• February 13, 2026

ट्रंप प्रशासन की बड़ी तैयारी: सऊदी अरब को F-35 फाइटर जेट का साथ मिलने की कगार पर

ट्रंप प्रशासन की बड़ी तैयारी: सऊदी अरब को F-35 फाइटर जेट का साथ मिलने की कगार परवॉशिंगटन, 5 नवंबर 2025अंतरराष्ट्रीय रक्षा जगत में हलचल मची है। ट्रंप प्रशासन सऊदी अरब को 48 F-35 स्टील्थ फाइटर जेट बेचने की योजना पर विचार कर रहा है। यह अरबों डॉलर का सौदा मध्य पूर्व के शक्ति संतुलन को बदल सकता है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव को पेंटागन की प्रारंभिक मंजूरी मिल चुकी है और अब यह राजनीतिक चर्चा के दौर में है। F-35, दुनिया का सबसे उन्नत जेट, रडार से अदृश्य रहता है। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अमेरिका यात्रा से पहले यह डील सऊदी की सैन्य ताकत को नई ऊंचाई दे सकती है। लेकिन क्या यह अमेरिका की इज़राइल को सैन्य श्रेष्ठता की नीति को चुनौती देगा? आइए जानें इस सौदे के पीछे की तकनीक, राजनीति और क्षेत्रीय प्रभावों को, जो मध्य पूर्व के भविष्य को आकार दे सकते हैं।

F-35 की ताकत: मध्य पूर्व का सैन्य समीकरण बदलेगा

F-35 लॉकहीड मार्टिन का बनाया दुनिया का सबसे उन्नत स्टील्थ फाइटर जेट है, जो दुश्मन रडार से लगभग अदृश्य रहता है। इसमें अत्याधुनिक सेंसर, AI-आधारित कंट्रोल सिस्टम और फुर्तीली युद्ध क्षमता इसे हवा में अजेय बनाती है। मध्य पूर्व में अभी सिर्फ इज़राइल इसका इस्तेमाल करता है, जिससे उसकी सैन्य श्रेष्ठता बनी हुई है। सऊदी को 48 F-35 जेट्स मिलने से उसकी एयर फोर्स पुराने F-15 और टॉरनेडो से अपग्रेड हो जाएगी। सऊदी ने इस साल ट्रंप प्रशासन से इसकी अपील की थी। यह सौदा न सिर्फ सऊदी की ईरान के खिलाफ ताकत बढ़ाएगा, बल्कि अमेरिकी हथियार उद्योग को आर्थिक बूस्ट देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सऊदी के Vision 2030 के तहत सैन्य आधुनिकीकरण का बड़ा कदम है। लेकिन क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका भी इसे जटिल बनाती है।

इज़राइल की सैन्य श्रेष्ठता पर सवाल: राजनीतिक जटिलताएं

अमेरिका की दशकों पुरानी नीति इज़राइल को पड़ोसियों से बेहतर हथियार देने की रही है। सऊदी को F-35 देना इस नीति की सबसे बड़ी चुनौती है। इज़राइल के F-35I एडिर में स्वदेशी संशोधन हैं, लेकिन सऊदी का स्टैंडर्ड F-35A भी अंतर कम कर देगा। बाइडेन प्रशासन ने इसे इज़राइल-सऊदी सामान्यीकरण से जोड़ा था, जो गाजा युद्ध के कारण रुका। अब ट्रंप प्रशासन इस डील को आगे बढ़ा रहा है, जो अमेरिका-इज़राइल-सऊदी त्रिकोण को प्रभावित करेगा। मई 2025 में 142 अरब डॉलर के हथियार सौदे ने दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत किया। विशेषज्ञों का मानना है, वॉशिंगटन को अब रणनीतिक स्थिरता और व्यापारिक लाभ में से चुनना होगा। इज़राइल की संभावित आपत्ति इस डील को रोक सकती है। यह सवाल मध्य पूर्व की भू-राजनीति को नया रंग दे रहा है।

ट्रंप-MBS की नजदीकी: मंजूरी की राह में चुनौतियां

ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद सऊदी-अमेरिका संबंधों में नई गर्माहट आई है। मई 2025 में 142 अरब डॉलर का रक्षा पैकेज इतिहास का सबसे बड़ा समझौता था। अब F-35 डील पेंटागन, व्हाइट हाउस और कांग्रेस की मंजूरी का इंतजार कर रही है। प्रक्रिया महीनों से चल रही है, और ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद ही यह लागू होगी। लेकिन 2018 की खशोगी हत्या के बाद कई अमेरिकी सांसद सऊदी को हाई-टेक हथियार देने के खिलाफ हैं। उन्हें डर है कि इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ेगी। विश्लेषकों का कहना है, यह डील अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए वरदान होगी, लेकिन ईरान जैसे प्रतिद्वंद्वियों को उकसा सकती है। क्राउन प्रिंस की यात्रा से पहले अगर यह सौदा पूरा हुआ, तो यह ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति की जीत होगी। भविष्य में सऊदी क्षेत्रीय सुपरपावर बन सकता है।
Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *