लखनऊ: यूपी विधानसभा में हंगामा, सपा विधायकों ने मंत्री संजय निषाद के हाथ से कागज छीना, हाथापाई की नौबत
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुधवार को बजट चर्चा के दौरान जोरदार हंगामा हुआ। मत्स्य विकास मंत्री संजय निषाद और समाजवादी पार्टी (सपा) विधायकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई, जिसके दौरान सपा विधायक वेल में आ गए और मंत्री के हाथ से कागज छीनने की कोशिश की। इस दौरान सपा और निषाद पार्टी विधायकों के बीच हाथापाई की स्थिति बन गई। संसदीय कार्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने इसे मंत्री पर हमले की कोशिश करार देते हुए सदन की पीठ से शिकायत की।
मंत्री संजय निषाद ने सपा-कांग्रेस पर बोला तीखा हमला
बजट की तारीफ करने के बाद मंत्री संजय निषाद ने सपा और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “निषाद समुदाय ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी, मुगलों से लड़ाई लड़ी और पिछले 75 साल से इन बेईमानों (कांग्रेस) से भी लड़ रहे हैं। दाहिने बैठे लोग (सपा) 30 साल सत्ता में रहे, लेकिन मछुआ समाज के लिए एक रुपया भी नहीं दिया।”मंत्री ने आगे आरोप लगाया, “केंद्र सरकार ने 67 साल में पूरे देश के लिए 3000 करोड़ रुपये दिए, लेकिन यूपी ने एक रुपया भी नहीं दिया। एक मंत्री बनाकर बैठाया था, लेकिन हमारे विभाग में एक मछुआ पद था, उसे उर्दू अनुभाग में भर्ती कर दिया गया। निषाद उर्दू पढ़ता है या मछली उर्दू पढ़ती है? ये मछुआरों के मगरमच्छ हैं।”
बजट की तारीफ करने के बाद मंत्री संजय निषाद ने सपा और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “निषाद समुदाय ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी, मुगलों से लड़ाई लड़ी और पिछले 75 साल से इन बेईमानों (कांग्रेस) से भी लड़ रहे हैं। दाहिने बैठे लोग (सपा) 30 साल सत्ता में रहे, लेकिन मछुआ समाज के लिए एक रुपया भी नहीं दिया।”मंत्री ने आगे आरोप लगाया, “केंद्र सरकार ने 67 साल में पूरे देश के लिए 3000 करोड़ रुपये दिए, लेकिन यूपी ने एक रुपया भी नहीं दिया। एक मंत्री बनाकर बैठाया था, लेकिन हमारे विभाग में एक मछुआ पद था, उसे उर्दू अनुभाग में भर्ती कर दिया गया। निषाद उर्दू पढ़ता है या मछली उर्दू पढ़ती है? ये मछुआरों के मगरमच्छ हैं।”
सपा पर गंभीर आरोप, एससी-एसटी एक्ट का हवाला
टोकाटाकी के बीच मंत्री नहीं रुके और बोलते गए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने नौकरी लूटी, रोजी-रोटी छीनी और जातिसूचक शब्दों से अपमान किया। गोरखपुर में आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “हमारे समाज ने हमें यहां भेजा है कि जाओ और इन लोगों का पर्दाफाश करो।”नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा राज्यपाल के अभिभाषण पर इस्तेमाल किए गए जातिसूचक शब्द का जिक्र करते हुए संजय निषाद ने कहा, “अपने नेता से कहिए कि माफी मांगें। अगर नहीं मांगते तो एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करवा दिया जाएगा।”
टोकाटाकी के बीच मंत्री नहीं रुके और बोलते गए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने नौकरी लूटी, रोजी-रोटी छीनी और जातिसूचक शब्दों से अपमान किया। गोरखपुर में आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “हमारे समाज ने हमें यहां भेजा है कि जाओ और इन लोगों का पर्दाफाश करो।”नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा राज्यपाल के अभिभाषण पर इस्तेमाल किए गए जातिसूचक शब्द का जिक्र करते हुए संजय निषाद ने कहा, “अपने नेता से कहिए कि माफी मांगें। अगर नहीं मांगते तो एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करवा दिया जाएगा।”
सपा विधायकों ने कागज छीना, सदन अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा
सपा विधायकों के वेल में आने पर लगातार पीठ की ओर से मंत्री को अपनी बात समाप्त करने के निर्देश दिए जा रहे थे, लेकिन संजय निषाद अपनी बात कहते रहे। इस बीच कुछ सपा विधायक मंत्री की ओर बढ़े और उनके हाथ से कागज छीनने की कोशिश की। मयंकेश्वर शरण सिंह ने इसे हाथापाई और मंत्री पर हमला बताते हुए हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा, “यही सपा का आचरण है।”जब विवाद थमता नहीं दिखा तो विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सदन में आए। उन्होंने दोनों पक्षों को शांत करवाया और कहा, “जैसे सदन चलता रहा है, वैसे ही चलने दिया जाए।”यह घटना यूपी विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई।
सपा विधायकों के वेल में आने पर लगातार पीठ की ओर से मंत्री को अपनी बात समाप्त करने के निर्देश दिए जा रहे थे, लेकिन संजय निषाद अपनी बात कहते रहे। इस बीच कुछ सपा विधायक मंत्री की ओर बढ़े और उनके हाथ से कागज छीनने की कोशिश की। मयंकेश्वर शरण सिंह ने इसे हाथापाई और मंत्री पर हमला बताते हुए हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा, “यही सपा का आचरण है।”जब विवाद थमता नहीं दिखा तो विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सदन में आए। उन्होंने दोनों पक्षों को शांत करवाया और कहा, “जैसे सदन चलता रहा है, वैसे ही चलने दिया जाए।”यह घटना यूपी विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई।