भारत AI को अपनाएगा लेकिन खतरों से सतर्क रहेगा: PSA डॉ. अजय कुमार सूद ने कहा- जरूरत पड़ी तो सख्त कानून लाएंगे; अगले 3 साल में रोबोटिक्स और ह्यूमनॉइड्स में क्रांति आएगी
नई दिल्ली: भारत के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार सूद ने एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के विनियमन और भारत की नई रणनीति पर महत्वपूर्ण बयान दिए हैं। एनडीटीवी से खास बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत एआई तकनीक को तेजी से अपनाने के साथ-साथ इसके संभावित खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है। अगर मौजूदा कानून और नियम पर्याप्त साबित नहीं हुए, तो सरकार नए सख्त कानून और रेगुलेशन लाने से पीछे नहीं हटेगी।
AI गवर्नेंस फ्रेमवर्क में नया कानून का प्रावधानडॉ. सूद ने कहा, “हमने अपने AI गवर्नेंस फ्रेमवर्क में स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो हम नए कानून और रेगुलेशन लाएंगे। हम एआई के विकास को बढ़ावा दे रहे हैं, लेकिन सुरक्षा और नैतिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।”इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से भारत को ग्लोबल लीडर के रूप में प्रोजेक्ट करने का लक्ष्यप्रोफेसर सूद ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह समिट वैश्विक स्तर पर भारत को एआई के क्षेत्र में एक मजबूत लीडर के रूप में स्थापित करेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भारत के एआई सेक्टर में कई अरब डॉलर का निवेश दुनिया के विभिन्न देशों से आएगा। समिट के जरिए भारत न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि वैश्विक एआई गवर्नेंस में अपनी भूमिका को भी मजबूत कर रहा है।अगले 3 साल में फिजिकल एआई में बड़ी क्रांतिडॉ. अजय कुमार सूद ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि अगले तीन साल में एआई सेक्टर में अगली बड़ी क्रांति फिजिकल एआई (Physical AI) के क्षेत्र में होगी। विशेष रूप से रोबोटिक्स और ह्यूमनॉइड्स (मानवाकार रोबोट) में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि यह क्रांति भारत के लिए भी अवसर लेकर आएगी, जहां देश अपनी मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन क्षमता का इस्तेमाल कर सकता है।प्रोफेसर सूद के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब भारत एआई मिशन के तहत बड़े पैमाने पर निवेश और नीतिगत ढांचा तैयार कर रहा है। सरकार का फोकस एआई को जिम्मेदारी से अपनाने, रोजगार सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रहने पर है, साथ ही गहरी फेक न्यूज, प्राइवेसी उल्लंघन और अन्य जोखिमों से बचाव पर भी।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के जरिए भारत न केवल तकनीकी शक्ति दिखा रहा है, बल्कि एआई के नैतिक और सुरक्षित इस्तेमाल के लिए वैश्विक मॉडल पेश करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है।