झांसी में सीबीआई का बड़ा धमाका: गद्दों से निकली नकदी और सोने की ईंटें, जीएसटी के तीन अफसर 70 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार
झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली कार्रवाई को अंजाम दिया है। सीबीआई की टीम ने बुधवार को सेंट्रल जीएसटी (CGST) के तीन आला अधिकारियों को 70 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इस छापेमारी में न केवल रिश्वत की रकम बरामद हुई, बल्कि अधिकारियों के आवासों से लगभग 1.60 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी, सोने-चांदी की ईंटें और करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं। भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी थीं कि अधिकारियों ने रिश्वत की रकम को अपने बेडरूम के गद्दों और बिस्तरों के भीतर छिपाकर रखा था, जिसे निकालने के लिए सीबीआई को गद्दे फाड़ने पड़े और नोट गिनने के लिए मशीनें मंगवानी पड़ीं।
रिश्वत का खेल और रंगे हाथों गिरफ्तारी
इस पूरी कार्रवाई की पटकथा 13 दिन पहले शुरू हुई थी। 18 दिसंबर को झांसी के झोकनबाग स्थित ‘जय दुर्गा हार्डवेयर’ के प्रतिष्ठान पर सेंट्रल जीएसटी की टीम ने टैक्स चोरी की शिकायत पर छापा मारा था। इस छापे में करोड़ों की कर चोरी पकड़ी गई थी। इसी मामले को रफा-दफा करने के लिए जीएसटी अधिकारियों ने फर्म के मालिक राजू मंगनानी से दो करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की थी। इसकी भनक लगते ही शिकायतकर्ता ने सीबीआई से संपर्क किया। सीबीआई ने जाल बिछाते हुए अधिकारियों के फोन सर्विलांस पर ले लिए। बुधवार दोपहर जब हार्डवेयर कारोबारी राजू मंगनानी रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 70 लाख रुपये लेकर अनिल तिवारी और अजय शर्मा को देने पहुंचा, तभी सीबीआई ने घेराबंदी कर उन्हें दबोच लिया।
आलीशान जीवनशैली देख दंग रह गए जांच अधिकारी
गिरफ्तारी के बाद जब सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने आरोपियों के आवासों पर छापेमारी की, तो वहां का नजारा देख अधिकारी भी हैरान रह गए। सेवाराम मिल कंपाउंड निवासी अधीक्षक अनिल तिवारी के घर में लग्जरी की वे तमाम वस्तुएं मौजूद थीं जो एक राजसी जीवन का हिस्सा होती हैं। घर में लगा महंगा फर्नीचर, विदेशी सजावटी सामान और आलीशान इंटीरियर उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक था। जांच में सामने आया कि अनिल तिवारी पिछले ढाई दशक से झांसी में ही तैनात हैं और जीएसटी से जुड़े हर विवादित मामले को सुलझाने के मुख्य केंद्र रहे हैं। दो साल पहले उनका तबादला आगरा हुआ था, लेकिन अपने रसूख के दम पर वे कुछ ही महीनों में वापस झांसी लौट आए थे।
गद्दों में छिपी थी करोड़ों की नकदी
छापेमारी के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा अधीक्षक अजय शर्मा के घर पर हुआ। सीबीआई को सूचना मिली थी कि रिश्वत की रकम और काली कमाई घर में ही छिपाई गई है। जब सामान्य तलाशी में कुछ हाथ नहीं लगा, तो टीम ने बेडरूम के बिस्तरों की जांच शुरू की। गद्दों को फाड़ने पर उनके भीतर से नोटों की गड्डियां निकलने लगीं। सीबीआई ने यहां से करीब 1.60 करोड़ रुपये नकद बरामद किए हैं। नकदी इतनी ज्यादा थी कि हाथ से गिनना असंभव था, जिसके बाद बैंक से नोट गिनने वाली मशीनें मंगवाई गईं। नकदी के साथ-साथ भारी मात्रा में सोने और चांदी की ईंटें व जेवरात भी बरामद हुए हैं।
डिप्टी कमिश्नर की भूमिका और संपत्तियों का खुलासा
इस भ्रष्टाचार कांड की आंच विभाग की डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी तक भी पहुंच गई है। गिरफ्तार अधिकारियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि इस पूरे सिंडिकेट में डिप्टी कमिश्नर की भी मर्जी शामिल थी। जांच में पता चला कि प्रभा भंडारी ने मात्र छह माह की तैनाती के दौरान ही दिल्ली के पास 68 लाख रुपये का एक फ्लैट खरीदा था। जब सीबीआई उनके ‘नमो होम्स’ स्थित फ्लैट पर पहुंची, तो वहां ताला लटका मिला। सुरक्षा गार्डों और कॉलोनाइजर द्वारा सहयोग न किए जाने पर सीबीआई ने ताला तोड़ने की चेतावनी दी, जिसके बाद गेट खोला गया। अधिकारियों ने पाया कि डिप्टी कमिश्नर ने कार्यालय का पूरा प्रभार अनिल तिवारी और अजय शर्मा जैसे भ्रष्ट अधीनस्थों के हवाले कर रखा था।
कारोबार और निवेश का मकड़जाल
जांच में यह भी सामने आया है कि ये अधिकारी केवल रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने भ्रष्टाचार की कमाई को विभिन्न व्यवसायों में लगा रखा था। अधीक्षक अनिल तिवारी सिविल लाइंस स्थित एक प्रतिष्ठित रेस्तरां में पार्टनर हैं और उन्होंने जमीन के कारोबार में करोड़ों रुपये का निवेश कर रखा है। सीबीआई को उनके घर से कई ऐसी गोपनीय फाइलें मिली हैं जो अन्य व्यापारियों से अवैध वसूली की ओर इशारा करती हैं। इसके अलावा, अधिकारियों द्वारा शेयर बाजार में बड़ी मात्रा में पैसा लगाए जाने के सबूत भी मिले हैं। जीएसटी विभाग की आड़ में इन अफसरों ने झांसी में अपना एक समानांतर आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर लिया था।
आरपीएफ बनी सीबीआई की गवाह
इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी को अंजाम देने के लिए सीबीआई ने स्थानीय पुलिस के बजाय रेलवे सुरक्षा बल (RPF) पर भरोसा जताया। मंगलवार रात जब सीबीआई नमो होम्स कॉलोनी में डिप्टी कमिश्नर के घर छापेमारी करने पहुंची, तो वहां उन्हें स्वतंत्र गवाहों की कमी महसूस हुई। स्थानीय लोगों और सुरक्षा गार्डों के असहयोग के बाद, सीबीआई ने आरपीएफ के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त से संपर्क किया। इसके बाद आरपीएफ ने अपनी महिला और पुरुष टीम को गवाह के रूप में उपलब्ध कराया। इस पूरी कार्रवाई को इतना गोपनीय रखा गया था कि स्थानीय पुलिस और जीएसटी विभाग के अन्य कर्मचारियों को इसकी कानों-कान खबर नहीं हुई।
शहर में हड़कंप और भविष्य की कार्रवाई
बुधवार सुबह जब इलाइट चौराहे पर सीबीआई की तीन गाड़ियों ने जीएसटी कर्मचारियों को घेरकर पकड़ा, तो पूरे शहर में हड़कंप मच गया। राजू मंगनानी, जो शहर का बड़ा हार्डवेयर कारोबारी है, उसकी गिरफ्तारी ने व्यापारिक जगत को भी हिला दिया है। फिलहाल सीबीआई ने अनिल तिवारी, अजय शर्मा, नरेश कुमार गुप्ता (जीएसटी अधिवक्ता) और कारोबारी राजू मंगनानी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। झांसी में हुई इस कार्रवाई ने सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है और यह संदेश दिया है कि सुरक्षा एजेंसियां अब ‘सफेदपोश’ अपराधियों को बख्शने के मूड में नहीं हैं।