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आपदा के 11 साल में कितना बदल गया केदारनाथ

केदारनाथ आपदा के लगभग 11 वर्ष हो चुके हैं। इस आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिजन धीरे-धीरे उसे घटना को भूलने की कोशिश कर रहे हैं। आपदा के बाद केदारनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत विकास कार्य गतिमान हैं। केदारनाथ की यात्रा तीर्थयात्री दुगने उत्साह और ऊर्जा से कर रहे हैं।

वर्ष 2013 की आपदा में केदारनाथ के साथ-साथ गौरीकुंड, सोनप्रयाग, सीतापुर सेमी कुंड समेत आधा दर्जन से अधिक कस्बों में मंदाकिनी नदी के कटाव से काफी क्षति उठानी पड़ी थी। आपदा के बाद सरकार ने युद्धस्तर पर पुनर्निर्माण कार्य करके स्थितियां अनुकूल की हैं। वर्ष 2013 की आपदा में केदारनाथ के बाद सबसे अधिक नुकसान सेमी गांव को उठाना पड़ा था। मंदाकिनी नदी के उफान पर आने तथा लगातार नदी के कटाव के चलते सेमी में राष्ट्रीय राजमार्ग पूर्ण रूप से जमींदोज हो गया था। इसके साथ ही कई होटल तथा आवासीय भवन भी क्षतिग्रस्त हुए थे। आंकड़ों के अनुसार सेमी गांव में 12 आवासीय भवन पूर्ण रूप से जमींदोज हुए थे। कई आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए थे। प्रभावित परिवारों को सरकार द्वारा अन्य स्थानों पर विस्थापित भी किया गया। मंदाकिनी नदी के दाएं ओर विद्यापीठ, कुंड, सेमी, भैसारी और बाईं ओर संसारी के ग्रामीणों की कई हेक्टेयर भूमि तबाह हो गई थी। इसी आपदा के दौरान काली नदी के कटाव से लोहे का स्थाई पुल देखते ही देखते नदी के तेज बहाव में बह गया था। महालक्ष्मी मंदिर का 80 फीसदी भाग पूर्ण रूप से ढह गया था और कई पौराणिक मूर्तियां भी नदी की भेंट चढ़ गई थीं। आपदा के बाद इन स्थानों के सुधारीकरण के लिए न केवल सरकार बल्कि कई स्वयं सेवी संस्थाएं, अर्धसैनिक बल भी आगे आए थे।

मस्ता कालीमठ पैदल मार्ग के मंदाकिनी नदी के ऊपर रिडकोट नामक स्थान पर पैदल पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी। जिस कारण कालीमठ घाटी का संपर्क अन्य दुनिया से कट गया था। जगह-जगह मोटर मार्ग धंसने से कालीमठ की आवाजाही पूर्ण रूप से बाधित हो गई थी। बीएसएफ द्वारा कालीमठ घाटी को गोद लेकर काली मठ मंदिरों का पुनर्निर्माण, राजकीय हाई स्कूल कालीमठ का सुधारीकरण, नए भवन निर्माण सहित विभिन्न गांव के लिए क्षतिग्रस्त पहुंच पैदल मार्ग सुधारे गए थे। लोनिवि द्वारा मोटर मार्ग आवाजाही के लिए महज एक माह में बहाल किए गए थे। आपदा के बाद कुंड गुप्तकाशी मोटर मार्ग की स्थित जर्जर हो चुकी थी। लगभग 10 वर्ष गुजरने के बाद भी काफी ट्रीटमेंट के बाद यह मोटर मार्ग सुरक्षित यात्रा के लिए अच्छा नहीं था, लेकिन गत वर्ष केंद्र सरकार द्वारा लगभग 99 करोड़ बजट पारित कर कुंड गुप्तकाशी मोटर मार्ग को आवाजाहि हेतु बेहतर बना दिया गया है। सेमी गांव के नीचे पक्के चेकडैम पर कार्य निरंतर गतिमान है।

सोनप्रयाग में जिन व्यवसा यियों की दुकान क्षतिग्रस्त हुई थी, उन्हें उचित मुआवजा देकर उस स्थान का सुधारीकरण करके प्रशासन ने लगभग 300 वाहनों की पार्किंग के लिए डबल स्टोरी पार्किंग निर्मित की है। सीतापुर में भी 200 वाहनों के लिए पार्किंग निर्मित की जा चुकी है। कुल मिलकर इन 11 वर्षों में आपदा के बाद क्षतिग्रस्त हुए मकान, सड़क तथा जमीनों को सुरक्षित करने की दृष्टिगत बेहतरीन कार्य किया गया है।

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