नक्सलवाद से विकासवाद की ओर बढ़ता बस्तर: ‘बस्तर पंडुम’ के सांस्कृतिक वैभव की प्रधानमंत्री मोदी ने की सराहना, गृह मंत्री बोले- अब वैश्विक पहचान पा रही जनजातीय विरासत
रायपुर/नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग, जो कभी दशकों तक माओवादी हिंसा, आईईडी धमाकों और पिछड़ेपन की खबरों के लिए सुर्खियों में रहता था, अब अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के कारण दुनिया भर में नई पहचान बना रहा है। बस्तर में आए इस बड़े बदलाव की गूंज अब देश की राजधानी तक सुनाई दे रही है। हाल ही में 7 से 9 फरवरी के बीच आयोजित हुए ‘बस्तर पंडुम’ कार्यक्रम ने इस परिवर्तन को एक नई ऊंचाई दी है। इस गरिमामयी आयोजन की सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जाहिर की है, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे बस्तर के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ करार दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर बस्तर पंडुम की भव्यता और वहां की जनजातीय विरासत की सराहना करते हुए एक विशेष संदेश साझा किया। प्रधानमंत्री ने लिखा कि 7 से 9 फरवरी के बीच छत्तीसगढ़ में आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ का उत्सव बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जनजातीय विरासत का एक भव्य रूप था। उन्होंने इस प्रयास से जुड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में मदद करते हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर के बदलते स्वरूप पर जोर देते हुए कहा कि एक समय था जब बस्तर का नाम आते ही मन में केवल माओवाद, हिंसा और विकास की कमी की छवि उभरती थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, आज का बस्तर न केवल विकास की दौड़ में आगे बढ़ रहा है, बल्कि वहां के स्थानीय निवासियों के आत्मविश्वास में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कामना की कि बस्तर का आने वाला भविष्य शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव की भावना से परिपूर्ण रहे।
इस तीन दिवसीय आयोजन के समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं शिरकत की और बस्तर की कला-संस्कृति का अवलोकन किया। जगदलपुर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री ने जनजातीय भाई-बहनों से सीधा संवाद किया और उत्कृष्ट कार्य करने वालों को पुरस्कृत भी किया। अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि नक्सलियों ने जिस बस्तर को सदियों तक आईईडी और बारूदों के अंधकार में झोंक रखा था, वह अब मोदी सरकार के नेतृत्व में अपनी कला, खान-पान और विरासत के जरिए वैश्विक पहचान पा रहा है।
गृह मंत्री ने बस्तर के इस बदलाव को ‘विकसित भारत के ब्रांड एंबेसडर’ के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद के डर और हिंसा के साये से बाहर निकलकर आज बस्तर अपनी असली धरोहरों को दुनिया के सामने रख रहा है। उन्होंने ‘बस्तर पंडुम’ प्रदर्शनी का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे एक स्पष्ट नीति और नेक नीयत वाली सरकार असंभव लगने वाले कार्यों को भी संभव बना सकती है। उनके अनुसार, बस्तर में उमड़ा यह जनसैलाब और हंसता-खेलता वातावरण इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि क्षेत्र अब नक्सलवाद के काले साये को पीछे छोड़कर विकासवाद की यात्रा पर निकल पड़ा है।
‘बस्तर पंडुम’ केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर के लोगों के लिए अपनी जड़ों की ओर लौटने और अपनी पहचान को गर्व से प्रदर्शित करने का एक मंच बन गया है। इस उत्सव के दौरान बस्तर के विभिन्न अंचलों के जनजातीय समूहों ने अपने पारंपरिक लोक नृत्य, संगीत और रीति-रिवाजों का प्रदर्शन किया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रदर्शनी में बस्तर की प्रसिद्ध ढोकरा आर्ट, लकड़ी की नक्काशी और स्थानीय औषधियों के साथ-साथ बस्तरिया खान-पान को भी प्रमुखता दी गई, जिसे अब सरकार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजनों से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे। सरकार की मजबूत नीति के कारण अब बस्तर के अंदरूनी इलाकों में भी सड़कों, स्कूलों और बिजली का जाल बिछ रहा है, जिससे नक्सलियों का आधार कमजोर हुआ है और आम जनता मुख्यधारा से जुड़ रही है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के संदेशों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बस्तर को पूरी तरह से हिंसा मुक्त और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए संकल्पित हैं।