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केजीएमयू लखनऊ में अवैध मजार विवाद: 6 फरवरी तक जवाब नहीं तो ध्वस्तीकरण शुरू, राजनीति गरमाई

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) कैंपस में बनी को लेकर विवाद तेज हो गया है। प्रशासन ने कैंपस में मौजूद अवैध मजारों पर नोटिस चस्पा किए हैं, जिसमें 15 दिनों की मोहलत दी गई थी। अब 6 फरवरी 2026 इस नोटिस का जवाब देने की अंतिम तारीख है। यदि मजार कमेटी या संबंधित पक्ष इस मजारों तारीख तक जवाब नहीं देते या प्रमाण नहीं पेश करते, तो KGMU प्रशासन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर देगा।
KGMU प्रशासन के अनुसार, कैंपस में कुल 8 मजारें मौजूद हैं, जिनमें से 6 मजारों पर नोटिस चस्पा किया गया है। इन मजारों को अवैध निर्माण बताते हुए कहा गया है कि ये विश्वविद्यालय की भूमि पर बिना किसी वैध अनुमति, अदालती आदेश या मंजूरी के बने हैं। विभिन्न विभागों जैसे प्रसूति एवं स्त्री रोग, श्वसन चिकित्सा, ऑर्थोपेडिक्स, नए बॉयज हॉस्टल, ट्रॉमा सेंटर और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पीछे ये संरचनाएं बनी हुई हैं।
प्रशासन ने नोटिस जारी करने से पहले अदालत का रुख किया था और अपने पक्ष में फैसला मिलने के बाद यह कदम उठाया। नोटिस में स्पष्ट निर्देश है कि यदि 15 दिनों में संरचनाएं स्वयं नहीं हटाई गईं, तो प्रशासन पुलिस की मदद से बलपूर्वक ध्वस्त करेगा और कार्रवाई की लागत संबंधित पक्षों से वसूली जाएगी।मजारों की पुरानी होने का दावा कुछ मौलाना और धार्मिक नेता दावा कर रहे हैं कि ये मजारें KGMU के निर्माण से पहले की हैं। मौलाना फिरंगी मेहंदी ने कहा कि ये संरचनाएं पुरानी हैं, जबकि महाराज विष्णु दास ने जवाब में कहा कि यदि इतनी पुरानी हैं तो प्रमाण पेश किए जाएं।
प्रशासन का कहना है कि यदि मजार कमेटी प्रमाण (एविडेंस) के साथ साबित कर दे कि ये KGMU बनने से पहले की हैं, तो कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।राजनीतिक बयानबाजी और विरोध इस मुद्दे पर राजनीति भी गरम है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने KGMU जाकर बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। मौलवी, साधु-संत और विभिन्न राजनीतिक दल के नेता सक्रिय हो गए हैं। मुस्लिम संगठनों ने नोटिस को गैर-कानूनी बताते हुए विरोध जताया है, जबकि प्रशासन इसे अवैध अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया बता रहा है।यह विवाद KGMU कैंपस में अवैध निर्माणों के खिलाफ चल रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है। 6 फरवरी के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि क्या ध्वस्तीकरण शुरू होता है या कोई कानूनी/प्रशासनिक हल निकलता है।

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