मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ पर मचा बवाल: टाइटल को लेकर बढ़ा विवाद, नीरज पांडे और अभिनेता ने दी सफाई, हटाई गई प्रमोशनल सामग्री
मुंबई: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता मनोज बाजपेयी और मशहूर निर्देशक-निर्माता नीरज पांडे की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ अपनी घोषणा के साथ ही विवादों के घेरे में आ गई है। फिल्म के टाइटल को लेकर शुरू हुआ विरोध अब इस कदर बढ़ गया है कि मेकर्स को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है। देश के विभिन्न हिस्सों में फिल्म के नाम के खिलाफ प्रदर्शनों और फिल्म निर्माता संघ (FMC) द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस के बाद, मनोज बाजपेयी और नीरज पांडे ने आधिकारिक बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। इस विवाद के बीच निर्माताओं ने एक बड़ा कदम उठाते हुए फिल्म की तमाम प्रमोशनल सामग्री को फिलहाल सार्वजनिक मंचों से हटाने का निर्णय लिया है ताकि जनता की भावनाओं का सम्मान किया जा सके।
इस विवाद की जड़ फिल्म के शीर्षक में इस्तेमाल किए गए शब्द ‘पंडित’ को लेकर है। जैसे ही फिल्म का पोस्टर और नाम सामने आया, सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक विरोध की लहर दौड़ गई। ब्राह्मण समुदाय के कई संगठनों ने इसे समुदाय का अपमान बताया और आरोप लगाया कि फिल्म के जरिए एक विशिष्ट वर्ग की छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। विरोध का स्वर इतना तीखा था कि फिल्म निर्माता संघ ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया। एफएमसी ने मेकर्स को एक कड़ा नोटिस भेजा, जिसमें यह खुलासा किया गया कि फिल्म के शीर्षक के लिए अनिवार्य आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी। नोटिस के अनुसार, नीरज पांडे इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के सदस्य हैं, लेकिन उन्होंने ‘घूसखोर पंडित’ नाम के उपयोग के लिए आवेदन नहीं किया था। नियमतः बिना अनुमति के शीर्षक का प्रचार करना अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार बन सकता है।
लगातार बढ़ते दबाव और सार्वजनिक आक्रोश के बीच, अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए जनता की भावनाओं के प्रति अपनी संवेदनशीलता व्यक्त की। मनोज बाजपेयी ने कहा कि वह लोगों द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं का पूरा सम्मान करते हैं और उन्हें गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने अपने बयान में स्पष्ट किया कि जब कोई ऐसी बात सामने आती है जिससे लोगों को ठेस पहुंचती है, तो एक कलाकार के रूप में यह उनकी जिम्मेदारी है कि वह रुकें और लोगों की बात सुनें। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक अभिनेता के तौर पर वह किसी भी प्रोजेक्ट से केवल उसके पात्र और कहानी की गहराई के कारण जुड़ते हैं। उनके लिए यह फिल्म एक ऐसे व्यक्ति की कहानी थी जो गलत रास्ते पर है और अंततः उसे अपनी गलतियों का एहसास होता है। यह एक आत्म-साक्षात्कार की यात्रा है, न कि किसी समुदाय पर टिप्पणी।
मनोज बाजपेयी ने नीरज पांडे का बचाव करते हुए कहा कि उनके साथ काम करने का अनुभव हमेशा से यह रहा है कि वह अपनी फिल्मों के प्रति बेहद सतर्क और जिम्मेदार रहते हैं। अभिनेता ने कहा कि जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ही निर्माताओं ने फिलहाल प्रचार सामग्री हटाने का फैसला किया है, जो यह दर्शाता है कि टीम किसी भी विवाद को बढ़ाना नहीं चाहती और दर्शकों के सुझावों का सम्मान करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म का उद्देश्य समाज के किसी भी वर्ग को नीचा दिखाना या उनकी आस्था को चोट पहुंचाना कभी नहीं था।
फिल्म के निर्माता नीरज पांडे ने भी इंस्टाग्राम पर एक लंबा स्पष्टीकरण जारी किया है ताकि फिल्म के पीछे के वास्तविक इरादे को स्पष्ट किया जा सके। पांडे ने फिल्म की कहानी को एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा करार दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग फिल्म में केवल एक पात्र के बोलचाल के नाम के रूप में किया गया है, जो पूरी तरह से काल्पनिक है। उनके अनुसार, कहानी का केंद्र बिंदु एक व्यक्ति के व्यक्तिगत कर्म, उसके चुनाव और उसके जीवन के संघर्ष हैं। यह फिल्म किसी भी जाति, धर्म या समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करती है और न ही किसी पर कटाक्ष करती है। एक फिल्म निर्माता के रूप में वह हमेशा अपनी जिम्मेदारी समझते हैं और उनका प्रयास ऐसी कहानियां पेश करना होता है जो न केवल मनोरंजक हों बल्कि सम्मानजनक भी हों।
नीरज पांडे ने आगे भावुक होते हुए कहा कि उनकी पिछली सभी फिल्मों की तरह इस फिल्म को भी पूरी ईमानदारी के साथ बनाया गया है। उनका एकमात्र लक्ष्य दर्शकों का मनोरंजन करना है। उन्होंने स्वीकार किया कि फिल्म के शीर्षक से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, जिसके लिए वह संवेदनशील हैं। उन्होंने घोषणा की कि विवादित प्रतिक्रियाओं को देखते हुए फिल्म की सभी प्रमोशनल सामग्री को हटा लिया गया है। उनका मानना है कि किसी भी कलाकृति को उसकी पूरी कहानी के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि केवल एक शीर्षक या छोटे से अंश के आधार पर। उन्होंने उम्मीद जताई कि जब फिल्म रिलीज होगी, तो दर्शक इसके पीछे के सही संदेश को समझ पाएंगे।
रितेश शाह द्वारा निर्देशित और नीरज पांडे द्वारा निर्मित इस फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म में मनोज के साथ नुसरत भरूचा, कीकू शारदा, दिव्या दत्ता, साकिब सलीम, श्रद्धा दास और अक्षय ओबेरॉय जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म की कहानी एक रिश्वतखोर पुलिसवाले के इर्द-गिर्द घूमती है, जो व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाता है, लेकिन बाद में उसे अपनी नैतिकता का बोध होता है। हालांकि, फिल्म के कंटेंट से ज्यादा इसके नाम ने वर्तमान में एक बड़ी बहस छेड़ दी है। फिलहाल मेकर्स विवाद को शांत करने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या शीर्षक में बदलाव किया जाएगा या फिल्म को नए नाम के साथ पेश किया जाएगा। फिल्म जगत में इस मामले ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की आजादी और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच के संतुलन पर चर्चा शुरू कर दी है।