महायुति के घोषणापत्र में महिलाओं पर जोर, जानिए देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और मिलिंद देवरा ने क्या कहा?
महाराष्ट्र निकाय चुनाव 2026 को लेकर महायुति ने अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और राज्यसभा सांसद मिलिंद देवरा ने संयुक्त रूप से घोषणापत्र पेश करते हुए महाराष्ट्र और खासकर मुंबई के मतदाताओं से कई बड़े वादे किए। घोषणापत्र में महिलाओं, शहरी विकास, परिवहन, आवास, पर्यावरण और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मुंबई की ‘लाडली बहनों’ को बिना ब्याज के 5 लाख रुपये तक का कर्ज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि बिल्डिंग प्लान अप्रूवल की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भारी बारिश के बावजूद मुंबई ठप नहीं हुई और भविष्य में भी शहर को सुचारू बनाए रखने के लिए व्यापक योजना तैयार की जा रही है। चिराग नगर में लोकशाहीर अन्ना भाऊ साठे स्मारक के निर्माण का कार्य भी जारी है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि उनका घोषणा पत्र “घोटालानामा” है, जबकि महायुति का घोषणा पत्र “विकासनामा” है। उन्होंने कहा कि बीएमसी की फिक्स्ड डिपॉजिट 84 हजार करोड़ रुपये से अधिक है, जो इस बात का प्रमाण है कि बड़े खर्चों के बावजूद आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि मुंबई को बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों से मुक्त किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में लोगों को पहले ही डिपोर्ट किया जा चुका है। इसके लिए एक एआई आधारित टूल तैयार किया जा रहा है, जिससे अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान की जा सकेगी। डिटेंशन सेंटर के लिए जमीन उपलब्ध करा ली गई है और उस पर काम भी शुरू हो चुका है।
लाडली बहन योजना को लेकर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह एक जारी रहने वाली योजना है और इसे बंद नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहे जितना विरोध करे, सरकार इस योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता देती रहेगी। फडणवीस ने कहा कि महायुति अपने वचन पत्र में किए गए वादों को पूरा करने का रिकॉर्ड रखती है और पांच साल बाद जनता के सामने पूरे कामकाज का लेखा-जोखा रखती है।
उन्होंने यह भी कहा कि मुंबईकरों को अपने शहर से बाहर जाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। धारावी के पुनर्विकास को लेकर उन्होंने कहा कि यह परियोजना धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत की जा रही है, जिसमें सरकार और विकासक दोनों की भागीदारी है। पात्र लोगों को धारावी में ही घर उपलब्ध कराए जाएंगे।
पर्यावरण और सफाई को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि बीएमसी के सफाई कर्मियों को मुंबई में उनके हक का घर दिया जाएगा। बीएमसी स्कूलों में मराठी भाषा को बेहतर ढंग से सिखाने की कोशिश की जाएगी और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करते हुए अस्पतालों में 2,000 नए बेड जोड़े जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुंबई के समंदर में गंदा पानी न जाए, इसके लिए नदियों के शुद्धिकरण की योजना तैयार की गई है। शहर के सभी डंपिंग ग्राउंड्स को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा और मुंबई के लिए 17 हजार करोड़ रुपये का क्लाइमेट एक्शन प्लान लागू किया जा रहा है।
परिवहन व्यवस्था को लेकर फडणवीस ने कहा कि दिल्ली के बाद सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क अब मुंबई में है। जहां दिल्ली को यह नेटवर्क तैयार करने में 20 साल लगे, वहीं मुंबई में यह काम 6 साल में किया गया। उन्होंने कहा कि बेस्ट के पास फिलहाल 5,000 बसें हैं, जबकि मुंबई को 10 से 12 हजार बसों की जरूरत है। इसके लिए नई इलेक्ट्रिक बसों के कॉन्ट्रैक्ट दिए गए हैं। सड़क विस्तार, ईस्टर्न एक्सप्रेस वे का ठाणे तक विस्तार और शिवडी-वर्ली ब्रिज का निर्माण इसी वर्ष पूरा किया जाएगा। मुंबई को गड्ढा मुक्त बनाने की योजना के तहत पहला चरण अंतिम दौर में है और दूसरे चरण का काम शुरू हो चुका है।
राज्यसभा सांसद मिलिंद देवरा ने कहा कि महायुति ने एक यथार्थवादी घोषणापत्र जारी किया है, जिसे आम मुंबईकरों से संवाद के बाद तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि मुंबई में तैयार किया गया मेट्रो नेटवर्क लंदन, न्यूयॉर्क और पेरिस जैसे शहरों से बेहतर है। परिवहन को मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रिक और एसी बसों को बढ़ावा दिया गया है। हाउसिंग समस्या के समाधान के लिए क्लस्टर रिडेवलपमेंट को एक गेम चेंजर प्रोजेक्ट बताते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
मिलिंद देवरा ने आरोप लगाया कि पिछले 25 वर्षों में कुछ परिवारों ने बीएमसी को ठेकेदारों के हवाले कर दिया था और इसे एटीएम की तरह इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि महायुति बीएमसी को भी एटीएम की तरह देखती है, लेकिन उनके लिए एटीएम का मतलब है “अकाउंटेबल टू मुंबईकर्स”, यानी मुंबईकरों के प्रति जवाबदेह प्रशासन।