राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव की तैयारी में केंद्र: किरेन रिजिजू का अल्टीमेटम—’शाम 5 बजे तक मांगें माफी या कार्रवाई झेलें’
नई दिल्ली: संसद के भीतर छिड़ी सियासी जंग अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने, गलतबयानी करने और निराधार आरोप लगाने का तीखा हमला बोला है। रिजिजू ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि राहुल गांधी अपने बयानों के लिए माफी नहीं मांगते हैं, तो सरकार उनके विरुद्ध विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार का तर्क है कि सदन की गरिमा को राजनीतिक नाटकीयता की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता और हर आरोप के लिए ठोस प्रमाण अनिवार्य हैं।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि नेता विपक्ष जैसे जिम्मेदार संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति से यह अपेक्षित है कि वे सदन की मर्यादा का पालन करें। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने आज सदन में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया और बिना किसी आधार के गंभीर आरोप लगाए। रिजिजू ने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी को आज शाम 5 बजे तक का समय दिया है कि वे अपने बयानों पर खेद प्रकट करें और माफी मांगें। यदि ऐसा नहीं होता है, तो संसदीय नियमों के तहत सरकार उनके खिलाफ औपचारिक कार्रवाई शुरू करेगी।
रिजिजू ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए विस्तार से समझाया कि लोकसभा और राज्यसभा में कार्यवाही के संचालन के लिए बहुत स्पष्ट आचरण नियमावली निर्धारित है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सदस्य किसी दूसरे सदस्य या सरकार पर कोई गंभीर आरोप लगाना चाहता है, तो उसे हवा में बातें करने के बजाय पहले विधिवत नोटिस देना होता है। नियमों के मुताबिक, किसी भी आरोप को लगाने से पहले एक ठोस प्रस्ताव और उससे जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत करना अनिवार्य है। बिना पूर्व सूचना और बिना किसी पुख्ता प्रमाण के आरोप लगाना न केवल संसदीय परंपराओं का अपमान है, बल्कि यह सदन के समय और गरिमा की भी बर्बादी है।
केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि सदन की कार्यवाही के दौरान उन्होंने स्वयं राहुल गांधी से व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया था कि वे जिन मुद्दों को उठा रहे हैं, उनके समर्थन में प्रामाणिक दस्तावेज सदन की मेज पर रखें। रिजिजू ने तंज कसते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को आरोप लगाने और सरकार की आलोचना करने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता जवाबदेही और स्थापित प्रक्रियाओं के साथ आती है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार अब इस मामले को ढीला नहीं छोड़ेगी और स्पीकर को पहला नोटिस सौंपने की तैयारी की जा रही है। रिजिजू का दावा है कि हालांकि राहुल गांधी ने अपने बयानों को प्रमाणित करने का आश्वासन दिया है, लेकिन वे ऐसा कभी नहीं कर पाएंगे क्योंकि उनके द्वारा कही गई बातें तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत हैं।
इस मुद्दे पर सरकार की ओर से हमला केवल किरेन रिजिजू तक ही सीमित नहीं रहा। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें संसदीय मर्यादाओं का पाठ पढ़ाया। जोशी ने कहा कि अब वह समय आ गया है जब नेता विपक्ष को संसद की परंपराओं को गंभीरता से समझना चाहिए। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि संसद कोई ऐसी जगह नहीं है जहां कोई भी व्यक्ति आए और बिना किसी जिम्मेदारी के निराधार दावे करके चला जाए। जोशी के अनुसार, सदन के भीतर बोले गए हर शब्द का अपना एक संवैधानिक महत्व होता है और उसे रिकॉर्ड पर रखने से पहले तथ्यों की कसौटी पर परखा जाना चाहिए।
प्रह्लाद जोशी ने राहुल गांधी को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें साहस है, तो वे अपने आरोपों से जुड़े दस्तावेज सदन की मेज पर रखें और उन पर अपने हस्ताक्षर करें। उन्होंने कहा कि राजनीति में केवल बार-बार झूठ बोलने या निराधार बातों को दोहराने से कोई चीज सच नहीं हो जाती। हर सदस्य को अपने शब्दों की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। जोशी ने राहुल गांधी के उस व्यवहार की भी कड़ी निंदा की जिसमें उन्होंने कथित तौर पर ‘चेयर’ यानी पीठासीन अधिकारी के प्रति अनादर प्रदर्शित किया था। राहुल गांधी द्वारा चेयर को ‘पूर्व कांग्रेस व्यक्ति’ कहे जाने पर प्रह्लाद जोशी ने इसे सीधे तौर पर संसदीय पीठ पर हमला बताया। उन्होंने नसीहत दी कि चेयर पर बैठा व्यक्ति किसी दल का नहीं होता, वह सदन की सर्वोच्च गरिमा का प्रतीक होता है और उसका सम्मान करना हर सदस्य का अनिवार्य कर्तव्य है।
केंद्रीय मंत्रियों ने एक सुर में कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए संसद की गरिमा से समझौता करना गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार की पराकाष्ठा है। सरकार ने अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए बताया है कि राहुल गांधी के बयानों का दो स्तरों पर जवाब दिया जाएगा। सदन के बाहर भाजपा और सरकार के मंत्री राजनीतिक रूप से इन आरोपों का खंडन करेंगे और जनता को सच्चाई बताएंगे, जबकि सदन के भीतर पूरी तरह से नियमों का पालन करते हुए विशेषाधिकार हनन के माध्यम से विधायी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस घटनाक्रम ने संसद के वर्तमान सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की खाई को और चौड़ा कर दिया है। जहां विपक्ष इसे सरकार द्वारा आवाज दबाने की कोशिश बता रहा है, वहीं सरकार का रुख अडिग है कि बिना साक्ष्य के लगाए गए आरोपों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या राहुल गांधी माफी मांगकर इस विवाद को विराम देंगे या संसद में विशेषाधिकार हनन के नोटिस के साथ एक नया संवैधानिक और राजनीतिक संग्राम शुरू होगा। फिलहाल, राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि सरकार इस बार नियमों के उल्लंघन पर बेहद सख्त रुख अपनाने के मूड में है।