असम विधानसभा चुनाव: बीजेपी हेट्रिक की तैयारी में जुटी, हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में लड़ेगी लड़ाई; पीएम मोदी 6-8 और अमित शाह 12-15 रैलियां करेंगे
नई दिल्ली/गुवाहाटी: बीजेपी असम में अपनी सरकार को तीसरी बार सत्ता में लाकर हेट्रिक बनाने के लिए पूरी तरह जुट गई है। पार्टी ने विधानसभा चुनाव की रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है और अब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही बड़े नेताओं का प्रचार शुरू हो जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 8 और गृह मंत्री अमित शाह 12 से 15 चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे।
हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में चुनावबीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि असम विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। पार्टी का फीडबैक है कि जमीनी स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ और सरकार की विभिन्न योजनाओं के कारण उनकी लोकप्रियता चरम पर है। इसी वजह से यह भी संभावना है कि पार्टी जल्द ही घोषणा कर सकती है कि सरकार बनने पर हिमंता बिस्वा सरमा ही फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे। इससे नेतृत्व को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं रहेगा।
25-30 नए चेहरों को टिकट, कई मौजूदा विधायकों का टिकट कट सकता हैबीजेपी ने सत्ता विरोधी माहौल वाली कुछ सीटों पर नए चेहरों को मौका देने का फैसला किया है। वर्तमान में पार्टी के पास 67 विधायक हैं। पार्टी 95 से 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और बाकी सीटें सहयोगी दलों को दी जाएंगी।
पार्टी ने सभी विधानसभा सीटों का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। सर्वे के फीडबैक के आधार पर टिकट वितरण किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, 25 से 30 नए चेहरों को टिकट दिए जा सकते हैं, जिससे कई मौजूदा विधायकों के टिकट कट सकते हैं।100 मुद्दों पर फोकस, संकल्प पत्र के लिए जनता से सुझावबीजेपी ने चुनाव के लिए प्रमुख मुद्दों को भी फाइनल कर लिया है। राज्य स्तर पर असर डालने वाले बड़े मुद्दों में शामिल हैं:
- अवैध घुसपैठ रोकना
- हिमंता सरकार की विकास योजनाएं
- मोदी सरकार द्वारा असम में की गई परियोजनाएं
- कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व, खासकर गौरव गोगोई के कथित पाकिस्तान लिंक
- हिंदुत्व
- महिलाओं का सशक्तिकरण
इसके अलावा, माइक्रो लेवल पर भी फोकस रहेगा। हिमंता सरकार ने गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर लगभग 100 स्थानीय मुद्दों की पहचान की है और उनके समाधान की दिशा में काम किया है। संकल्प पत्र (मेनिफेस्टो) तैयार करने के लिए जल्द ही जनता से सुझाव मांगे जाएंगे, ताकि स्थानीय समस्याओं को प्राथमिकता दी जा सके।बीजेपी का लक्ष्य स्पष्ट है—असम में लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर पूर्वोत्तर में अपनी स्थिति को और मजबूत करना। चुनावी घोषणा के साथ ही पार्टी का प्रचार अभियान तेज होने की उम्मीद है।