• January 31, 2026

बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे: वसंत पंचमी पर गाडू घड़ा पूजन के साथ तिथि घोषित, शुरू हुई चारधाम यात्रा की तैयारियां

उत्तराखंड के चारधामों में प्रमुख बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि आज वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर विधिवत रूप से घोषित कर दी गई। परंपरागत धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार, गाडू घड़ा पूजन और पंचांग गणना के बाद यह घोषणा की गई कि भगवान बदरीविशाल के कपाट 23 अप्रैल को ब्रह्म काल मुहूर्त में सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके साथ ही चारधाम यात्रा 2025 की आध्यात्मिक तैयारियों का औपचारिक शुभारंभ हो गया है।

नरेंद्रनगर राजदरबार में हुई परंपरागत घोषणा

हर वर्ष की तरह इस बार भी बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की घोषणा टिहरी रियासत के नरेंद्रनगर राजदरबार में पारंपरिक विधि से की गई। शुक्रवार को डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के सदस्य और बदरीनाथ धाम के पुजारी पवित्र गाडू घड़ा लेकर नरेंद्रनगर पहुंचे।

यहां राजदरबार में टिहरी के महाराजा मनुजेंद्र शाह ने पंचांग पूजन कर भगवान बदरीविशाल के कपाटोद्घाटन की तिथि की घोषणा की। साथ ही उन्होंने भगवान के महाभिषेक में प्रयुक्त होने वाले तिल के तेल को पिरोने और गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा की तिथि भी घोषित की।

गाडू घड़ा: बदरीनाथ धाम की अनोखी परंपरा

बदरीनाथ धाम से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक गाडू घड़ा यात्रा मानी जाती है। गाडू घड़ा तिल के तेल से भरा वह पवित्र कलश होता है, जिसका उपयोग कपाट खुलने से पहले भगवान बदरीविशाल के महाभिषेक में किया जाता है।

इस वर्ष गाडू घड़ा यात्रा 7 अप्रैल से आरंभ होगी। इससे पहले बृहस्पतिवार को चमोली जिले के डिम्मर गांव स्थित श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई।

डिम्मर गांव से शुरू हुई धार्मिक प्रक्रिया

डिम्मर गांव में गुरुवार सुबह मंदिर के पुजारी टीका प्रसाद डिमरी और अन्य आचार्यों ने भगवान बदरीविशाल और गाडू घड़ा का विष्णु सहस्त्रनाम और नामावलियों से महाभिषेक किया। इसके बाद भगवान को बाल भोग अर्पित किया गया।

पूजन के पश्चात डिमरी गांव के पुजारियों ने गाडू घड़ा लेकर मंदिर की विधिवत परिक्रमा की। फिर “जय बदरीविशाल” के जयकारों के साथ गाडू घड़ा यात्रा ऋषिकेश के लिए रवाना हुई। रात्रि विश्राम ऋषिकेश में किया गया।

वसंत पंचमी पर हुई शुभ घोषणा

वसंत पंचमी के दिन सुबह गाडू घड़ा लेकर डिमरी पुजारी ऋषिकेश से नरेंद्रनगर राजदरबार पहुंचे। यहां पंचांग गणना और वैदिक विधियों के अनुसार यह शुभ तिथि घोषित की गई।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वसंत पंचमी को किया गया यह निर्णय अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इसी दिन से चारधाम यात्रा की तैयारियों को गति मिलती है।

23 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त में खुलेंगे कपाट

घोषणा के अनुसार, 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे ब्रह्म काल मुहूर्त में भगवान बदरीविशाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलने के साथ ही मंदिर में विशेष पूजा, वेदपाठ, शंखनाद और जयकारों के बीच भगवान का भव्य महाभिषेक किया जाएगा।

देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए बदरीनाथ धाम पहुंचते हैं।

अक्षय तृतीया पर खुलेंगे गंगोत्री और यमुनोत्री धाम

चारधाम यात्रा के अंतर्गत गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया के दिन खोले जाते हैं। इस वर्ष अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को पड़ रही है।

परंपरा के अनुसार, इन दोनों धामों के कपाट अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त में खोले जाएंगे। हालांकि मंदिर समिति की मौजूदगी में इनका सटीक मुहूर्त बाद में तय किया जाएगा।

केदारनाथ धाम की तिथि शिवरात्रि को तय होगी

चारधाम यात्रा का एक अन्य प्रमुख धाम केदारनाथ है। केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि हर वर्ष महाशिवरात्रि के दिन ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में पंचांग गणना के बाद तय की जाती है।

मंदिर समिति के अनुसार, शिवरात्रि के दिन विधिवत पूजा के बाद केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित की जाएगी।

चारधाम यात्रा को लेकर प्रशासन अलर्ट

बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित होते ही उत्तराखंड सरकार और प्रशासन ने चारधाम यात्रा की तैयारियों को तेज कर दिया है। सड़कों की मरम्मत, स्वास्थ्य सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं।

हर साल लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा में शामिल होते हैं। ऐसे में प्रशासन भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर विशेष योजना बना रहा है।

श्रद्धालुओं में उत्साह

कपाट खुलने की तिथि की घोषणा के साथ ही देशभर के श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। बदरीनाथ धाम को भगवान विष्णु का प्रमुख धाम माना जाता है और यहां दर्शन को मोक्षदायी माना गया है।

श्रद्धालुओं का मानना है कि कपाटोद्घाटन के दिन भगवान बदरीविशाल के दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

आध्यात्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

चारधाम यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे उत्तराखंड के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा सहारा मिलता है। होटल, परिवहन, स्थानीय व्यवसाय और रोजगार के अवसर चारधाम यात्रा के दौरान तेजी से बढ़ते हैं।

सरकार का प्रयास है कि इस वर्ष यात्रा को और अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाया जाए।

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