डेटा सुरक्षा और अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर छिड़ा ‘महायुद्ध’: राहुल गांधी ने लगाए संप्रभुता से समझौते के आरोप, आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव का पलटवार
नई दिल्ली: भारतीय राजनीति के गलियारों में डेटा सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते एक बार फिर से विवादों के केंद्र में आ गए हैं। बुधवार को लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने संसद से लेकर सड़क तक हलचल मचा दी है। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर अमेरिका के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौते के माध्यम से भारत की ‘डेटा संप्रभुता’ और किसानों के हितों के साथ समझौता करने का बड़ा आरोप लगाया। इन आरोपों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन्हें पूरी तरह निराधार बताया और राहुल गांधी को तथ्यों की जांच करने की नसीहत दी।
सदन में अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने एक नए युग की आहट की ओर इशारा किया। उन्होंने भारत की तुलना एक ऐसी वैश्विक शक्ति से की जिसकी नींव यहाँ की 140 करोड़ जनता और उनका डेटा है। राहुल गांधी ने बेहद सरल उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह किसी इंजन को चलाने के लिए पेट्रोल की आवश्यकता होती है, उसी तरह आज के युग में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को चलाने के लिए डेटा की जरूरत होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि पेट्रोल (डेटा) नहीं होगा, तो एआई का इंजन भी पूरी तरह बेकार हो जाएगा। उनके अनुसार, वर्तमान में पूरी दुनिया में डेटा के केवल दो ही बड़े महासागर हैं—एक भारत और दूसरा चीन। ऐसे में भारत के पास डेटा के दम पर दुनिया का नेतृत्व करने का एक ऐतिहासिक अवसर है।
वैश्विक राजनीति के बदलते स्वरूप पर चर्चा करते हुए विपक्ष के नेता ने कहा कि दुनिया अब एक या दो महाशक्तियों के प्रभाव से मुक्त होकर बहु-ध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी डॉलर और उसके वैश्विक वर्चस्व को अब कड़ी चुनौती मिल रही है। हालांकि, इस तकनीकी क्रांति के नकारात्मक पहलुओं पर चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि एआई के बढ़ते प्रभाव के कारण कांग्रेस शासन के दौरान विकसित किया गया पारंपरिक आईटी इकोसिस्टम खतरे में है। राहुल गांधी को डर है कि भविष्य में एआई की वजह से भारत के लाखों सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है, क्योंकि यह तकनीक कई मानवीय कार्यों को खुद करने में सक्षम हो जाएगी।
विवाद का मुख्य केंद्र राहुल गांधी द्वारा हालिया अमेरिका-भारत व्यापार समझौते (Trade Deal) पर उठाए गए सवाल रहे। उन्होंने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भारत ने अपने डेटा व्यापार और नियंत्रण की चाबी अमेरिका के हाथों में सौंप दी है। राहुल गांधी का तर्क था कि अमेरिका अपनी सुपरपावर की स्थिति को बनाए रखने के लिए व्याकुल है और इसके लिए उसे भारत के विशाल डेटा पूल की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भारत समझौते की मेज पर बैठा, तो सरकार ने अपने ही नागरिकों के डेटा को सौदेबाजी की वस्तु बना दिया। उनके अनुसार, इस डील में अमेरिका को भारतीय डेटा तक असीमित पहुंच दी गई है और उसे सोर्स कोड साझा न करने की छूट भी दे दी गई है, जो सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चूक साबित हो सकती है।
व्यापार समझौते के अन्य पहलुओं पर भी राहुल गांधी ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने दावा किया कि इस सौदे के जरिए भारतीय बाजारों को अमेरिकी किसानों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है। उनके अनुसार, यह फैसला भारतीय कृषि क्षेत्र और स्थानीय किसानों के लिए विनाशकारी साबित होगा, क्योंकि वे अमेरिकी कृषि उत्पादों की प्रतिस्पर्धा के सामने टिक नहीं पाएंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऊर्जा खरीद, टैरिफ नीति और महत्वपूर्ण आर्थिक फैसलों पर अब वाशिंगटन का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। राहुल गांधी ने निष्कर्ष निकाला कि यह समझौता देश के दीर्घकालिक हितों के खिलाफ है और भारत की स्वायत्तता को कमजोर करता है।
इन तीखे आरोपों के बाद केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोर्चा संभाला और राहुल गांधी के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। वैष्णव ने स्पष्ट किया कि भारत की डेटा संप्रभुता पूरी तरह सुरक्षित है और सरकार ने इसे सुरक्षित रखने के लिए ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट’ (DPDP Act) जैसा मजबूत कानून बनाया है। उन्होंने कहा कि देश के सभी संवेदनशील क्षेत्रों के लिए हमारे पास अपने कड़े नियम और कानून हैं, जिनसे किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता। अश्विनी वैष्णव ने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को सदन में इतने गंभीर आरोप लगाने से पहले कम से कम बुनियादी तथ्यों की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
सरकार का स्पष्ट रुख है कि अमेरिका के साथ हुए व्यापारिक समझौते रणनीतिक हितों को ध्यान में रखकर किए गए हैं और इसमें डेटा सुरक्षा से जुड़ी सभी चिंताओं का ख्याल रखा गया है। आईटी मंत्री ने विश्वास दिलाया कि भारत डेटा के मामले में न केवल ताकतवर है, बल्कि अपने डेटा की रक्षा करने में भी पूरी तरह सक्षम है। सरकार ने राहुल गांधी के उन दावों को भी गुमराह करने वाला बताया जिसमें उन्होंने अमेरिकी नियंत्रण की बात कही थी।
इस पूरे घटनाक्रम ने डेटा और तकनीक को राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीति के सबसे बड़े मुद्दे के रूप में स्थापित कर दिया है। जहां राहुल गांधी इसे भविष्य के अस्तित्व की लड़ाई और संप्रभुता का मुद्दा बता रहे हैं, वहीं सरकार इसे विकास की नई ऊंचाइयों को छूने की प्रक्रिया मान रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है क्योंकि दोनों ही पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी में हैं। फिलहाल, डेटा की इस राजनीति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि सर्वरों और कोडिंग की दुनिया में भी लड़े जाएंगे।