बरेली में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा मुक्त: प्रशासन ने पिपरिया गांव में बुलडोजर चलाकर ढहाई मस्जिद, 18 साल बाद आया अंतिम फैसला
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में अवैध निर्माण और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत शनिवार को एक बड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई। बरेली सदर तहसील की टीम ने भोजीपुरा क्षेत्र के पिपरिया गांव में सरकारी बंजर भूमि पर अवैध रूप से निर्मित एक मस्जिद को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया। इस दौरान गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी (PAC) के जवानों को तैनात किया गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन और लंबी कानूनी प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद ही की गई है।
सदर एसडीएम प्रमोद कुमार ने इस पूरे अभियान का नेतृत्व किया। उन्होंने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह मस्जिद राजस्व अभिलेखों के अनुसार गाटा संख्या 1474 पर स्थित थी, जो श्रेणी-5 की सरकारी बंजर भूमि के रूप में दर्ज है। सरकारी दस्तावेजों में सुरक्षित इस भूमि पर वर्षों पहले अवैध रूप से निर्माण कर कब्जा जमा लिया गया था। प्रशासन ने साफ तौर पर कहा कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी प्रकार का धार्मिक या निजी ढांचा बनाना कानूनन अपराध है और इसी के तहत ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई की गई है।
इस विवाद का इतिहास काफी पुराना है। एसडीएम प्रमोद कुमार के मुताबिक, सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराने की यह कानूनी जंग साल 2008 में शुरू हुई थी। लगभग 18 वर्षों तक चले इस लंबे अदालती संघर्ष में कई मोड़ आए। सबसे पहले तहसीलदार कोर्ट ने इस निर्माण को अवैध करार देते हुए बेदखली के आदेश पारित किए थे। हालांकि, निर्माण करने वाले पक्ष ने इस फैसले को चुनौती दी और राहत पाने के लिए सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वर्षों तक चली सुनवाई के बाद सिविल कोर्ट ने भी दूसरे पक्ष की दलीलों को खारिज कर दिया और उनके मुकदमे को आधारहीन माना। अदालती बाधाएं पूरी तरह दूर होने के बाद प्रशासन ने शनिवार को कार्रवाई का दिन तय किया।
शनिवार सुबह करीब 12 बजे जब राजस्व टीम बुलडोजर के साथ गांव पहुंची, तो वहां हड़कंप मच गया। मस्जिद का ढांचा करीब 300 वर्गगज में फैला हुआ था और उस पर टीन शेड डाला गया था। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच बुलडोजर ने अपना काम शुरू किया और देखते ही देखते मात्र एक घंटे के भीतर पूरा अवैध निर्माण मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। प्रशासन की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि बेदखली की प्रक्रिया के तहत कब्जा करने वाले पक्ष पर जो आर्थिक जुर्माना लगाया गया था, उसे संबंधित पक्ष द्वारा पहले ही सरकारी खजाने में जमा करा दिया गया था।
ध्वस्तीकरण के बाद प्रशासन ने मलबे को वहां छोड़ने के बजाय तुरंत हटाने का काम शुरू किया। बुलडोजर की मदद से मलबे को ट्रालियों में भरा गया और जमीन को पूरी तरह समतल कर सरकारी कब्जे में ले लिया गया। इस दौरान मौके पर मौजूद अधिकारियों ने गांव वालों को भी हिदायत दी कि भविष्य में किसी भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण न किया जाए। कार्रवाई के दौरान भोजीपुरा समेत कई थानों की फोर्स तैनात रही ताकि किसी भी प्रकार के विरोध या हंगामे की स्थिति को टाला जा सके।
प्रशासन की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह निर्माण कितना ही पुराना क्यों न हो। 18 साल लंबी चली इस कानूनी लड़ाई का अंत अब सरकारी जमीन की बहाली के साथ हुआ है।