राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बनाया था। इसी बीच कुछ नेताओं और विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि सभी धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन के लिए समान मानक या नीति पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण के पक्ष में क्या हैं तर्क?
सरकारी नियंत्रण या वैधानिक बोर्ड के समर्थकों का मानना है कि इससे मंदिरों के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी और चढ़ावे तथा संपत्तियों के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार या अनियमितताओं पर रोक लग सकेगी। समर्थकों का यह भी तर्क है कि सरकारी निगरानी से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं, व्यवस्थित भीड़ प्रबंधन और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था मिल सकती है। साथ ही बड़े मंदिरों की आय का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जनकल्याणकारी कार्यों में भी किया जा सकता है।
विरोधियों की क्या हैं आपत्तियां?
मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण का विरोध करने वाले पक्ष का कहना है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 26 धार्मिक संप्रदायों को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार देता है। ऐसे में सरकारी हस्तक्षेप धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है। विरोधियों का एक प्रमुख तर्क यह भी है कि यदि मस्जिदों, चर्चों और अन्य धार्मिक संस्थानों का संचालन उनके अपने निकाय करते हैं, तो केवल हिंदू मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
देश के प्रमुख मंदिरों में कैसी है व्यवस्था?
भारत में सभी मंदिरों के लिए एक जैसी व्यवस्था नहीं है। अलग-अलग राज्यों और मंदिरों में अलग प्रशासनिक मॉडल लागू हैं।
- सबरीमला मंदिर (केरल): त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के अधीन।
- जगन्नाथ मंदिर (ओडिशा): श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) और प्रबंध समिति द्वारा संचालित।
- पद्मनाभस्वामी मंदिर (केरल): त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित प्रशासनिक समिति की निगरानी में।
- काशी विश्वनाथ मंदिर (उत्तर प्रदेश): श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा संचालित।
- तिरुपति बालाजी मंदिर (आंध्र प्रदेश): तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रबंधन में।
- राम मंदिर, अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा संचालित।
- बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन: विशेष न्यास के माध्यम से प्रबंधन।
- बिहार: बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के तहत कई मंदिरों का संचालन।
- तमिलनाडु: हजारों मंदिर हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के अधीन हैं।
- केरल: कई प्रमुख मंदिर देवस्वम बोर्डों द्वारा संचालित किए जाते हैं।
संविधान क्या कहता है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 26 धार्मिक संप्रदायों को अपने धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन का अधिकार प्रदान करता है। इसके अलावा संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार धार्मिक संस्थाओं का प्रशासन मुख्य रूप से राज्य सूची का विषय है। यानी मंदिरों के प्रबंधन से जुड़े कानून बनाने का अधिकार राज्यों के पास है। यही कारण है कि विभिन्न राज्यों में अलग-अलग व्यवस्थाएं लागू हैं।
क्या पूरे देश में एक समान कानून संभव है?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि देशभर के सभी मंदिरों के लिए एक समान कानून बनाना आसान नहीं होगा, क्योंकि प्रत्येक मंदिर की परंपराएं, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राज्यों के कानून अलग-अलग हैं। हालांकि, वित्तीय पारदर्शिता, दान के लेखा-जोखा, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, ऑडिट व्यवस्था और श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कुछ समान मानक तय किए जा सकते हैं। इससे धार्मिक परंपराओं को प्रभावित किए बिना प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सकता है।