देश में SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बड़े बदलाव: यूपी में 2.89 करोड़ नाम कटे, तमिलनाडु-गुजरात में भी लाखों वोटर्स बाहर
नई दिल्ली: निर्वाचन आयोग द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में चलाए गए Special Intensive Revision (SIR) अभियान के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इस प्रक्रिया में मृतक, फर्जी, डुप्लीकेट और शिफ्टेड/लापता वोटर्स को बड़े पैमाने पर हटाया गया है। आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा प्रभाव उत्तर प्रदेश में पड़ा है, जहां कुल 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर कर दिए गए हैं।
यूपी में सबसे ज्यादा सफाया: 19 प्रतिशत वोटर्स कटे
उत्तर प्रदेश इस सूची में पहले स्थान पर है। पहले राज्य में 15.44 करोड़ मतदाता थे, जो अब घटकर 12.55 करोड़ रह गए हैं। यानी हर 100 में से लगभग 19 वोटर्स का नाम हटा दिया गया। इनमें 46.23 लाख मृतक, 25.47 लाख फर्जी या डुप्लीकेट और 2.17 करोड़ शिफ्टेड या लापता वोटर्स शामिल हैं। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी नाम बिना पूर्व सूचना के नहीं हटाया गया और दावे-आपत्तियां 6 फरवरी 2026 तक दर्ज की जा सकती हैं।
तमिलनाडु और गुजरात में भी बड़ा कटौती
दूसरे नंबर पर तमिलनाडु है, जहां 97 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए हैं। यहां कटौती का प्रतिशत 15.13 रहा, यानी हर 100 में से 15 नाम गायब हो गए। तीसरे स्थान पर गुजरात है, जहां 73.73 लाख नाम हटाए गए और प्रतिशत 14.52 रहा।
छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में 12-8 प्रतिशत कटौती
छत्तीसगढ़ में 27.34 लाख वोटर्स (12.9 प्रतिशत) हटाए गए हैं। पश्चिम बंगाल में 58.20 लाख और राजस्थान में 41.85 लाख मतदाताओं के नाम बाहर किए गए, जहां दोनों राज्यों में औसतन हर 100 में से 8 वोटर्स प्रभावित हुए।
मध्य प्रदेश, केरल और अन्य राज्यों में 7-10 प्रतिशत तक प्रभाव
मध्य प्रदेश में 42.74 लाख वोटर्स (7.44 प्रतिशत) कटे हैं। केरल, गोवा, पुडुचेरी और अंडमान-निकोबार में भी 8 से 10 प्रतिशत तक नाम हटाए गए। सबसे कम प्रभाव लक्षद्वीप में दिखा, जहां केवल 2.79 प्रतिशत (करीब 1.6 हजार) मतदाताओं के नाम कटे।
निर्वाचन आयोग का उद्देश्य: साफ-सुथरी वोटर लिस्ट
यह ड्राफ्ट लिस्ट SIR प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसका मकसद मृतकों, फर्जी और स्थानांतरित वोटर्स को हटाकर मतदाता सूची को शुद्ध करना है। आने वाले चुनावों में इसका राजनीतिक प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है। विपक्ष ने कुछ राज्यों में बड़े पैमाने पर कटौती को ‘जन-अधिकारों पर हमला’ करार दिया है, जबकि आयोग ने कहा है कि असली मतदाताओं को पर्याप्त समय मिलेगा नाम बहाल करने के लिए।अगर आपका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, तो eci.gov.in पर जाकर फॉर्म 6 के माध्यम से दावा दर्ज कर सकते हैं।