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नीतीश का मास्टरस्ट्रोक: गृह विभाग दिया, रिमोट कंट्रोल छिपाया!

पटना, 24 नवंबर 2025: बिहार की सियासत में एक बार फिर नीतीश कुमार ने सबको चौंकाया। 20 साल बाद पहली बार गृह मंत्रालय बीजेपी के पास गया। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के हाथ में कानून-व्यवस्था की कमान सौंपी गई, लेकिन सवाल उठ रहा है – क्या सम्राट को मिला पावर पूरा है? या नीतीश ने चालाकी से असली ताकत अपने पास ही रखी है? जिस विभाग ने नीतीश को “सुशासन बाबू” बनाया, उसी कांटों भरे ताज को उन्होंने बीजेपी के सिर पर रख दिया है। अब अगर अपराध बढ़ा तो निशाना बीजेपी पर होगा, और अफसरों पर पकड़ नीतीश के हाथ में रहेगी। आखिर नीतीश ने ऐसा खेल क्यों रचा? क्या यह बीजेपी को फंसाने की रणनीति है या 2025 के बाद का भविष्य सुरक्षित करने का दांव?

सम्राट को गृह तो मिला, कंट्रोल क्यों नहीं?

सम्राट चौधरी बिहार के नए गृह मंत्री बन गए हैं। कानून-व्यवस्था, पुलिस, खुफिया तंत्र – सब उनके पास है। लेकिन हकीकत कुछ और है। राज्य के सारे आईएएस, आईपीएस, बीएएस, बीपीएस अफसरों का ट्रांसफर-पोस्टिंग, प्रमोशन, सजा-ए-इनाम अब भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास है, क्योंकि सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) उन्होंने अपने पास रखा है। GAD को बिहार में “सुपर डिपार्टमेंट” कहा जाता है। बिना GAD की मंजूरी के गृह विभाग एक भी अफसर नहीं हटा सकता, न नया लगा सकता है। यानी सम्राट चौधरी के पास गृह का नाम है, लेकिन रिमोट कंट्रोल नीतीश के हाथ में। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश ने जान-बूझकर यह चाल चली ताकि कानून-व्यवस्था पर कोई सवाल उठे तो जवाब बीजेपी को देना पड़े।

कांटों भरा ताज और तीन बड़ी चुनौतियाँ

गृह मंत्रालय बिहार में परफॉर्मेंस का सबसे बड़ा इम्तिहान है। यही विभाग नीतीश को जंगलराज से सुशासन तक ले गया। अब सम्राट चौधरी के सामने तीन बड़ी चुनौतियाँ हैं – पहली, बढ़ते अपराध पर लगाम। दूसरी, बीजेपी हाईकमान की उम्मीदों पर खरा उतरना। तीसरी, नीतीश के साये से बाहर अपना अलग कद बनाना। अगर सम्राट सफल हुए तो बीजेपी उन्हें 2025 का सीएम चेहरा बना सकती है, और अगर फेल हुए तो सारा ठीकरा उनके सिर फूटेगा। नीतीश ने चतुराई से खुद को सेफ साइड कर लिया है। विपक्ष पहले की तरह नीतीश पर हमला नहीं कर पाएगा, क्योंकि गृह मंत्री अब बीजेपी कोटे का है। यानी अच्छा परफॉर्मेंस हुआ तो क्रेडिट नीतीश लेंगे, बुरा हुआ तो डिफेंड बीजेपी करेगी।

बीजेपी का सपना: नीतीश के बाद बिहार पर कब्जा

बिहार में अभी तक बीजेपी अपना सीएम नहीं बना पाई। इस बार सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उसे नीतीश को ही सीएम बनाना पड़ा। लेकिन अब रणनीति साफ है– सत्ता का केंद्र धीरे-धीरे अपने पास खींचना। 14 मंत्री, दोनों डिप्टी सीएम और गृह मंत्रालय – सब बीजेपी के पास। सम्राट चौधरी को आगे करके पार्टी एक मजबूत क्षत्रिय चेहरा तैयार कर रही है। नीतीश जानते हैं कि 2025 के बाद उनकी उम्र और स्वास्थ्य शायद साथ न दे, इसलिए वे अभी से बैलेंस बनाए रखना चाहते हैं। गृह विभाग देकर उन्होंने बीजेपी को जिम्मेदारी का बोझ दिया और GAD रखकर पावर का रिमोट अपने पास। अब अगले डेढ़ साल में कानून-व्यवस्था ही तय करेगी कि बिहार का अगला सीएम नीतीश का वारिस होगा या बीजेपी का चेहरा। खेल अभी बाकी है!

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