• February 11, 2026

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 का शंखनाद: मायावती ने लखनऊ में भरी हुंकार, सत्ता पक्ष और विपक्ष के ‘घटिया ड्रामे’ पर साधा निशाना

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने वर्ष 2027 में होने वाले प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अभी से कमर कस ली है। शनिवार को राजधानी लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में मायावती ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें पार्टी के राज्य और जिला स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने शिरकत की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन को धरातल पर मजबूत करना और विरोधियों द्वारा चलाए जा रहे दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना था। मायावती ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि बसपा अपने पुराने वैभव को प्राप्त करने के लिए पूरी शक्ति के साथ जनता के बीच जाए।

बैठक को संबोधित करते हुए मायावती ने सांगठनिक कार्यों में आ रही बाधाओं और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले कुछ समय में एसआईआर (SIR) की तकनीकी जटिलताओं और अन्य प्रशासनिक कारणों से पार्टी के कुछ जमीनी कार्य प्रभावित हुए हैं। उन्होंने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि अब उन रुके हुए कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। मायावती ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को सचेत करते हुए कहा कि विपक्षी दल बीएसपी को कमजोर करने के लिए निरंतर नए-नए षड्यंत्र रच रहे हैं। उन्होंने आगाह किया कि विरोधियों के जाल में फंसने के बजाय कार्यकर्ताओं को अपनी विचारधारा और नीतियों पर अडिग रहकर जनता तक पहुंच बनानी होगी।

बसपा प्रमुख ने केंद्र और राज्य की वर्तमान व पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला बोलते हुए कहा कि देश में गरीबों, दलितों, शोषितों, वंचितों के साथ-साथ मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यकों की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है। उन्होंने कहा कि केवल शोषित वर्ग ही नहीं, बल्कि व्यापारी और किसान भी वर्तमान व्यवस्था में खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। मायावती के अनुसार, केंद्र और राज्यों की अधिकांश सरकारें जनहित के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय जाति और धर्म की आड़ में अपनी राजनीति चमकाने में व्यस्त हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि धर्म और जाति के नाम पर समाज में जो नफरत की भावना पैदा की जा रही है, वह देश हित में कतई नहीं है और इससे सामाजिक ताना-बाना बिखर रहा है।

संसद के वर्तमान सत्र को लेकर भी मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि संसद में जनता के हित के मुद्दों पर चर्चा होने के बजाय एक-दूसरे को नीचा दिखाने का “घटिया ड्रामा” चल रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि सत्ता पक्ष और प्रमुख विपक्षी दल दोनों ही भारतीय संविधान की गरिमा को भूल चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सांसदों को नियमों का पालन करना चाहिए और जनता के पैसे व समय की बर्बादी रोकने के लिए सार्थक चर्चा करनी चाहिए।

मायावती ने विशेष रूप से टैरिफ और हाल ही में चर्चा में आए व्यापारिक समझौतों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे हैं जिन पर संसद में स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए थी। लेकिन पक्ष और विपक्ष की आपसी लड़ाई और वर्चस्व के खेल के कारण इन सभी बुनियादी मुद्दों को दरकिनार कर दिया गया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे जनता को बताएं कि केवल बहुजन समाज पार्टी ही एक ऐसी शक्ति है जो वास्तव में संविधान की भावना के अनुरूप समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की बात करती है।

बैठक के समापन पर मायावती ने चुनावी मोड में आने का संकेत देते हुए कहा कि 2027 की लड़ाई केवल सत्ता की नहीं, बल्कि बहुजन समाज के आत्मसम्मान की लड़ाई है। उन्होंने पदाधिकारियों को गांव-गांव जाकर कैडर कैंप लगाने और नए युवाओं को पार्टी से जोड़ने का लक्ष्य दिया। लखनऊ की इस बैठक ने यह साफ कर दिया है कि आगामी विधानसभा चुनावों में बसपा पूरी तैयारी के साथ उतरने वाली है और उसका मुख्य एजेंडा सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दों को केंद्र में रखना होगा।

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