शी जिनपिंग का उत्तर कोरिया दौरा खत्म, किम जोंग-उन के साथ रिश्तों को नई मजबूती देने की कोशिश
प्योंगयांग: चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping का दो दिवसीय उत्तर कोरिया दौरा संपन्न हो गया है। वर्ष 2019 के बाद पहली बार प्योंगयांग पहुंचे शी जिनपिंग का उत्तर कोरियाई नेता Kim Jong-un ने भव्य स्वागत किया। इस दौरे को चीन और उत्तर कोरिया के बीच रणनीतिक संबंधों को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रेड कार्पेट स्वागत से दिखी रिश्तों की गर्माहट
प्योंगयांग पहुंचने पर शी जिनपिंग का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत किया गया। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आधिकारिक समारोहों में स्वयं किम जोंग-उन मौजूद रहे। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी ने इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
किम जोंग-उन ने कहा कि वर्ष की अपनी पहली राजकीय यात्रा के लिए शी जिनपिंग द्वारा उत्तर कोरिया का चयन करना दोनों देशों के रिश्तों को दिए जा रहे विशेष महत्व को दर्शाता है।
रूस से बढ़ती नजदीकियों के बीच चीन का संदेश
विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब उत्तर कोरिया ने हाल के वर्षों में रूस के साथ अपने संबंधों को काफी मजबूत किया है। ऐसे में चीन इस यात्रा के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि प्योंगयांग का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार अब भी बीजिंग ही है।
दूसरी ओर, किम जोंग-उन के लिए भी यह दौरा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और वैश्विक दबावों के बीच एक बड़े सहयोगी के समर्थन का संकेत माना जा रहा है।
‘पहाड़ों और नदियों से जुड़े हैं दोनों देश’
एक आधिकारिक समारोह में शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और उत्तर कोरिया के रिश्ते गहरे ऐतिहासिक और रणनीतिक आधार पर टिके हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश “पहाड़ों और नदियों से जुड़े हुए हैं और उनकी मंजिल भी एक है।”
किम ने भी चीन के साथ दोस्ती को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात दोहराई और बीजिंग की “वन चाइना” नीति के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
रक्षा सहयोग और ऐतिहासिक रिश्तों पर जोर
दोनों नेताओं ने इस वर्ष चीन और उत्तर कोरिया के बीच रक्षा सहयोग समझौते की 65वीं वर्षगांठ का भी उल्लेख किया। यह समझौता चीन का किसी अन्य देश के साथ मौजूद एकमात्र औपचारिक रक्षा समझौता माना जाता है।
चीन लंबे समय से उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा आर्थिक, राजनीतिक और व्यापारिक सहयोगी रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था काफी हद तक चीन के सहयोग पर निर्भर करती है।
परमाणु कार्यक्रम पर नहीं हुई चर्चा
इस दौरे की एक अहम बात यह रही कि दोनों देशों की आधिकारिक रिपोर्टों में उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण (डीन्यूक्लियराइजेशन) का कोई उल्लेख नहीं किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में चीन ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे को उठाने की अपनी सक्रियता कम कर दी है और अब वह क्षेत्रीय स्थिरता तथा रणनीतिक सहयोग पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।
शीर्ष अधिकारियों के साथ पहुंचे थे शी
इस यात्रा में शी जिनपिंग के साथ उनके कई वरिष्ठ सहयोगी भी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल में शीर्ष राजनीतिक, रक्षा, विदेश और वाणिज्यिक अधिकारी मौजूद रहे, जिससे इस दौरे की अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
दोनों नेताओं ने प्योंगयांग स्थित फ्रेंडशिप टॉवर का दौरा भी किया, जो कोरियाई युद्ध में शहीद हुए चीनी सैनिकों की स्मृति में बनाया गया है। इसके अलावा उन्होंने एक कैडर स्कूल में देवदार का पौधा लगाकर दोनों देशों की स्थायी मित्रता का प्रतीकात्मक संदेश दिया।
रिश्तों में गर्मजोशी, लेकिन मतभेद भी बरकरार
हालांकि सार्वजनिक तौर पर दोनों देशों ने दोस्ती और सहयोग पर जोर दिया, लेकिन कुछ मुद्दों पर मतभेद अब भी कायम हैं। चीन लंबे समय से चाहता रहा है कि उत्तर कोरिया आर्थिक विकास के लिए चीनी मॉडल से प्रेरणा ले और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा निवेश के लिए अपने दरवाजे खोले।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि किम जोंग-उन अभी भी इस दिशा में सीमित रुचि दिखा रहे हैं। अमेरिका-उत्तर कोरिया मामलों के जानकार Sydney Seiler का कहना है कि उत्तर कोरिया अब भी चीन के आर्थिक विकास मॉडल को पूरी तरह अपनाने से बचता नजर आता है।
इसके बावजूद, शी जिनपिंग का यह दौरा स्पष्ट संकेत देता है कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच चीन और उत्तर कोरिया अपने पारंपरिक रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।