77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर दिखी भारत की सैन्य ताकत और सांस्कृतिक वैभव: ऑपरेशन सिंदूर का श्रद्धांजलि, ब्रह्मोस-राफेल का प्रदर्शन
नई दिल्ली: 26 जनवरी 2026 को भारत ने अपने 77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर भव्य परेड के माध्यम से नई ताकत और सांस्कृतिक गौरव का प्रदर्शन किया। इस वर्ष की मुख्य थीम ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर केंद्रित रही, जिसमें ‘स्वतंत्रता का मंत्र-वंदे मातरम्, समृद्धि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत’ को दर्शाया गया। परेड में 30 झांकियां निकलीं, जो विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों द्वारा सांस्कृतिक विविधता, स्वतंत्रता संग्राम और आत्मनिर्भरता की कहानी बयां करती रहीं।
ऑपरेशन सिंदूर का जीवंत प्रदर्शन, पाकिस्तान को दिया साफ संदेश
इस बार की परेड में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का ट्राई-सर्विसेज टेबल्यू प्रस्तुत किया, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी ठिकानों पर सफल हमले की याद ताजा की गई। भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने आसमान में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का झंडा लेकर उड़ान भरी। फ्लाईपास्ट में राफेल, सुखोई, अन्य फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टरों ने शानदार फॉर्मेशन बनाकर करतब दिखाए। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, आकाश मिसाइल सिस्टम, ABHRA (MRSAM) और अन्य हथियारों का प्रदर्शन भी किया गया, जो दुश्मनों के लिए मजबूत चेतावनी का प्रतीक रहा।
अत्याधुनिक हथियारों का शानदार डिस्प्ले: T-90 भीष्म से LR-ASHM तक
भारतीय सेना ने T-90 भीष्म मुख्य युद्धक टैंक, अर्जुन Mk मुख्य युद्धक टैंक, नाग मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) Mk-2, हाई मोबिलिटी रिकॉन्सेंस व्हीकल (HMRV), अजयकेतु ऑल-टेरेन व्हीकल, रंधवज रग्ड टेरेन टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट और ध्वसंक लाइट स्ट्राइक वाहन का प्रदर्शन किया। विशेष बलों की टुकड़ी ने भी अपनी क्षमता दिखाई। डीआरडीओ के टेबल्यू में दिव्यास्त्र, शक्तिबाण, झुंड ड्रोन, टेदर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी ज़ोल्ट UAV का प्रदर्शन हुआ। सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (URLS) और ब्रह्मोस का भी शानदार प्रदर्शन रहा।
हाइपरसोनिक मिसाइल LR-ASHM का पहला प्रदर्शन, भारत एलीट क्लब में शामिल
डीआरडीओ द्वारा विकसित लॉन्ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल (LR-ASHM) का हाइपरसोनिक ग्लाइड वर्जन पहली बार परेड में प्रदर्शित किया गया। यह मिसाइल 1500 किमी तक की रेंज के साथ स्थिर और गतिमान लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है। 10 मैक से शुरू होने वाली इसकी गति औसतन मैक 5.0 बनाए रखती है, जो कम ऊंचाई पर उड़ान भरकर रडार से बच निकलती है। इस प्रदर्शन से भारत हाइपरसोनिक मिसाइल क्षमता वाले चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है।यह परेड न केवल भारत की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन थी, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और राष्ट्रीय एकता का मजबूत संदेश भी देती रही। कर्तव्य पथ पर लाखों दर्शकों ने इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनकर गर्व महसूस किया।