• February 18, 2026

बंगाल में ‘युवा साथी’ योजना पर अमित मालवीय का तीखा हमला: 13 लाख रजिस्ट्रेशन को बताया सरकार की नाकामी का सबूत

नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक हमले तेज हो गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा बेरोजगार युवाओं के लिए शुरू की गई ‘बांग्लार युवा साथी’ (Yuva Sathi) योजना पर बीजेपी ने जोरदार हमला बोला है। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख और बंगाल के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने इस योजना के 48 घंटों में 13 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन होने को ममता सरकार की विफलता का प्रमाण बताया है।मालवीय ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि टीएमसी सरकार पिछले एक दशक से 2 करोड़ नौकरियां देने का दावा करती रही है, लेकिन अब बेरोजगारी भत्ता योजना में इतनी बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन होने पर ‘विजय’ मनाना विडंबना है। उन्होंने लिखा, “क्या यह ममता बनर्जी सरकार की पूरी तरह नाकामी का सबूत नहीं है? सालों तक रोजगार पैदा करने के बड़े-बड़े दावों के बाद, टैक्सपेयर्स के करोड़ों रुपये विदेशी यात्राओं और ‘बिस्वा बंग’ शो पर खर्च करने के बाद, अब सरकार युवाओं को महज 1,500 रुपये की खैरात देकर खुश करना चाहती है।
‘युवाश्री’ का रीसायकल वर्जन बताई योजना
अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि ‘युवा साथी’ कोई नई योजना नहीं, बल्कि 2013 में शुरू की गई ‘युवाश्री’ योजना का पुराना रूप है, जिसका नाम बदल दिया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि ‘युवाश्री’ में भी बेरोजगार युवाओं को 1,500 रुपये मासिक देने का वादा किया गया था, लेकिन 2017-18 के बाद इसका बजट लगभग खत्म हो गया। हजारों आवेदक, जिनमें 2013-14 बैच के युवा शामिल हैं, सालों से अपने हक का इंतजार कर रहे हैं।
मालवीय ने लिखा, “युवाश्री का क्या हुआ?
बड़ी घोषणाओं के बावजूद इतने सारे युवा आवेदकों को फायदा क्यों नहीं मिला? रुकी हुई स्कीम का नाम बदलने से नौकरियां नहीं बनतीं। वादों को दोहराने से भविष्य नहीं बनता। बंगाल के युवा दिखावे से ज्यादा चाहते हैं – अच्छी शिक्षा, असली रोजगार के अवसर और इज्जत के साथ गुजारा, न कि चुनाव से पहले घोषित होने वाले भत्ते।”योजना की डिटेल्स और राजनीतिक संदर्भ
‘बांग्लार युवा साथी’ योजना फरवरी 2026 के अंतरिम बजट में घोषित की गई थी, जिसमें 21-40 वर्ष के बेरोजगार युवाओं को 1,500 रुपये मासिक दिए जाएंगे – जब तक वे नौकरी नहीं पा लेते या अधिकतम 5 साल तक। सरकार का दावा है कि यह युवाओं को आर्थिक सहायता देगी, लेकिन बीजेपी इसे चुनावी लालच और पुरानी योजनाओं का पुन: पैकेजिंग बता रही है।
यह विवाद पश्चिम बंगाल में बेरोजगारी, औद्योगिक विकास की कमी और चुनावी वादों पर केंद्रित राजनीतिक बहस को और तेज कर रहा है। ममता सरकार ने योजना को युवाओं के प्रति प्रतिबद्धता बताया है, जबकि विपक्ष इसे सरकार की नाकामी का प्रमाण मान रहा है।
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