• February 10, 2026

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता ऐतिहासिक: संसद में बोले पीयूष गोयल—’कृषि और डेयरी हितों से कोई समझौता नहीं, निर्यातकों को मिलेगी वैश्विक बढ़त’

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर केंद्र सरकार ने संसद में अपना पक्ष मजबूती से रखते हुए इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक “गेमचेंजर” करार दिया है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में इस समझौते का विस्तृत ब्योरा साझा करते हुए स्पष्ट किया कि यह डील न केवल भारतीय निर्यातकों के लिए वैश्विक दरवाजे खोलेगी, बल्कि इसमें देश के संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों के हितों की भी पूरी तरह रक्षा की गई है। सदन में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुआ यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजाइन इन इंडिया’ जैसे विजन को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

पीयूष गोयल ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पूरी तरह से राष्ट्रहित और हमारे निर्यातकों के लाभ को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि बातचीत के दौरान भारत की संवेदनशीलता वाले क्षेत्रों, जैसे कि उर्वरक और कृषि, को लेकर कोई समझौता नहीं किया गया है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि इन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादकों और किसानों के हितों पर कोई आंच न आए। मंत्री के अनुसार, यह समझौता केवल बड़े कॉरपोरेट्स के लिए नहीं है, बल्कि यह देश के छोटे और मध्यम कारोबारियों, एमएसएमई इकाइयों, औद्योगिक घरानों और कुशल श्रमिकों के लिए विकास के अनंत अवसर पैदा करेगा।

इस समझौते की पृष्ठभूमि और इसके त्वरित क्रियान्वयन पर प्रकाश डालते हुए वाणिज्य मंत्री ने एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 2 फरवरी, 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच टेलीफोन पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सार्थक बातचीत हुई थी। इस द्विपक्षीय चर्चा में अंतरराष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों के साथ-साथ व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती देने पर सहमति बनी। इसी बातचीत का सकारात्मक परिणाम रहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा कर दी। गोयल ने इस दर को भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया, क्योंकि यह टैरिफ दर उन कई प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले काफी कम है जो वैश्विक बाजार में भारत के साथ मुकाबला करते हैं। इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में एक मजबूत प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।

सरकार का पक्ष रखते हुए पीयूष गोयल ने ‘मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस समझौते के माध्यम से भारत को उन्नत अमेरिकी तकनीकों तक आसान पहुंच प्राप्त होगी, जिससे हमारे औद्योगिक उत्पादन की गुणवत्ता और क्षमता में सुधार होगा। यह डील न केवल वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देगी, बल्कि नवाचार और डिजाइनिंग के क्षेत्र में भी भारत को एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि जब हम ‘इनोवेट इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ की बात करते हैं, तो ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौते उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मजबूत आधारशिला का काम करते हैं।

सदन में अपने वक्तव्य के दौरान गोयल ने उन आशंकाओं को भी खारिज किया जो कृषि और डेयरी क्षेत्र को लेकर जताई जा रही थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले एक वर्ष से दोनों देशों के वार्ताकारों के बीच विभिन्न स्तरों पर सघन चर्चाएं चल रही थीं। इन वार्ताओं का प्राथमिक उद्देश्य ही यह था कि व्यापारिक लाभ प्राप्त करने की होड़ में हमारे संवेदनशील क्षेत्र प्रभावित न हों। भारतीय वार्ताकारों ने विशेष रूप से डेयरी और कृषि उत्पादों के बाजार को विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षित रखने में सफलता हासिल की है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि पीएम ने हमेशा किसानों और पशुपालकों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए काम किया है और इस ट्रेड डील में भी उनके हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

इससे पूर्व एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी पीयूष गोयल ने इस डील को लेकर उत्साह जताया था। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की व्यक्तिगत मित्रता ने इस जटिल व्यापारिक वार्ता को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि भारत को जो ‘डील’ मिली है, वह हमारे पड़ोसी देशों और उन सभी देशों की तुलना में कहीं बेहतर है जो वैश्विक व्यापार में भारत के प्रतिस्पर्धी हैं। यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक अत्यंत शुभ संकेत है, जो आने वाले वर्षों में रोजगार सृजन और जीडीपी विकास दर में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

विपक्ष के लगातार शोर-शराबे और विरोध के बीच पीयूष गोयल ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि सरकार ने हमेशा राष्ट्रीय हितों को राजनीति से ऊपर रखा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता एक विकसित भारत की ओर बढ़ते कदमों का प्रमाण है। इस व्यापारिक संधि से न केवल भारत का निर्यात बढ़ेगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी भी अधिक विश्वसनीय और सुदृढ़ होगी। भारत अब दुनिया के सामने केवल एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक विनिर्माण और नवाचार महाशक्ति के रूप में अपनी धाक जमाने के लिए तैयार है।

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