• February 11, 2026

असम चुनाव से पहले कांग्रेस में मची रार: संयुक्त सचिव पंकज सैकिया को ‘कारण बताओ’ नोटिस, भूपेन बोरा पर टिप्पणी का मामला गरमाया

गुवाहाटी: असम में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है, लेकिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के भीतर की अंदरूनी कलह भी अब सतह पर आने लगी है। चुनावी रणभेरी बजने से ठीक पहले पार्टी के भीतर अनुशासन और बयानबाजी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) ने अपने संयुक्त सचिव पंकज सैकिया को एक सख्त ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के खिलाफ की गई कथित अनुचित टिप्पणियों के बाद की गई है। पार्टी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सैकिया से महज 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है, जिससे पार्टी के भीतर मचे घमासान का अंदाजा लगाया जा सकता है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब मीडिया में पंकज सैकिया के कुछ ऐसे बयान सामने आए, जिन्हें भूपेन कुमार बोरा की छवि और पार्टी की एकता के खिलाफ माना गया। इन टिप्पणियों ने न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम पैदा किया, बल्कि वरिष्ठ नेतृत्व को भी असहज स्थिति में डाल दिया। मामला तब और गंभीर हो गया जब प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के संज्ञान में यह बात आई कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे पदाधिकारी द्वारा सार्वजनिक मंच पर पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ टिप्पणी की गई है। इसके तुरंत बाद अनुशासन का हवाला देते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव (संगठन) बिपुल गोगोई द्वारा गुरुवार को जारी किए गए इस नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि पंकज सैकिया का व्यवहार पार्टी के अनुशासन का उल्लंघन है। शुक्रवार को मीडिया के साथ साझा किए गए इस आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि असम पीसीसी के अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई के संज्ञान में यह बात आई है कि पंकज सैकिया ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा से संबंधित मामलों पर मीडिया में ऐसी बातें कहीं जो पद की गरिमा के अनुरूप नहीं थीं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चुनाव के ऐन पहले इस तरह की बयानबाजी से न केवल विपक्ष को मौका मिलता है, बल्कि मतदाताओं के बीच भी गलत संदेश जाता है।

नोटिस की भाषा बेहद सख्त है, जिसमें सैकिया से यह पूछा गया है कि पार्टी अनुशासन के इस गंभीर उल्लंघन के लिए उनके खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए। पार्टी ने उन्हें बचाव का बहुत कम समय देते हुए केवल 24 घंटे की मोहलत दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गौरव गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि चुनाव के समय किसी भी तरह की गुटबाजी या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भूपेन कुमार बोरा, जो वर्तमान में अभियान समिति के अध्यक्ष के रूप में पार्टी की चुनावी रणनीति की कमान संभाल रहे हैं, असम कांग्रेस के एक कद्दावर नेता माने जाते हैं। उनके खिलाफ की गई किसी भी टिप्पणी को सीधे नेतृत्व को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है।

असम में आगामी विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए अस्तित्व की लड़ाई की तरह हैं, जहां वह सत्ताधारी भाजपा को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रही है। पिछले कुछ महीनों में कांग्रेस ने ‘यूनाइटेड अपोजिशन फोरम’ के जरिए विपक्षी एकता को मजबूत करने की कोशिश की थी, जिसकी कमान काफी समय तक भूपेन बोरा के हाथों में रही। हालांकि, पार्टी के भीतर अब भी कुछ पुराने और नए चेहरों के बीच खींचतान की खबरें आती रही हैं। पंकज सैकिया को दिया गया यह नोटिस इसी आंतरिक कलह का एक बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।

कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच इस कार्रवाई को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ का मानना है कि चुनाव के समय ऐसे कड़े फैसले पार्टी को एकजुट रखने के लिए जरूरी हैं, वहीं कुछ इसे अभिव्यक्ति को दबाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर पार्टी का रुख स्पष्ट है कि मीडिया के सामने जाकर पार्टी के ही वरिष्ठ नेताओं की आलोचना करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। बिपुल गोगोई ने नोटिस में इस बात पर जोर दिया है कि पार्टी इस मामले में किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है और स्पष्टीकरण संतोषजनक न होने पर पंकज सैकिया को पद से हटाने या प्राथमिक सदस्यता निलंबित करने जैसे कड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं।

इस पूरे प्रकरण ने असम की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। भाजपा और अन्य विरोधी दल कांग्रेस की इस अंदरूनी फूट को लेकर तंज कस रहे हैं, जबकि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व डैमेज कंट्रोल में जुटा है। भूपेन कुमार बोरा ने फिलहाल इस मुद्दे पर सीधे तौर पर मीडिया से कोई विस्तृत बात नहीं की है, लेकिन उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वह पार्टी की गरिमा बनाए रखने के पक्ष में हैं। अब सबकी नजरें पंकज सैकिया के जवाब पर टिकी हैं। यदि वे 24 घंटे के भीतर अपना पक्ष रखने में विफल रहते हैं या उनका स्पष्टीकरण पार्टी को संतुष्ट नहीं कर पाता है, तो असम कांग्रेस में बड़ी संगठनात्मक कार्रवाई तय मानी जा रही है। चुनावी साल में इस तरह के विवाद कांग्रेस के ‘मिशन असम’ के लिए कितनी बड़ी बाधा साबित होंगे, यह आने वाला समय ही बताएगा।

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