• January 31, 2026

चंद्रशेखर बावनकुले

महाराष्ट्र निकाय चुनाव: बावनकुले का ‘मतभेद निपटान’ बयान, महायुति में डैमेज कंट्रोल की कोशिश?

मुंबई, 12 दिसंबर 2025:महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बीच महायुति (BJP-शिवसेना-एनसीपी) में उभरे मतभेदों को सुलझाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। BJP के प्रदेश अध्यक्ष और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने गुरुवार को कहा कि चुनाव के दौरान हुए “मनभेद-मतभेद” को 3 दिसंबर (मूलतः परिणाम घोषणा की तारीख) के बाद सब मिलकर निपटाएंगे। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश से मतगणना 21 दिसंबर तक टल गई है, जिससे यह बयान और प्रासंगिक हो गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह महायुति की एकता बचाने का डैमेज कंट्रोल है, खासकर नितेश राणे जैसे नेताओं के विवादास्पद बयानों के बाद।बावनकुले का मुख्य बयान: ‘3 तारीख के बाद सब साफ’
  • मतभेदों पर ऐलान: बावनकुले ने कहा, “नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में स्थानीय राजनीति के चलते आपसी मतभेद-मनभेद हुए हैं। लेकिन 3 दिसंबर के बाद हम सभी (महायुति के नेता) मिलकर इन्हें निपटाएंगे।” उन्होंने जोर दिया कि यह “दोस्ताना लड़ाई” है, लेकिन एकता बरकरार रहेगी।
  • संदर्भ: यह बयान नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आया, जहां उन्होंने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा। बावनकुले ने कहा कि आयोग की “गड़बड़ी” से परिणाम टले, लेकिन महायुति की जीत पक्की है।

नितेश राणे के आरोपों पर रिएक्शन: ‘लोकल सर्किट्री का मामला’

  • राणे का विवाद: BJP विधायक नितेश राणे ने सिंधुदुर्ग में उद्धव ठाकरे गुट के प्रचार पर शिंदे गुट के नेताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि “शिवसेना पर वार करने वालों को छोड़ेंगे नहीं।”
  • बावनकुले का जवाब: मंत्री ने इसे हल्के में लिया, “राणे ने स्थानीय परिस्थितियों को देखकर बोला होगा। अलग-अलग गठबंधनों के चलते लोकल निर्णय होते हैं। बार-बार जिला-स्तरीय बयान आ रहे हैं, लेकिन सब 3 तारीख के बाद सुलझ जाएगा।” यह बयान महायुति में तनाव को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

महायुति का बड़ा फैसला: ‘कार्यकर्ता अपनी पार्टी में ही रहें’

  • नया ऐलान: बावनकुले ने India TV को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बताया कि BJP, शिवसेना (शिंदे) और NCP (अजित) ने सहमति बनाई है – निकाय चुनाव से पहले कोई दल-बदल नहीं होगा। तीनों दल एक-दूसरे के कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी में नहीं लेंगे।
  • कारण: “लोकल लेवल पर कभी गड़बड़ी हो जाती है, लेकिन हम कार्यकर्ताओं को समझाएंगे कि जिस पार्टी का सदस्य है, वहीं रहे।” यह फैसला समन्वय समिति की बैठक में लिया गया, ताकि वोट बंटवारा न हो और एकता बनी रहे।
  • पृष्ठभूमि: उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अमित शाह से हालिया मुलाकात के बाद यह कदम उठाया गया। बावनकुले ने कहा, “शिंदे नाराज नहीं हैं; महायुति मजबूत है।”

चुनाव अपडेट: 21 दिसंबर को रिजल्ट, पहले चरण में 47% वोटिंग

  • टलाव का विवाद: मूलतः 3 दिसंबर को आने वाले परिणाम बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर बेंच) के आदेश से 21 दिसंबर तक स्थगित। कोर्ट ने कहा कि 24 निकायों में 20 दिसंबर को वोटिंग के बाद ही गिनती हो, ताकि मतदाता प्रभावित न हों। एग्जिट पोल पर भी रोक।
  • वोटिंग: पहले चरण (2 दिसंबर) में 47.51% मतदान। कई जगह हिंसा-झड़प (जैसे चंद्रपुर में EVM तोड़ना), लेकिन BJP ने दावा किया कि जनता महायुति के साथ है।
  • आयोग पर हमला: बावनकुले ने SEC पर “कानून की गलत व्याख्या” का आरोप लगाया। केंद्रीय आयोग ने रिपोर्ट मांगी है। विपक्ष (कांग्रेस) ने इसे “ऑपरेशन लोटस” बताया।

यह बयान महायुति की आंतरिक कलह (जैसे राणे vs शिंदे गुट) को दबाने की रणनीति लगता है। BMC चुनावों के लिए भी सीट-बंटवारे की समिति बनी है। क्या 21 दिसंबर के रिजल्ट महायुति की एकता टेस्ट करेंगे? राजनीतिक हलचल तेज है।

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