इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक दौरे से ठीक पहले एक नया जियो-पॉलिटिकल विजन पेश किया है
- इजरायल (केंद्र)
- भारत (ग्लोबल पावर के रूप में मुख्य भूमिका)
- ग्रीस और साइप्रस (मेडिटेरेनियन देश)
- अरब देश (कुछ नामित, जैसे UAE, सऊदी अरब के संभावित)
- अफ्रीकी देश
- एशिया के अन्य देश
यह ढांचा IMEC (India-Middle East-Europe Economic Corridor) से मिलता-जुलता है, लेकिन इसका फोकस सिर्फ व्यापार नहीं—बल्कि सुरक्षा, खुफिया साझेदारी, रक्षा सहयोग, कूटनीति और आर्थिक कनेक्टिविटी पर है। नेतन्याहू का कहना है कि यह गठबंधन उन देशों का होगा जो “वास्तविकता, चुनौतियों और लक्ष्यों को एक जैसी नजर से देखते हैं”।
- इजरायल खुद को क्षेत्रीय रूप से घिरा हुआ महसूस कर रहा है—ईरान के प्रॉक्सी (हिजबुल्लाह, हूती) और अन्य दुश्मनों से।
- भारत को शामिल करने से ईरान, तुर्की और अन्य को मजबूत संदेश जाएगा।
- किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर एंड्रियास क्रेग का मानना है कि भारत जैसा ग्लोबल पावर इजरायल के साथ खड़ा होने से क्षेत्रीय संतुलन बदलेगा।
- नेतन्याहू ने मोदी को “पर्सनल फ्रेंड” कहा और दोनों देशों के रिश्ते को “इनोवेशन, सुरक्षा और स्ट्रैटेजिक विजन” में साझेदार बताया।
भारत के लिए क्या मतलब? अवसर या जोखिम?भारत-इजरायल रिश्ते मजबूत हैं—2017 के बाद मोदी का यह दूसरा दौरा ऐतिहासिक है। दोनों देश AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, सुरक्षा और व्यापार पर बात कर रहे हैं। लेकिन भारत की विदेश नीति गुट-निरपेक्ष और बहु-संरेखित (multi-aligned) रही है:
- हम ईरान के साथ अच्छे रिश्ते रखते हैं (चाबहार पोर्ट, तेल आयात)।
- सऊदी अरब, UAE के साथ स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप बढ़ रही है।
- रूस और अमेरिका दोनों को संतुलित करते हैं।
एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि यदि भारत इस ‘सिक्योरिटी एलायंस’ में शामिल होता है, तो:
- क्षेत्रीय ध्रुवीकरण (polarization) बढ़ेगा।
- ईरान और उसके सहयोगी भारत को “घेरने वाली साजिश” में शामिल बताकर प्रचार कर सकते हैं।
- पाकिस्तान ने पहले ही इसे “मुस्लिम उम्माह के खिलाफ” बताकर सीनेट में प्रस्ताव पास किया है।
फिलहाल भारत ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। मोदी का दौरा मुख्य रूप से द्विपक्षीय सहयोग पर केंद्रित है, लेकिन ‘हेक्सागन’ की चर्चा से साफ है कि इजरायल इसे बड़े स्तर पर आगे बढ़ाना चाहता है। क्या भारत इसमें शामिल होगा या अपनी स्वतंत्र नीति बनाए रखेगा—यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।